रविवार, 9 अगस्त 2009

बेमतलब नहीं है यह !

कल रात सिद्धार्थ जी का फोन आया। मेरे लेख उनके ब्लॉग रोल पर अद्यतन नहीं हो रहे थे। इसके पहले उन्हों ने इस बारे में टिप्पणी की थी। मैंने तब दिलासा दिया था कि कुछ मिनटों के अंतर पर तीन तीन पोस्ट करने से बेचारा तंत्र कंफ्यूज हो गया होगा। हालाँकि ऐसा नहीं होना चाहिए था लेकिन हुआ। ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत भी तीनों पोस्ट नहीं दिखा पाए। मुझे एक सबक मिल गया। पोस्ट थोड़ा धीरज के साथ भेजो - इतनी उतावली एक आलसी को शोभा नहीं देती |

लेकिन सिद्धार्थ जी का फोन मेरे उसके बाद की पोस्ट पर था जो ब्लॉग रोल और एग्रीगेटर पर दिख रही थी लेकिन मेरे ब्लॉग से ग़ायब थी। सिद्धार्थ जी ने बताया कि जिन लोगों ने आप के ब्लॉग को मार्क किया होगा उन सबको यह समस्या आ रही होगी। असल में एक एकवर्णी संस्कृत श्लोक मुझे कहीं रोमन में लिखा मिल गया। चुहल में उसे देवनागरी में परिवर्तित कर मैंने उसके अर्थ बताने के लिए ब्लॉगरों हेतु पोस्ट कर दिया।

लेकिन एक गड़बड़ हो गई - पोस्ट कविता वाले ब्लॉग पर करनी थी लेकिन हो गई आलसी वाले पर। जब तक त्रुटि का अनुभव किया, विलम्ब हो चुका था। एग्रीगेटर पर पोस्ट दिखने लगी थे। मैंने पोस्ट को मिटा कर कविता वाले ब्लॉग पर दे दिया लेकिन एग्रीगेटर पर पोस्ट दिखती रही और सुधी जन के ब्लॉग रोल पर भी। क्या इसकी कोई राह है कि पोस्ट मिटा देने पर ब्लॉग रोल और एग्रीगेटर पर दिखनी बन्द हो जाय ?

एक सबक और मिला - कभी पोस्ट को मिटाओ नहीं और बाकी लोगों का ध्यान रखते हुए सतर्क होकर पोस्ट करो। इस पोस्ट को मेरी क्षमा प्रार्थना समझें और सम्बद्ध पोस्ट यहाँ पढ़ें - बेमतलब नहीं है यह !

8 टिप्‍पणियां:

  1. कन्‍फ्यूज नहीं
    फ्यूज यानी आलसी
    हो गया होगा
    तीन काम एक साथ
    पाकर
    इसलिए रूक गया होगा
    जाकर।

    एग्रीग्रेटर को भेजें मेल
    तभी वहां दिखना बंद
    हो सकती है मेल
    गिरिजेश जी।

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  2. गिरिजेश जी..
    जब मैंने ब्लॉग्गिंग शुरू की थी तो यही गलती मैंने भी की थी..हालांकि ऐसा नहीं था की अग्ग्रीगेतोर्स ने नहीं दिखाया..और कल मेरे पास तीनो ही पोस्टें अपने आप आयी थी ..मगर एक बात से मैं भी पूरी तरह इत्तेफाक रखता हूँ ..पोस्टों ..कम से कम एक ब्लॉग पर ...छ घंटे का अंतर तो जरूर ही होना चाहिए..

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  3. मैंने भी एक बार एक कविता ठेली थी। थोडी देर बाद लगा कि ये क्या बकवास लिख रहा हूँ मैं। तुरंत हटा लिया। लेकिन एग्रीगेटर पर तो आ चुकी थी कविता। सो वहां उसी पोस्ट पर कविता के बदले रूकावट के लिये खेद है का बोर्ड लगाना पडा।


    सच है कि पोस्ट ठेलने में जल्दबाजी अच्छी नहीं।

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  4. कोई खास बात नहीं, यह सब नहीं होगा तो लर्नेंगे कैसे! :-)

    वैसे एक सुझाव दूंगा - घारावाहिक ठेलने की बजाय हर पोस्ट इण्डिपेण्डेण्ट हो तो अच्छा। ज्यादा से ज्यादा पहले वाली का लिंक। वह लिंक भी ऐसा कि बन्दा फुर्सत में वहां जाये - ये न हो कि वहां जाये बिना पोस्ट पढ़ना ही अटक जाये।

    पाठक की मेमोरी बहुत कम मान कर चलनी चाहिये।

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  5. तो आपका आलस्य आपसे ज्यादा मेहनत करा रहा है।

    ...गुरुदेव की बात नोट करें तो हम नियमित पाठकों के अतिरिक्त दूसरों के लिए भी अच्छा करेंगे।

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  6. यह गलती मुझसे भी हुई है। एक से अधिक ब्लोग होने पर ऐसा हो जाता है। ब्लोग पर पोस्ट मिटाने पर एग्रिगेटर पर लिंक नहीं मिटती है।

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