गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

प्रात: से चुराए क्षणों में कुछ असहज बातें..

(1) 
वित्तीय वर्ष के अंत ने बहुत व्यस्त कर दिया है। कुछ लिखना नहीं हो पा रहा। कल एक पृष्ठ की फोटोकॉपी करने में तीन बार समझाने के बाद भी एक महिला प्रशिक्षु ने 10 पृष्ठ खराब किए। उन्हें फाड़ कर फेंकना पड़ा क्यों कि गोपनीय दस्तावेज था। मैं इस मामले में कुछ अधिक ही संवेदनशील हूँ, इतना कि मेरी टेबल पर 'प्रयुक्त लेकिन एक तरफ सादे कागज' पड़े रहते हैं जिनका उपयोग मैं ड्रॉफ्ट प्रिंट लेने के लिया करता हूँ । ... मैं बड़बड़ाया - एक और पेंड़ कटा !
मेरे एक वरिष्ठ ने सुन कर कहा," अरे इतना ही पेंड़ों को बचाना चाहते हो तो अखबार लेना बन्द कर दो..."
यह अप्रत्याशित था। ग्लॉसी और निहायत ही फालतू होने के कारण मैंने टाइम्स बन्द कराया था तो आशा के अनुरूप कायदे की सामग्री न होने के कारण जागरण (पत्रकार मित्रों से क्षमा)। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस और अमर उजाला लेता हूँ। प्रात:काल 15 मिनट इंडियन एक्सप्रेस पढ़ता हूँ। उसकी रिपोर्टिंग और अन्य सामग्री अच्छी लगती है। अमर उजाला श्रीमती जी के लिए है और इसलिए मैं भी पढ़ता हूँ कि अपने स्तर और अज्ञान के प्रति ईमानदार लगता है (पुन: पत्रकार मित्रों से क्षमा)। ... वरिष्ठ महोदय का यह प्रस्ताव क्रांतिकारी लगा लेकिन मैंने प्रतिवाद किया । उन्हों ने प्रत्युत्तर दिया, " नेट है, टी वी है, रेडियो है - देखो, सुनो। यह आलस ही है कि नेट पर पता नहीं क्या क्या ढूढ़ लेते हो लेकिन ऑनलाइन अखबारों को नहीं पढ़ते। टीवी को गरियाने का शौक चल पड़ा है। देखने का सऊर तो है नहीं । जरा सोचो अखबार छपने बन्द हो जाँय तो कागज की कितनी बचत हो। अखबार तो ऑनलाइन छप ही रहे हैं। " उस जनता की सोच जिसे नेट नहीं उपलब्ध, अखबारों की छपाई बन्द करने का विचार मैंने 13 नम्बर फाइल में डाल दिया लेकिन हम जैसे तो अखबार बन्द करा ही सकते हैं। 
यह विचार मन को मथे जा रहा है।
(2) 
 महिला प्रशिक्षु ने यह ग़लती क्यों की? न तो हमारे ऑफिस का वातावरण महिला विरोधी है और न ही बाहर इतनी अराजकता है कि एकाध घंटे अतिरिक्त रुक कर काम तसल्ली से निपटा दिए जाँय लेकिन इन्हें जाने क्या जल्दी रहती है कि आधे घंटे पहले से ही पैक अप की तैयारियाँ चलने लगती है। जाने के समय से आप घड़ी मिला सकते हैं। वित्तीय वर्षांत की क्लोजिंग ई आर पी सिस्टम होने के कारण अतिरिक्त काम ले कर आती है। लेकिन इन महिलाओं ने एक भी दिन अतिरिक्त समय नहीं दिया। एक से दो बजे तक लंच है तो है। ऐसा नहीं कि ये बहुत सुगढ़ या प्रवीण हैं। होता यह है कि अनजाने ही पुरुष कर्मी बढ़े कार्यभार को भी सहेज लेते हैं। 
हाँ, यह बता दूँ कि उनके बाल बच्चे नही हैं।  बढ़े हुए कार्य दबाव में भागीदार होने की पहल ये कभी नहीं करतीं। स्वत: प्रेरणा नहीं होती, हाँ कहने पर अनिच्छा पूर्वक अवश्य लग जाती हैं।  जिनके रात को देर तक माल में घूमने से घर वालों को आपत्ति नहीं उन्हें ऑफिस में विलम्ब होने से तो नहीं ही होगी। कहीं ऐसा तो नहीं कि महिलाएँ कार्य स्थल पर लैंगिक कारणों से अनुचित लाभ ले रही हैं ?  जब मैं यह लिख रहा हूँ तो आशा करता हूँ कि आप मेरी बात को नारीवादी चश्मे से नहीं देखेंगे और निष्पक्ष विचार करेंगे। अपवादों की बात नहीं, मैं एक सामान्य प्रवृत्ति की बात कर रहा हूँ। 
(3) 
सानिया मिर्ज़ा का पाकिस्तान में विवाह तय हुआ है। उसने घोषणा की है विवाहोपरांत 2012 में वह ओलम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। कई प्रश्न उठ रहे हैं:
(क) किसी विदेशी से विवाह करने के बाद नारी की भारतीय नागरिकता स्वत: समाप्त हो जाती है । क्या एक पाकिस्तानी  ओलम्पिक जैसे वैश्विक स्तर के खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता/ती है? हो सकता है मेरा ज्ञान पुराना, गलत या अधूरा हो। जानकार लोग सही बात बताएँ और साथ ही उत्तरांश का उत्तर दें।  
(ख)   सानिया को ऐसी क्या आवश्यकता पड़ी है कि अभी से इस तरह की घोषणा कर रही है? ओलम्पिक को अभी दो वर्ष हैं। 
(ग) ऐसी परिस्थिति में भारत का क्या रुख होना चाहिए? मंगल कामना है कि उसका विवाह सफल हो लेकिन यदि खुदा न खास्ता उसकी शादी ओलम्पिक के पहले टूट जाती है तो क्या उसे ओलम्पिक में भारत की तरफ से खेलने के लिए दुबारा भारत की नागरिकता लेनी होगी? 


