रविवार, 14 जून 2009

संशय निकष है . ..

आज 'लंठई' पर लिखने का मन था । लेकिन बहुत दिनों से 'कविताएँ और कवि भी...' पर कुछ नया न आने से सुधी जन दु:खी थे। इसलिए वहाँ के लिए लिखना प्रारम्भ किया तो बहाव कुछ और ही हो गया ।
गम्भीरता और हास्य को एकइच साधना मेरे लिए कठिन है। सो वहाँ का लिंक दे रहा हँ। पढ़ें और टिप्पियाएँ।

4 टिप्‍पणियां:

  1. badhiya hai. Aapne apni tippni se meri samasya hal kar dee. Vaise jaldi hee is par kuchh bade logon ke vichar aapko padhne milenge.

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  2. लंठ खालिस यूपोरियन गुण है। गांगेय प्रदेश में व्यापक है!

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  3. @ ज्ञानदत्त पाण्डेय

    नहीं जी लण्ठ व्यक्तिवाचक संज्ञा है। गुणवाचक संज्ञा तो 'लंठई' ही है ।

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