मंगलवार, 10 अगस्त 2010

कुत्ते और उन्हें पालने वाले कुत्ते - एक इंसान की व्यथा

कुत्ता कटहा होता है और कुतिया कटही। सामान्यत: इन शब्दों का प्रयोग आदी हो चुके प्राणियों के लिए होता है लेकिन मैंने इन्हें सामान्य प्रवृत्ति के रूप में कहा है। इंसान कुत्ता पालता है। इस लिहाज से उसकी दो श्रेणियाँ बनती हैं - कुत्ता पालक और कुत्ता विहीन। बहुत पहले से ही इंसान की दो मोटी श्रेणियाँ बताई गई हैं - एक कुत्ता और दूसरी इंसान(तीसरी श्रेणी ब्लॉगर अभी निर्माण प्रक्रिया में है)। कुत्ता श्रेणी काटती है, दूसरों को कटवाती है और इंसान श्रेणी शिकार होने में यकीन रखती है। मेरी यह पोस्ट उन कुत्तों के ऊपर है जो कुत्ता पालते हैं। उन कुत्तों के ऊपर भी है जो पाले जाते हैं और उन अभागे इंसानों के ऊपर भी है जो कटते हैं, कटवाए जाते हैं। अब आप कहेंगे ये अचानक प्रेमपत्र लिखते लिखते कुत्ते कहाँ से आ गए? 
पश्चिम भारत में अपनी पोस्टिंग के दौरान मुझे एक कहावत से साक्षात्कार हुआ - किस्मत खराब हो तो ऊँट पर बैठे आदमी को भी कुत्ता काट लेता है। मैं ऊँट पर तो नहीं बैठा था लेकिन प्रेममयी हवाओं पर सवार था और मुझे कुतिया ने काट लिया । इंसान टाइप नहीं कुत्ती टाइप - वाकई वाली। 
काटने वाली हर चीज विघ्नकारी होती है। जाहिर है वह कुतिया भी थी । कल सोचा था कि प्रेमकहानी को विस्तार से लिखूँगा, लोग छुटंकी फुलझड़ियों से तंग आ गए हैं और कहने लगे हैं - बाज आओ ऐसी हरकतों से! लेकिन आदमी का सोचा हरदम होता तो दुनिया कभी की नरक बन गई होती। वाक्यों में प्रेम का नरक से इस तरह सट जाना कुतिया के कारण ही हुआ है - न काटती और न यह लेख लिखता। तो कल इस कारण प्रेमकहानी लिखना स्थगित हो गया और मैं एंटी रेबीज वैक्सिन, टिटबैक लगवाने में ही व्यस्त रहा।
हुआ यह कि अपने एक पड़ोसी के यहाँ गया था। उन्हों ने पॉमरेनियन कुतिया पाल रखी है - देखन को सुन्दर लगें, घाव करें गम्भीर वाली। नाम में 'पामर' ऐसे ही नहीं है (आ और ऑ को भूल जाइए)!  नए जमाने के छोकरे छोकरियाँ देखते ही कहेंगे - वो: हाउ क्यूट ! वह कुतिया बाहर उनके साथ हमेशा दिखती है। मुझे कई बार यह शंका भी होती रही है कि उसने उन्हें पाला है या उन्हों ने उसे पाला है! खैर, उसका मुझसे भी परिचय है - वही सो काल्ड दुलार दिखाने वाला। लिपटना, सूँघना, छू कर भाग जाना। मैं सावधान रहता हूँ। लिपटने, सूँघने और छू कर भागने की कोशिश करने वाले प्राणियों से मैं हमेशा सतर्क रहता हूँ। अब सतर्क रहने का अर्थ यह तो हरगिज नहीं होता कि आप काटे भी नहीं जाएँगे।
वह सज्जन घर पर नहीं थे। इसलिए तुरंत ही लौट चला। हादसा तब हुआ जब मैंने निकलते हुए एक ब्लॉगर महोदय को फोन लगाया। हमदोनों बातें कर रहे थे, भौंक नहीं रहे थे (उसके लिए ब्लॉग है ही) और उसी दरम्यान चोर की तरह पीछे से आकर उस कुतिया ने काट लिया। मुझे बहुत आश्चर्य हुआ और जैसा कि हर आश्चर्य के साथ अमूमन होता है, कुछ ही देर में तिरोहित भी हो गया। मैंने अनुमान लगाया कि कुतिया को मेरा इंसान से यूँ तीसरी श्रेणी ब्लॉगर में परिवर्तित होना समझ में नहीं आया और बाद में जाँच पड़ताल के लिहाज से उसने अपने दंतचिह्न मेरी देह पर छोड़ दिए। कुत्ता होता तो शायद सू सू कर के ही छोड़ देता। एक सीख मिली कि कभी श्वान नस्ल नहीं पालूँगा और दुर्भाग्य से अगर पालना पड़ गया तो कुत्ता पाल लूँगा लेकिन कुतिया हरगिज नहीं। 