25 टिप्‍पणियां:

  1. वाकई यह लेख असहज है , क्या आप दुबारा पुनर्विचार करेंगे अपनी असहजता पर ! हर व्यक्ति का अपना एक कद है ....
    यहाँ पर कोई और होता तो यहाँ कमेंट्स नहीं देता पर आप गिरिजेश राव हैं अतः सोचा की अपनी प्रतिक्रिया लिख दूं ! बुरा लगे तो अपने से बड़ा समझ माफ़ कर देना !

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  2. वाकई यह लेख असहज है , क्या आप दुबारा पुनर्विचार करेंगे

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  3. "सानिया मिर्ज़ा का पाकिस्तान में विवाह तय हुआ है। उसने घोषणा की है विवाहोपरांत 2012 में वह ओलम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। कई प्रश्न उठ रहे हैं:
    (क) किसी विदेशी से विवाह करने के बाद नारी की भारतीय नागरिकता स्वत: समाप्त हो जाती है । क्या एक पाकिस्तानी ओलम्पिक जैसे वैश्विक स्तर के खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता/ती है? हो सकता है मेरा ज्ञान पुराना, गलत या अधूरा हो। जानकार लोग सही बात बताएँ और साथ ही उत्तरांश का उत्तर दें।"

    विचारणीय सवाल, मगर हमारा देश तो सेक्युलर है !

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  4. साठ के दशक में एक गीत..... लारा लप्पा अडी टप्पा.... बहुत फेमस हुआ था। उसके बोल थे -

    आज कल की नारियां
    काम कुछ करती नहीं
    और
    बांधती हैं साडियां....

    उसकी अगली ही लाईन में लडकी कहती है

    आजकल के जेंटलमैन
    रहते हैं हरदम बेचैन
    खाली जेब मटकते नैन
    काम करे न काज
    फिर भी अकड दिखाए
    ओ बाबूजी, कुछ समझ न आए रे...

    लारा लप्पा लारा लप्पा लाई रखदा
    अडी टप्पा अडी टप्पा लाई रखदा...

