मंगलवार, 23 मार्च 2010

वे लोग किस खुशी की बात करते थे ?

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भगत सिंह
राजगुरु
सुखदेव
श्रद्धांजलि, सभी चित्र साभार: http://www.shahidbhagatsingh.org
बलिदान दिवस: 23 मार्च 1931
खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं।
वे लोग किस खुशी की बात करते थे ? ऐसा क्या था उस 'खुशी' में जो  जीवन तक निछावर कर गए?
.. आज स्वयं से, सब से यह पूछ रहा हूँ, "हम 'खुश' तो हैं न ?"
     

21 टिप्‍पणियां:

  1. श्रृद्धांजलि!!

    -

    हिन्दी में विशिष्ट लेखन का आपका योगदान सराहनीय है. आपको साधुवाद!!

    लेखन के साथ साथ प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु टिप्पणी करना आपका कर्तव्य है एवं भाषा के प्रचार प्रसार हेतु अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें. यह एक निवेदन मात्र है.

    अनेक शुभकामनाएँ.

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  2. हाँ पूछ तो रहे हैं...खुश है या नहीं...बस जवाब नहीं मिल पा रहा है...
    २ मिनट का मौन रख कर इन अमर सेनानियों के चरणों में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करना चाहते हैं......

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  3. उनकी खुशी अभी तक पहुँची नहीं हम तक, यद्यपि उन्होंने तो अपना काम कर दिया, हमारा अपना बाकी है.

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  4. बहुत खुश हैं जी ...बहुत खुश ...
    एक तरफ देश के कर्णधारों की आरामदायक जिंदगी ....स्विस बैंक में जमा अकूत धन ...महंगाई से सर्वथा अप्रभावित लोग ...जिनके इंधन और खाने का खर्च तक देश उठाता है (आज ही देखा दिल्ली में गैस सिलेंडर की कीमत में 40रुपयों की वृद्धि )...
    दूसरी ओर दो वक़्त की सूखी रोटी के लिए तरसते खून पसीना बहाते ....सूखे खेतों को निहारते आत्महत्या करते किसान ....
    खुश क्यों नहीं होंगे जी ...बहुत खुश हैं ...
    आखिर इन देशभक्तों ने इसीलिए तो अपनी जान कुर्बान की थी .....!!

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  5. बस तभी तो कहता हूं कि यदि वे आज भी जीवित होते तो कदाचित या तो हमें मार
    डालते या शायद खुद ही खुदकशी कर बैठते ...अफ़सोस होता है बस अफ़सोस

    अजय कुमार झा

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  6. कैसी ख़ुशी. इन बलिदानों का क्या हुआ? महज श्रद्धा सुमन अर्पित करने के सिवा हम कुछ नहीं कर सकते.

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  7. खुश रहो अहले वतन हम तो सफर करते हैं..
    इस महा वाक्य के बाद अब बचा क्या.

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  8. जीवन मे एक उद्देश्य हो तो सुख-दुःख की तलाश किसे !
    वो तो सिर्फ अपने उद्देश्य पूर्ति मे मगन रहते थे|

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  9. उन्होंने देखे थे जो सपने, उनके लिये मर मिटना ही उनकी खुशी थी. उनकी इस खुशी को बनाये न रख पाना, उनके सपनों को न पूरा कर पाना हमारा सबसे बड़ा दुःख है.
    शहीदों को नमन!!!

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  10. वो जो पोस्ट अपने कविता वाले ब्लॉग पर की है वो ईमेल मुझे भी आया था... सोच रहा हूँ ख़ुशी के बारे में...

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  11. इसी खुशी की बात करते थे साहब कि जब हमारे खुद के लोग इस देश को अंग्रेजों से ज्यादा वीभत्स तरीके से लूट सकते हैं तो अंग्रेज क्यों लूटें?
    आज अपने बच्चों से ही जब आज के दिन का औचित्य पूछने पर कोई जवाब नहीं मिला तो इन दीवानों की दीवानगी और हम अहसानफ़रामोशों पर जो महसूस हुआ वो नहीं लिखा जा सकता। याद है तो बस गांधी और नेहरू और उनका महात्याग।

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  12. शायद हमे ज़रूरत से ज्यादा खुशी,आज़ादी मिल गई है।
    नमन करता हूं शहीदों कों जिनकी चिताओं पर हम आज़ादी का जश्न मना रहे हैं।

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  13. अमर शहीद अमर रहें
    शहीद भगत सिंह पर एक रपट यहाँ भी देखें
    http://sharadakokas.blogspot.com

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  14. अहले वतन खुश क्या हैं.हम सभी बस शर्मिंदा हो सकते हैं .इन हालात पर .कुछ भी न कर पाने पर या न करने पर.

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  15. इन शहीदों की शहादत को मात्र एक साम्य/समाजवाद के नजरिये से लपेट कर पेश करने का काम चल रहा है। वह उचित नहीं है।

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  16. शहीदों को याद करते हुए बहुत अच्छा लेख.....

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  17. ऐसा क्या था उस 'खुशी' में जो जीवन तक निछावर कर गए?..
    देवता बस देना जानते हैं. (तभी तो कैसे भी लोग अपने बच्चों के लिए सर्व-दाता बन पाते हैं - ...देवो भवः) हमारी खुशी में ही उनकी खुशी है. हम उनकी खुशी को कैसे समझेंगे, कैसे पायेंगे?

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