मैंने उस सज्जन के दो जवान पठ्ठों से बताया कि काट लिया तो उन्हों ने कृपा पूर्वक देखते हुए कहा - अरे नहीं! ऐसे ही खेलती रहती है। पिंडली में पिरपिरी हो रही थी और वे दोनों मानने को भी नहीं तैयार! उनके पितामह से कहा तो उन्हों ने अगली बात पूरी तसल्ली से कही - वैक्सिनेटेड है, निश्चिंत रहिए। दिखाइए। दिखाने पर बोले खरोंच ही तो लगी है। मैं दाँत चियारते घर लौट आया। श्रीमती जी ने सुना तो आग बबूला। मामला ऑब्जेक्टिव से सब्जेक्टिव हो गया। वे सब इंसान थोड़े हैं ! क्या करने गए थे? घर के सारे बर्तनों में कुतिया खाती रहती है लेकिन कूड़े वाले को इसलिए नहीं रखते कि कूड़े की बाल्टी थमाते छू जाएगा। मैं हैरान ! अभी पिछले हफ्ते ही उस गली में हाथ जोड़ कर आया था कि कूड़ा सड़क पर न फेंका करें ! यह ऐंगल मुझे नहीं पता था। श्रीमती जी जारी रहीं - कामवालियाँ तक उनके यहाँ चाय नहीं पीतीं। कितनी बार ही वह कुतिया बच्चों को दौड़ा चुकी है, एक बकरी को काट चुकी है और ये सूअर उसे पट्टा पकड़ कर नहीं घुमाते ! 
मामला इंसान और कुत्तों से सूअर पर आ पहुँचा था। कुछ अधिक ही सब्जेक्टिव न हो जाय इसलिए मैंने रोका - अब ? 
जैसा कि हर प्राणप्यारी साली का फर्ज होता है, चाह होती है; इन्हों ने अपने डाक्टर जीजू को फोन लगाया । उधर से यह सलाह मिली कि कहने पर न जाइए, उन लोगों से कुतिया के वैक्सिनेशन का कार्ड माँगिए। फिर मुझे बताइए। अगर अपडेटेड है तो फर्स्ट एड और शायद एंटी बायटिक से ही काम बन जाएगा। मैं पुन: उनके घर पहुँचा। इस बार कार पर सवार था - क्या पता दुबारा न ... ! उनके बड़े सुपुत्र से कहा तो उन्हों ने थोड़ी सी आश्चर्यमिश्रित प्रशंसा दिखाई - अच्छा, वाकई काट लिया! मेरे मन में धमक उठी - कुत्ते!
मैंने कार्ड की बात की तो उनके प्रसन्न मुखमंडल पर दुविधा के बादल आए और चले गए। पापा नहीं हैं और उन्हें ही पता है । मैं चकित नहीं हुआ । 
पितामह बोले - आप निश्चिंत रहिए। यह उन्हों ने दो बार कहा। पिछली बार वाला मिला कर तीन बार हो गया। कोई बात बार बार कही जाय तो कई बार उसके गूढ़ार्थ विपरीत होते हैं। अब अमरेन्द्र जी ही बता पाएँगे कि इसे लक्षणा कहते हैं या व्यञ्जना? बड़े बेटे ने आकर बड़े प्रेम से कहा - ऐसा करिए, आप वैक्सिन लगवा ही लीजिए। कह कर पुन: कुर्सी पर बैठ तन्द्रा में लीन हो गया और मैं अपने अभियान पर चल पड़ा ... 
अब जब कि दोनो बाहों और एक पिंडली पर निशान हैं, यह लिख रहा हूँ। साथ ही सोच रहा हूँ कि प्रेमपत्र में इस बारे में लिखना ठीक होगा या नहीं ? आप लोग अपनी राय अवश्य दें। 
घरों में कुत्ते कुत्ते टाइप के इंसानों से सुरक्षा के लिए पाले जाते हैं । दुलार, प्यार, अँकवार आदि के अलावा यह भी एक अहम उद्देश्य होता है। लेकिन होता उलट है। कुत्तों से तो बचाव नहीं होता, इंसान टाइप के इंसान घर में आते घबराते हैं। बड़ा अजीब लगता है जब घर में पहुँचते ही इंसान से पहले कुत्ता लिपट कर, सूँघ कर और छू कर स्वागत करता है। जैसे जाँच पड़ताल कर रहा हो कि आया हुआ इंसान इंसान ही है, कुत्ता नहीं। अब चूँकि आया हुआ अधिकतर इंसान ही होता है, उसे बड़ी कोफ्त होती है। कोफ्त होती रहती है और दाँत निपोरते कहता रहता है - ये तो बड़ा अच्छा कुत्ता है ! सुन्दर है। कौन सी नस्ल का है? कुत्ता है या कुतिया? मन में भय भनभनाता रहता है । मारे डर के न तो भाभी जी के मेकअप पर ध्यान जाता है और न ही भाई साहब के रंगे बालों पर। ऐसे घरों के बच्चे तो वैसे ही कुत्तामय होते हैं। सोफे पर बैठता है तो फिर वही कुत्ता। ... ...
 अधिक लिखूँगा तो सुबह ही कुत्तामय हो जाएगी। इसलिए विराम देता हूँ। चलते चलते बता दूँ कि इस कांड के बारे में मैंने अरविन्द जी को रात ही में बताया। वैज्ञानिक चेतना सम्पन्न बड़े भैया ने मेरे पूर्वग्रहों पर शांत भाव से अपनी प्रतिस्थापनाएँ बताईं। कुत्तापालनशास्त्र संक्षिप्त रूप से समझाया। जो कुछ कहा उसका लब्बो लुआब यह है कि पालतू कुत्ते का व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कुत्ते ने पाला है या इंसान ने। यह बताना भी नहीं भूले कि उनके व्यवहार का लिंग, जाति, धर्म आदि से कोई सम्बन्ध नहीं होता। कुत्ते बस कुत्ते होते हैं। वे इंसान नहीं जो बीस तरह के खाँचों में भी न फिट हो पाएँ। मैंने यह सोचते हुए शुभरात्रि बोला कि कम से कम इस बात के लिए तो उन पर हमले नहीं होंगे। ब्लॉग जगत इतना भी कुत्ता नहीं है। 