    तो बंधु ये लडाई तो काफी पहले से चल रही है :)

    यूटूब पर यह रहा इस गीत का लिंक -

    http://www.youtube.com/watch?v=Bfo4EtfL5R0

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  5. आपकी असहजता अकारण ही नहीं है - एक विज्ञान कथा में नारी कर्मीं और सौन्दर्य के साहचर्य से कार्य इफिसिएंसी के बढ़ाये जाने की निष्पत्ति थी ...मगर लगता है सत्य कटु है -नग्न यथार्थ तो अन रोमांटिक होता ही है .....
    फिकर नाट..अपने हिस्स्से का करते जाईये ...और हाँ सानिया मिर्जा कब से परेशान कर रही हैं ?

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  6. फिलहाल तो यह तय होना है की भावी पति ,भूतपूर्व पति तो नहीं है | आपके लेख पर समर्थन के रूप में कमेन्ट करना मुसीवत मोल लेना है -भुक्त भोगी हूँ |मत कहो आकाश में कुहरा घना है /यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है | लिखा तो आपने सही ही है पर क्या करें ,कहा भी न नये चुप रहा भी न जाए

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  7. उन्हें भागने की जल्दी होती है ? कहीं सानिध्य की अल्पता तो असहजता का कारण नहीं ?

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  8. १. कुछ समय पहले अपने (ज्ञानदत्त जी) पांडे जी के ब्लॉग पर कही बात दोहरा रहा हूँ:
    भोजन के लिए प्रति व्यक्ति कितने किलो बकरियां कटीं, मालूम नहीं, मगर यह मालूम है कि बकरियों को विलुप्त होने का कोई संकट नहीं है, यह संकट है बाघों को जिनका प्रति व्यक्ति उपयोग शून्यप्राय है. जब तक कागज़ की ज़रुरत है, पेड़ों को ख़तरा कम है, क्योंकि पेड़ उगाने में व्यावसायिक रूचि है. जिस दिन पेड़ों का यह और दूसरे सभी उपयोग (मुद्रा और शौच-पत्र आदि) समाप्त हो जायेंगे उस दिन पेड़ विलुप्त होने का ख़तरा बढ़ जाएगा.
    तो भैया, अगर पेड़ों की खैर चाहते हो तो अखबार भी पढो और चिट्ठी लिखकर डाक में भी डालो.

    2. कहने को तीन पोस्ट की सामग्री है मगर फिलहाल absolutely no comments.

    3. क्या शादी के बाद भारतीय नागरिकता बनाए रखने का कोई तरीका नहीं है? यदि नहीं है तो फिर क्या ऐसा क़ानून महिला विरोधी नहीं हुआ? (मान लीजिये एक भारतीय पुरुष एक पाकिस्तानी नारी से शादी कर लेता है, क्या उसे भी नागरिकता खोने का ख़तरा है?)

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  9. @ स्मार्ट भैया!
    आप ने तो एक अलग ही दृष्टिकोण रख दिया। सोचने वाली बात है।

    नागरिकता के प्रश्न पर तो कोई जानकार ही बता पाएँगे लेकिन सानिया की घोषणा मेरे पल्ले नहीं पड़ रही ।

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  10. बहुत अच्छी प्रस्तुति। सादर अभिवादन।

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  11. सानिया के कदम से सब सकते में हैं । पाकिस्तान को एक मेडल की आशंका और वह भी हिन्दुस्तान की कीमत पर ।

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  12. इसीलिये कहा जाता है पुरुष मंगल से हैं तो महिला बुध से

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  13. १. भैया अखबार पढना तो बंद है अपना. मिंट लेते हैं और कभी उलटते भी नहीं... हाँ एक रूम पार्टनर पलटते हैं तो बंद नहीं हो पा रहा. एक ठो आईपैड ले लीजिये :) ओही पर समाचार पढियेगा हम तो आईपॉड पे ही पढ़ लेते हैं आजकल.
    २. इ सब तो हमहूँ देखे हैं... हमारे यहाँ रिसेसन में एक लड़की थी फायर हो गयी. अब कोई महिला नहीं ऑफिस में... वैसे ही इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में अनुपात बहुत कम है. एक बड़ा अच्छा आलेख था, मोर्गन स्टान्ली में एक महिला एक्जेक्युटिव के बारे में, मिला तो भेजता हूँ.
    ३. सानिया से बड़े दुखी हैं लोग... हमारे एक दोस्त एक लड़की को कुछ बोलने वाले थे. कल बोल रहे थे... यार इसका कोई है तो नहीं पर पता नहीं कहीं कोई पाकिस्तान में हो तो !