41 टिप्‍पणियां:

  1. अरे क्या आप भी कुत्ते-कुतियों के चक्कर में पड़ गए. ऊंट पर भी कुत्ता काट लेता है ये तो ठीक है पर एक कहावत ये भी होती है कि कुत्ते भूंकते रहते हैं और हाथी चला जाता है. अरे चलिए गजराज की तरह. (वैसे भूंकने पर कहावत है काटने पर कोई हो याद नहीं !).
    वैसे आजकल भी चौदह सुई लेनी पड़ती है क्या? अब लेनी भी पड़ती हो तो क्या करियेगा ले लीजिए. वैसे थोडा जटिल सोल्यूशन है पर एक डंडा लेके चलिए और मारिये *** पे. किकियाते हुए भागेंगे/भागेंगी. :)
    कुत्ते बेचारे बदनाम हो रहे हैं इंसानों के चक्कर में. अरे प्रेम-पत्र छापिए. कहाँ प्रेम-पुराण बह रहा था और... !

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  2. पढकर तकलीफ हुई। काटने से ज़्यादा तकलीफ उन लोगों की उद्दंडता के बारे में जानकर हुई।

    पालतू कुत्ते का व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कुत्ते ने पाला है या इंसान ने।
    बडके भैया की बात एकदम्मै सही है। हिन्दुस्तान में मौसी के घर पले कुत्तों के अलावा देश भर के चूहे जैसे कुत्ते तक हमेशा मुझे काट खाने दौडते थे जबकि यहाँ बडे-बडे सिंह भी तलवे चाटते हैं। फर्क देखभाल का ज़रूर है। जैसे पश्चिम भारत की कहावत आपने सुनाई, वैसी कहावत हमारे क्षेत्र में कुछ निम्न प्रकार से है (कहावत से हमारी सहमति ज़रूरी नहीं है, न कहावत हमने बनाई है):

    ससुराल में जमाई कुत्ता
    ...
    ...
    ...
    कुत्ता पाले सो कुत्ता !

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  3. एक बात लिखना भूल गया। पहले जमाने में गाँव में जब किसी को कुत्ता काटता था तो उसे टोटके के तौर पर सात कुएँ झाँकने पड़ते थे।
    अब यहाँ सात कुएँ नहीं लेकिन सत्तर गड्ढे जरूर मिल जाएँगे - बीच सड़क। गड्ढों में झाँक ताक पहले ही बहुत कर चुका हूँ - कहीं यह दंड उसी पाप के कारण तो नहीं मिला?

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  4. लेकिन आदमी का सोचा हरदम होता तो दुनिया कभी की नरक बन गई होती।
    डायलॉग पसन्द आया!

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  5. कुत्ते बस कुत्ते होते हैं।


    बस, इतने से तसल्ली कर सोने जा रहे हैं कि कहीं रात कुत्तामय हो गई तो बड़ी तकलीफ से कटेगी, दिन तो चलो फिर भी कट सकता है.

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  6. ये तो ऐसे देश में अटक गये हैं कि गढ़्ढा भी खोजे न मिले. :)

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  7. पॉमेरियन से कटवाये तो क्या कटवाये। हमारे जर्मन शेफर्ड महोदय तो प्यार प्यार में बहुत खरोंच देते हैं।
    एक दिन हम उनसे पूछे कि काहे नहीं आदमी बन जाते आप। जबाब में खींसें निपोर दिये।

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  8. @ स्मार्ट भैया,
    अरे कहावत सुना कर आप मुझे पिटवा देंगे। कई ब्लॉगरों ने भी पाल रखे हैं। दिल पर न ले लें! फिर तो मेरा देशनिकाला ही हो जाएगा।

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  9. च च च ....दुःख है ...अपरंच कल रात कुत्ता शास्त्र पर बात हुयी उसके आगे का वैज्ञानिक विश्लेषण -
    यह सीजन है मौका है दस्तूर भी है ..उसकी टेरिटरी में आप गए ही क्यों ..
    वह तो प्रेम मगन मीरा सी दीवानी अपने हरि गुन में मगन थी
    आपने उसकी तन्मयता ही भग्न कर दी ,,
    और आप भी कम नहीं हैं याद है अभी कल ही की बात हो मानो हो
    किसी को और भी काठी कुतिया कहकर अपने चिढाया था ..
    बहुत दिनों से वह आपके संदिग्ध हाव भाव देख रही थी
    और इन दिनों तो वैसे भी अद्रीनलींन नामक हारमोन आपकी धमनियों में उस प्रेम
    पत्र ने बढ़ा दिया है -अपनी टेरिटरी में कैसे कोई इतनी बड़ी बेवफाई सहन कर सकता है और वह भी एक मादा
    कुतिया -इतने दिनों से ब्लॉग से भी कुछ सीखा होता तो उसे मौका न मिलता ...
    बहरहाल दवा दारू कीजिये ..और अब बेफिक्र हो जाईये वहां -कुतिये एक बार ही काटती हैं फिर दुसरे को काटने को चल देती हैं ..
    आप अब निसाखातिर हो जायं ....बहुत कुछ लिखने को मन है मगर आखिर कितना लिखूं ..है तो यह टिप्पणी ही
    मेरी डेजी आगंतुकों को अपना विजिटर समझती है -कुत्ती से हमलोगों को रस्क है ...

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  10. बन्धु,
    कहावत से हमारी सहमति ज़रूरी नहीं है, न कहावत हमने बनाई है। हमें तो पता भी नहीं कि कौन बनाता है यह गंदे-गंदे मुहावरे?

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  11. राव साहब आपको उस कुतिया ने तब कटा जब आप किसी ब्लॉगर से बात कर रहे थे.इसका मतलब है कि हो सकता हैं उसे पता चल गया था कि आप भी ब्लॉगर हैं. ध्यान दें कहीं उसका भी कोई ब्लॉग ना हो और टिप्पणियां ना आने कि वजह से बेचारी परेशान हो.

    और अनुराग शर्मा जी कि कहावत तो बड़ी पुरानी है.


    बचपन में जब भी मैं गली से कोई पिल्ला उठा लाता था तो मेरे पिताजी 'जो कुत्ता पाले वो कुत्ता' कह कर मेरे अरमानों पर पानी फेर देते थे अतः मैंने अपनी जिंदगी में सिर्फ पिल्लै पाले कोई कुत्ता पाल नहीं पाया......

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  12. ओह यहां तो श्वान चिंतन हो रहा है ...अरे हट ...