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  14. @ ओझा जी,
    ऐपल की प्रॉडक्ट लाइन आश्चर्यजनक रूप से अधूरी लगती है - मतलब स्पेशिफिकेसन के मामले में । कभी एक पोस्ट सीरीज लिखूँगा। सुन्दरता और आसानी - अधूरे होते हैं करीब करीब हमेशा। कुरूपता और कठिनाई के साथ यह विचारने का अवसर ही नहीं होता । :)

    आज रात फिर नींद टूट गई है। ipod को मैं अपने मोबाइल द्वारा ब्लूटूथ या यू एस बी के माध्यम से इंटरनेट से जोड़ना चाहता हूँ। शायद सम्भव नहीं है - क्लासिक अधूरापन :)
    ipad भारत में कब आ रहा है? शायद उसमें भी यह सुविधा नहीं है।... आप की असफलता (जरा याद कीजिए) ने मुझसे वह करवा दिया जो नहीं करना चाहिए। अब कभी कभी प्रयोग करता हूँ तो लोग आँखे फाड़े घूरते हैं - एक दिन बॉस ने देख लिया। बच्चों की तरह हँस रहा था :)
    उन्हें लगा कि मैंने अपने सिस्टम को ग्राफिकल इनहैंसमेंट दिया है।

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  15. @ सतीश जी और संजय जी,
    शुभेच्छाओं के लिए आभार। नहीं लिखता तो पता कैसे चलता कि आप लोग भी मुझे पढ़ते हैं :)
    संजय जी ने तो एक ही दिन मेरे कविता ब्लॉग पर टिप्पणियों का अम्बार लगा दिया। हिमांशु जी कभी कभी ऐसा कर देते हैं।.. सुखद आश्चर्य हुआ। ..वैसे पुनर्विचार में 'दुबारा' समाहित है इसलिए दुबारा में पुनरुक्ति दोष है ;)
    एक बार पुन: आभार।

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  16. आप तो गजबे असहज लगे ..असहजता में कित्ती बडी बडी गंभीर बात कह गए उ ...अब जाने कौन पढ पढ के असहज हो रहा होगा । अन्य मुद्दों का तो नहीं जानता , किंतु जहां तक सानिया मिर्जा की बात है तो उसके ऐसा कहने के पीछे एक वजह है वो शायद ये कि पाकिस्तान में भी कहां से कोई बयान आया है कि सानिया को विवाह के बाद पाकिस्तान के लिए खेलना चाहिए । हां भारतीय नागरिक जी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा उठा दिया है जिस पर विमर्श होना चाहिए । मगर मुझे लगता है कि किसी विदेशी नागरिक से विवाह करने से भारतीय नागरिकता के समाप्त होने का मतंव्य है कि जब तक उसे अपने पति के देश की नागरिकता न मिल जाए और इसलिए स्वत: समाप्त नहीं होती है ।

    और इस लिहाज़ से यदि तब तक सानिया को पाकिस्तानी नागरिकता नहीं मिलती तो वे खेल सकती हैं , अन्यथा नहीं , उन्हें दोबारा नागरिकता लेने के लिए भी ....आगे क्या कहूं अभी से

    अजय कुमार झा

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  17. एपल का खुद क्या कहना है बैटरी के बारे में यहाँ पढ़ें
    पाकिस्तान का एक और क्ष्द्म युद्ध ISI का हाथ है सानिया मामले में अब रॉ कुछ कर दिखाये जवाब में

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  18. धन्यवाद महेश जी, लेकिन लिंक खुल नहीं रही। कृपया फिर से भेजें।
    girijeshrao[@]gmail[.]com