    कोई टिप्पणी नहीं लिखूंगा आज ! बेवज़ह मुझे भी काटा था एक बे'पली' नें वो भी मेरी ही दहलीज पर :(

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  13. Blogger jis teji se badh rahe hain to unhe aap kukkurmutta kah sakte hain. her baar kutiya aap ko soongh ker chor deti thi , is baar kaat khaya.Pata hai kyun? use kisi doosre padosi ki kytiya ki gandh aa rahi hogi. Ab mujhe chinta ho rahi hai ki kahin aap ke peeche kutte na pad jayen# kyun ki kutiyon ki gandh aap me kuch din to rahegi :)
    is post ko dekh aap ko tasalli hogi http://rajubindas.blogspot.com/2009/06/blog-post_15.html

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  14. ek baat mai bhi kahana bhool gaya --Girijesh Rao ko kutiya ne kaat khaya -- ye khabar hai..breaking news

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  15. मुझे आपसे पूरी हमदर्दी है ....वास्तव में आपको एक कुतिया और कई कुत्तों ने काटा...
    कहते हैं किसी भी कुत्ते का स्वाभाव वही होता है जो उसके मालिक का होता है.....जब उसके पालने वाले खाँटी स्वान योनी के हैं तो आपने और क्या उम्मीद की थी....
    ख़ैर आप अपना ध्यान रखियेगा...
    हमारी शुभकामना आपके साथ है...

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  16. इसे ही तो हमारे यहाँ कहते हैं "कुकुरगति"

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  17. सुना है कि जिसे कुत्ता काट ले तो वह आसमानी बिजली की कड़क और अँधियारे से बहुत डरता है...और फिर आपको तो कुतिया ने काटा है...ऐसे में प्रेमरस लेखन के लिए यह पॉजिटिव सिग्नल है:)

    संभवत: कुत्ता काटे का ही असर रहा होगा कि बिजली की कड़क और तेज बारीश को लेकर एक से एक महाकाव्य तक रच दिए गए हैं :)

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  18. कभी कभी आप लोगों ने महसूस किया होगा की किसी व्यक्तिती से पहली मुलाकात में ही उससे चिढ सी होती है तो कोई बहुत अच्छा लगने लगता है मैंने एक विज्ञानं पत्रिका में पढ़ा है की लोगों से एक किस्म की खुसबू आती है वह हमें पसंद होती है तो वो हमें अच्छा लगता है और नहीं होती है तो वो बुरा लगता है (अब आगे से किसी से मिलने पर कुत्तो की तरह उसे सूंघे नहीं वह अपने आप दिमाग में चली जाती है ) बचपन में हमारे घर में भी एक कुत्ता था उसे हमारे भाई बहन के टियुशन टीचर से बढ़ी चिढ थी यहाँ तक की जब हमारे भाई बहन उनसे पढ़ कर आते थे तो वो उनको देख कर भी गुर्राने लगता था जब तक की वो लोग कपडे बदल ना ले उसे उनके कपड़ो से उनकी गंध आती थी | अब आप पता लगा सकते है की आप को उसने क्यों काटा | और कुत्ते को और उसे पालने वाले को ऐसा मत कहिए जब कभी कोई पेट आप पालेंगे तो जान जायेंगे की कैसे वो आप के परिवार का सदस्य बन जाता है|

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  19. लेकिन आदमी का सोचा हरदम होता तो दुनिया कभी की नरक बन गई होती।
    ye to mujhe bhi pasand aaya

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  20. ये अचानक कुत्ता- कुतिया पुराण कैसे ....
    कहा ये जाता रहा ही कि कुत्ते /कुतिया पालने वाले बड़े कोमल ह्रदय के होते हैं ...मगर अनुभव ये बताता रहा है कि जानवरों से प्यार करने वाले इंसानों से ज्यादा नफरत करते रहे हैं (अपवाद भी हो सकते हैं )...इसलिए उनके पालतू भी ऐसे ही हों तो किम आश्चर्यम ....
    हमारी सासू माँ को भी ऐसे कि एक पामेरियन ने काट खाया था..रोज उसको रोटी डालती थी..घुमाने ले जाती थी..फिर भी..इंसानों की तरह ही कुछ जानवर भी आदत से मजबूर होते हैं...कितना ही भला सोचो उनका वो कब काटने की ठान ले कुछ कहा नहीं जा सकता ...

    पहले तो व्यंजना में पढ़ा इसे..आपने बताया कि सचुमच काट खायी है..घाव का फोटो लगाना था ना..पूरी सहानुभूति है आपसे..!

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  21. वह ब्लॉगर महोदय भी शायद कुतिया के काटे हुए हैं , जिसे शायद आप 'कटही कुकुरिया' कहते रहे हों ! एक शेर में ग़ालिब ने कहा है कि जिस तरह कुत्ते/कुतिया का काटा आदमी पानी में खुद को देखकर डरता है वैसे ही मैं शीशे में अपना ही चेहरा देखकर डरता हूँ क्योंकि मैं इंसान के द्वारा काटा गया हूँ ! कुछ अनुभवों के उपरान्त अब हम भी ब्लोगीय कटहे कुत्तों/कुतियाओं से दूरी बरतने लगे हैं ! शायद यही वक़्त और हमारी जरूरत भी है !