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  19. 1. यह नितांत पुरुषवादी मानसिकता, अन्यथा आप ही के ऑफिस में कितने ही पुरुष हैं जो घड़ियों के गुलाम हैं. काम से परहेज वाले.
    2. पर्यावरण के प्रति (कागज, बिजली और पानी बचाने सबके प्रति ) असंवेदनशील हैं हम. और अखबार बंद कर देने जैसी बात कुतर्क भर हैं. कागज का प्रयोग बंद करने की नहीं दुरुपयोग रोकने की जरूरत है.
    3. कानूनन (भारत हो या पाकिस्तान) पति पत्नी अपने अपने देश के नागरिक रह सकते हैं. हाँ! यदि वे एक दूसरे के देश में रहना चाहें तो वीजा चाहिये.

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  20. @ पंकज जी,

    .. 'वाद' बड़े सुविधाजनक होते हैं - एक झटके में एक जुमला उछालो, एक वाक्य, एक साधारणीकरण और हो जाओ निश्चिंत। असुविधाजनक प्रश्नों की ओर से ओट मिल जाती है। जो मैं कह रहा हूँ वह औरों ने भी महसूसा है। कोई बात सिर्फ इसलिए हल्की नहीं हो जाती कि उससे उलट भी सच होते हैं । एक पक्ष रखना था न कि 'पुरुषवादी मानसिकता' का प्रदर्शन।
    .. बहुत सी नई बातें शुरू में कुतर्क लगती हैं लेकिन बाद में तर्क का हिस्सा हो जाती हैं। वैसे आप की बात दमदार है और स्मार्ट भैया की बात से जुड़ कर काफी वजनदार हो जाती है :)
    .. प्रश्न यह है कि दो साल बाद होने वाले आयोजन के लिए अभी से स्पष्टीकरण क्यों, वह भी बिना पूछे? दूसरा प्रश्न नागरिकता का है जिसके लिए ऐक्ट पढ़ना पड़ेगा। झा जी लगे हैं, बताएँगे।
    ?

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  21. जहां तक नागरिकता की बात है तो बेवजह हल्ला मचाया जा रहा है संविधान के अनुच्छेद पांच से ग्यारह जिसमें से अनु नौ इससे संदर्भित है और indian citizenship act 1955 के अनुसार भी , किसी महिला को भारतीय पुरूष से विवाह करने पर भारतीय नागरिकता मिल जाती है और ऐसे ही किसी महिला को किसी विदेशी पुरूष से विवाह करने पर उसकी नागरिकता समाप्त हो जाती है । मगर यहां जो बात सबसे महत्वपूर्ण है वो ये कि ऐस किसी भी सूरत में स्वत: नहीं होता है । सरकार को ये पूर्ण अधिकार है कि किसकी नागरिकता देनी है किसकी समाप्त करनी है वो तय करे , और ऐसा उसके लिए किए गए आवेदनों के आधार पर किया जाता है । तो यदि इस मौजूदा विवाद को देखें तो जब तक सानिया मिर्ज़ा पाकिस्तान की या दुबई की नागरिकता हासिल नहीं कर लेतीं तब तक उनकी भारतीय नागरिकता समाप्त नहीं होगी । अभी पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने अपने कुछ मित्र देशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों के लिए दोहरी नागरिकता की योजना शुरू की थी मगर उसमें पाकिस्तान नहीं आता । तो यदि सानिया कह रही हैं कि वो 2012 का ओलंपिक भारत की ओर से खेलना चाहती हैं तो उसके लिए उन्हें तब तक भारतीय नागरिकता ही धारण करनी होगी । इसके अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है
    अजय कुमार झा

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  22. Kuch perdiction
    1. Saniya ki shadi ek saal se pahle toot jayegi
    2.Shaadi ke baad uska Tenis career ek saal se jyada nahi chalega
    3. Iske baad saaniya ek Indian se shadi karegi

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  23. अमर उजाला अपने स्तर और अज्ञान के प्रति ईमानदार लगता है (पुन: पत्रकार मित्रों से क्षमा)।

    क्षमा मांग कर शर्मिंदा न करें ।
    खाकसार के भी इस पेपर के बारे में यही विचार हैं ।

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