    अनुमान लगाया जा सकता है कि धर्मेन्द्र हिन्दी फिल्मों में क्यों इतनी बार बोल चुका है --- '' कुत्ते , तुम्हारा खून पी जाउंगा '' ! कुत्ता प्रेमी स्त्री/पुरुषों को धरमेंदर की फिल्मों से कुत्तों की मानहानि के एवज में धरमेंदर पर जबरदस्त मुकदमा ठोंकना चाहिए और फिल्मों से यह डायलाग हटवाने की कवायद जोरों पर छेड़ देनी चाहिए !



    पितामह की बात में लक्षणा है ! ( कम से कम जो लक्ष्यार्थ आप लेकर चले हैं तदनुसार ) यहाँ तो मुख्यार्थ का मतलब ही नहीं रह गया है !



    चित्र में इतना धवल कुत्ता है कि आपके चित्र संबंधी कुत्तीय-चयन पर संदेह हो रहा है ! अरे कोई कुक्कुट-गलस्तन-युक्त लहलह/टहटह पामेरियन का फोटो सांट देना था ताकि उससे कुत्तीय इंसानी खुर्र्राहट का भी परिचय मिलता !

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  22. जिसके ऐसे ऐसे दोस्त हों उसे दुश्मनों की क्या जरूरत ?
    गणितज्ञ महोदय को इंजेक्शन की संख्या की पड़ी है - भाया 6(=5+1) इंजेक्शन लगेंगे बाहु में। 14 नहीं। खुशी होती क्या जो पेट में 14 घोंपवाने पड़ते ! प्रेमपत्र की फरमाइश है तो दोस्त करता हूँ पूरी। फर्ज तो निभाना ही है। एक बार हाल चाल तो पूछ लो!
    स्मार्ट भैया को बस तकलीफ होकर रह गई। अरे, दो चार लीटर आँसू बहाने थे।
    उस डॉयलाग को किसी हॉलिवुड फिलम में लगवाय दो न !
    समीर जी को अपने सपनों के सेहत की पड़ी है, मेरे लिए उफ तक नहीं बोले।
    प्रवीण पांडेय जी जर्मन गड़ेरिए से कटवाने की सोच रहे हैं। देखो तो कैसे सोच सोच मुस्कुरा रहे हैं।
    अरविन्द जी तो रात का सारा इम्प्रेशन ही खराब कर दिए!अब ये जुगलबन्धी की शिक्षा हम थोड़े माँग रहे हैं। वैसे फोन से हालचाल पूछे हैं सो शुक्रिया।
    विचारशून्य जी को कुतिया के ब्लॉग पर टिप्पणियों की पड़ी है। चुल्हे में जाय ऐसी शून्यता!
    अली जी कटवाए थे, ठीक हो गए हैं लेकिन हाल चाल पूछना तो दूर, यूँ ही कट लिए।
    राजीव ओझा जी के कल्पना चक्षु ही खुल गए! अब हमें कुत्तों से कटवाने की सोच रहे हैं। और तो और रिपोर्टिंग का नमूना देखिए -Girijesh Rao ko kutiya ne kaat khaya -- ye khabar hai..breaking news
    अदा जी तो सहानुभूति ऐसे जता गईं जैसे किसी कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन कर रही हों।
    सुब्रमनियम जी को कुकुर गति याद आ गई! हे भगवान, सँभालो अपने आस्तिकों को।

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  23. बिजली की कड़क और अँधियारा! पॉजिटिव सिगनल? अगली पोस्ट लिखो तो बताता हूँ कि मौज क्या होती है पंचम दा!
    अंशुमाला जी पहली दफा आई हैं। बख्श देते हैं। गन्धविद्या की जानकार लगती हैं। उन्हों ने कुत्तों का पक्ष तो बहुत अच्छे से रखा लेकिन आदमी को भूल गईं! कितनी अन्धेरगर्दी है!
    वाणी जी को सुबूत चाहिए था, देख लीं तभी मानीं। हम पर से लोगों का भरोसा इतना उठ गया है, ये नहीं पता था। शुक्रिया।
    आचारज जी, ढेर सारा विश्लेषण तो कर ले गए लेकिन हाल चाल तक न पूछे! राज खोल दूँ क्या?

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  24. कुत्ता चिंतन:

    मनुष्यतंत्र - कुत्ते मनुष्य के काबू में रहते हैं। वह उन्हें पट्टे पहना कर घुमाता, सू सू वगैरह कराता है।

    कुत्ता तंत्र - मनुष्य कुत्तों के काबू में रहते हैं। कुत्ते मनुष्य को घरों के अन्दर रहने को बाध्य कर देते हैं।

    क्रांति तंत्र - मनुष्य को इस अपराध के लिए फाँसी दे दी जाती है कि उसे कुत्ते ने काट लिया।

    आप किस तंत्र में रह रहे हैं?

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  25. हमें उम्मीद है की आप अच्छे ही होंगे | अब हाँथ इतना दुरुस्त चल रहा है तो गोड़ भी दुरुस्त ही होगा | मारे सबकी बखिया उधेड़ के रख दिए , कुत्ता ने काटा तो टिपैयों की क्या गलती ! इसे कहते हैं 'सास कै रिस कठौती पै' | आप शीघ्र स्वस्थ हों , बाऊ !

    और हाँ , मैं तो तंत्र-निरपेक्ष !

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  26. गिरिजेश सर,
    कन्फ़्यूज़ हो गया हूँ कि आपके दुख में दुखी हुआ जाये या अपनी यूनियन में एक सदस्य और बढ़ने पर बधाई दी जाये।
    हमें तो राहचलते ने काटा था, आपको पालिता कुतिया ने काटा है, ऐहतियात बरत ही लीजियेगा।

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  27. क्या आप "हमारीवाणी" के सदस्य हैं? हिंदी ब्लॉग संकलक "हमारीवाणी" में अपना ब्लॉग जोड़ने के लिए के सदस्य बनें.

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  28. हा हा हा आपको का लगा था कि लंठई इहां भी चलेगी ......भुगतिए ....केतना आलसी हैं जी ..कुतिया काट गई आपको .....हमको तो लग रहा है कि ,आप दुनु संगी जरूरे इ ऋतु में बेचारी प्राणी सब का कुछ हर लिए होंगे तभिए तो पंचम जी को बिच्छु काट लिया और आपको कुकुरिया । इंजेक्शन .....लिखते हुए....ई पोस्ट को और दोस्त सबका टिप्पणी पढिएगा ....तो कुहनी ने लेकर .....तड, तक कहीं भी लगे ठुंके ...फ़ीलींग एकदम सेम टू सेम होगा ....उ पितामह को काहे नहीं कहे कि कुकुरिया का सर्टिफ़िकेट मेल कर दे बाद में ......करता तो पोस्टवा में काम आता न . .........हा हा हा

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  29. अरे जब कुतिये ने ही काटा है तो अब 'हाल' भी पूछने लायक रह गया होगा क्या? :)

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  30. @ गिरिजेश राव,
    मनोरंजक पोस्ट और मनोरंजक ( तकलीफ देह )वाकया, आपको और जूली( पामेरियन कुतिया ) को लेकर एक हास्य पोस्ट लिखने का मन है आप बुरा तो नहीं मानेंगे कृपया अनुमति दें !
    सादर

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  31. अरे ये तो बड़ा गड़बड़ हुआ। आशा है कि अब आराम होगा।

    इस व्यथाकथा को बड़े शहीदाना गौरव से लिखा। बधाई!

    जल्दी ठीक हो जाने के लिये शुभकामनायें।

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  32. अलार्म डॉग भी काटने लगे हैं,ये जानकार अचंभित हूँ। पर काटे चाटे स्वान के.........., कुत्तों से बच कर रहिए, नया जमाना है कोई भरोसे के काबिल नहीं है।


    ब्लॉग4वार्ता की 150वीं पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  33. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  34. गिरिजेश ,

    अँधियारी रात, बादल, कड़कती बिजली, पानी...इन सब को देखकर मैं पॉजिटिव सिग्नल की बात जो कह गया हूँ सोचो कि वह कितना यूनिक सिचूएशन है किसी फिल्म के लिए....

    अँधेरी रात.... आसमान में रह रह कर बिजली कौंध रही है......बारीश भी जमकर हो रही है....ऐसे में ही एक लड़की की कार सड़क पर खराब हो गई है....लड़की डर रही है....कार के बोनट को खोल लड़की कुछ समझ नहीं पा रही है.....क्या करे कहाँ जाय.... कैमरा उसके चेहरे पर फोकस है.... लड़की के चेहरे पर डर का भाव है.....बिजली की कड़क जारी....औऱ तभी सामने से एक बाइक सवार आता है.....बिल्कुल तुम्हारी उस मैथमेटिकल प्रेम कहानी के पढ़ाकू नायक की तरह चश्मा लगाए हुए....आते ही लड़की के पास गाड़ी खड़ी करता है....सिर से गाँधी टोपी उतारता है( हेलमेट की बजाय टोपी....अलग भाव उत्पन्न करेगी) .........और लडकी से पूछता है....क्या हुआ ?

    अब लड़की के चोहरे पर कैमरा फोकस होगा.....कुछ परेशानी के भाव लिए लड़की कहेगी कि मेरी गाड़ी खराब हो गई है....लड़का अपनी बाइक से उतर कर कार के पास जाएगा....लड़की के बगल में स्टाईल मार कर खड़ा होगा और बोनट पर झुकने वाला ही होगा कि आसमानी बिजली जोर से कड़केगी....तड़ाक और लड़का फट् से लड़की से चिपक जाएगा.... डर के मारे........और दोस्त....यहीं है अपनी फिल्म का वह यूनिक सीन कि लड़की उसे दूर करते हुए कहेगी....यू रासकल....क्या कर रहे हो।

    तब लड़का डरते डरते कहेगा - मुझे कुतिया ने काटा है....अँधेरे....कड़कती बिजली से मुझे बहुत डर लगता है....और यह कह कर लड़का उस लडकी से और भी चिपक जाएगा...लडकी भी सोचेगी कि चलो किसी कुतिया के काटने के बहाने ही सही....पुरूष कम से कम नारीवाद के करीब तो पहूँचा......अन्यथा तो अब तक पुरूष हमेशा निडर और मर्द टाइप ही चित्रित किया गया है.....और वह लड़की पुरूष के इस डर और छिनरपन पर एक पोस्ट लिखेगी.....जिसका टाईटल होगा-

    'पुरूष नारीवाद' के नए आयाम

    फिल्म हिट हो जाएगी दोस्त :)

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  37. ये गूगल कमेंट देने मे इतनी परेशानी क्यों कर रहा है दोस्त....एक ही कमेंट चार चार बार.....क्या इसको भी एकता कपूर का रोग हो गया है....एक ही शॉट को चार चार बार एक के बाद एक तेज आवाज के साथ दिखाने का :)

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  38. .. हा..हा..हा..सुई तो लगाना ही पड़ेगा, मन चाहे डा0 दराल से पूछ लें.

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  39. @ मो सम कौन !
    आज कल राह चलती और पालिता में कोई फर्क नहीं बन्धु! :) इंजेक्शन लगवा रहा हूँ।

    @ सतीश पंचम
    कहीं यह वाकया आप के साथ वाकई तो नहीं घटा? आइडिया बनफाट है, किसी खनवे को बेंच दीजिए। जेब खनखन कर देगा :)

    @ झा जी
    हम सिर खुजला रहे हैं :)

    @ अनूप शुक्ल
    कुत्ता काटने पर बधाई के साथ शुभकामनाएँ आप ही दे सकते हैं :) धन्यवाद।

    @ ललित जी
    पहले इंसानों से बच कर रहते थे । अब कुत्तों से भी बच कर रहेंगे। साले बुरी संगत में बिगड़ गए हैं।

    @ बेचैन आत्मा
    भगवान करे कि आप को कुत्ता काटे और आप की आत्मा को तभी चैन आए जब छ: ठो सुइयाँ लगें।
    मजाक कर रहा था :) आप सुखी, खुशी सानन्द रहें। आप को सुन्दर सौगातें मिलें।

    PS: कुत्ता पालकों से अनुरोध है कि श्वान नस्ल की काम वासना का समय है। अगर अभी तक न करवाए हों तो इंसानों के हित में उन्हें युगनद्ध करवाने की कृपा करें।

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  40. कुतिया को इंसान से यूँ तीसरी श्रेणी ब्लॉगर में परिवर्तित होना समझ में नहीं आया और बाद में जाँच पड़ताल के लिहाज से उसने अपने दंतचिह्न देह पर छोड़ दिए। कुत्ता होता तो शायद सू सू कर के ही छोड़ देता।

    मुद्दा तो विचारणीय है :-)

    बी एस पाबला

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  41. @PS: कुत्ता पालकों से अनुरोध है कि श्वान नस्ल की काम वासना का समय है। अगर अभी तक न करवाए हों तो इंसानों के हित में उन्हें युगनद्ध करवाने की कृपा करें।
    -------------
    बहुत मार्मिक अपील की है जी आपने। बहुत आसीसेंगे आपको श्वान जाति के झंडाबरदार।


    और गुरू जी, हमें राहचलते ने काटा था, आपको तो आजकल ता भी ती दिख रही हैं। ऐसा जुल्म काहे करते हो जी? हमें काटे जाने का इतना गम नहीं हुआ था जितना इस बात का कि राह्चलती ने नहीं काटा।

    शुभकामनायें, गणितीय प्रेमकथा के चक्कर में इंजेक्शन का गणित मत भूल जाईयेगा।

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