रविवार, 15 अगस्त 2010

गंगा सलाम तुझ पर जमना सलाम तुझ पर

प्रेमपत्र जारी है। 
प्रात:काल है और इस महान पुरातन देश के जीवन में आए एक महत्त्वपूर्ण दिन की वर्षगाँठ का उत्सव चल रहा है। दिन भर चलेगा। उठा हूँ और पाया हूँ कि घाव हरे हो गए हैं। उदासी के साथ अपनी पुरानी डायरी पलटते हुए इस रचना से दीदार हुआ। पाकिस्तानी कवि रईस अमरोहवी कितनी सान्द्रता से भारत भू को याद करते हैं! सम्भवत: अमरोहा से माइग्रेट किए होंगे।
तब से गंगा यमुना में बहुत पानी बह चुका है। लेकिन कुछ ऐसा है इन पंक्तियों में, जो थम कर सोचने को बाध्य करता है। आस की लीक दिखाता है। आज कल तो मैं भूत में ही जी रहा हूँ, आज के दिन यही सही। (उर्दू दाँ लोग त्रुटियों को बताने की कृपा करेंगे। यह कविता 'कादम्बिनी' से बहुत पहले उतारी गई थी।)

अये खित्तये जमीलो रऊना, सलाम तुझ पर
गम गुश्ता रौनकों की दुनिया, सलाम तुझ पर।
अये वादिये हिमालय, सदहा सलाम तुझ पर
गंगा सलाम तुझ पर, जमना सलाम तुझ पर।
जज्बाते खास ले जा, अहसासे आम ले जा
ओ हिन्द जाने वाले, मेरा सलाम ले जा।
हिन्द की बहारों, तुमको सलाम पहुँचे 
बिछड़े हुए नजारों, तुमको सलाम पहुँचे 
भारत के चाँद तारों, तुमको सलाम पहुँचे।
ये नामचे मोहब्बत यारों के नाम ले जा
ओ हिन्द जाने वाले मेरा सलाम ले जा। 

इन पंक्तियों को उतारते किसी की एक पंक्ति याद आई है - अंत में बच जाएगा प्रेम ही।
उगते हुए सूरज को मैंने हाथ जोड़ नमन किया है।
बहती हुई हवा से कहा है - आज के दिन सिन्धु तक सन्देश पहुँचा आओ।
"किसी ने तुम्हें सलाम भेजा है।"
तुम्हारी सरजमीं की पाक क़ामयाबी और तरक्की के लिए जाने किससे दुआ माँगी है।
फलो फूलो। तुम्हारी तरक्की में गंगा यमुना की भी तरक्की है।
गंगा यमुना की तरक्की में  तुम्हारी भी तरक्की है।
जाने मज़हबी उन्माद में भूले तुम्हारे बाशिन्दे इसे कब समझेंगे?

17 टिप्‍पणियां:


  1. गंगा जमुनी तहजीब हमारी अपनी थाती है
    उर्दु और देवनागरी दोनो ही मुझको भाती है

    सांस का हर सुमन है वतन के लिए
    जिन्दगी एक हवन है वतन के लिए
    कह गई फ़ांसियों में फ़ंसी गरदने
    ये हमारा नमन है वतन के लिए

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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  2. क्या बात है....आपने मौजूं वक़्त पर रईस साहब को याद किया है.

    अंग्रेजों से प्राप्त मुक्ति-पर्व ..मुबारक हो!

    समय हो तो एक नज़र यहाँ भी:

    आज शहीदों ने तुमको अहले वतन ललकारा : अज़ीमउल्लाह ख़ान जिन्होंने पहला झंडा गीत लिखा http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html

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  3. अये खित्तये जमीलो रऊना, सलाम तुझ पर
    गम गुश्ता रौनकों की दुनिया, सलाम तुझ पर ।
    अये वादिये हिमालय, सदहा सलाम तुझ पर
    गंगा सलाम तुझ पर, जमना सलाम तुझ पर ।
    जज्बाते खास ले जा, अहसासे आम ले जा
    ओ हिन्द जाने वाले, मेरा सलाम ले जा ।
    हिन्द की बहारों, तुमको सलाम पहुँचे
    बिछड़े हुए नजारों, तुमको सलाम पहुँचे
    भारत के चाँद तारों, तुमको सलाम पहुँचे ।
    ये नामचे मोहब्बत यारों के नाम ले जा
    ओ हिन्द जाने वाले मेरा सलाम ले जा।

    पहले जब लोगों को कहते सुनता था कि कविता पढ्कर आंख नम हो गयी तो विश्वास नहीं होता था। आज लगा शायद परदेस में रहकर ऐसा होता है। धन्यवाद और शुभकामनायें!

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  4. उर्दू भाषा है। देवनागरी लिपि है जिसमें संस्कृत, हिन्दी, नेपाली, मराठी आदि भाषाएँ लिखी जाती हैं।
    उर्दू फारसी लिपि में लिखी जाती है। लिपि किसी भाषा के समकक्ष नहीं रखी जानी चाहिए।

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  5. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

    सादर

    समीर लाल

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  6. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

    सादर

    समीर लाल

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  7. हिंद जाने वाले मेरा सलाम ले जा ...
    यही समझ आया ...समझना भी तो यही था ...
    जितनी भी है , आजादी मुबारक ...!

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  8. स्‍वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई।

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  9. पढते हुए आंसू का एक कतरा कोर पर अटक गया है ! उन्हें अपना वतन छोड़ कर जाना ही क्यों था वहां भेडियों की बस्ती में ?

    आपको शुभकामनायें !

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  10. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार का हार्दिक अभिनन्दन एवं शुभकामनाएँ.

    excellent post

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  11. बहुत अच्छी पोस्ट ..


    स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

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  12. बहुत बढिया प्रस्तुति।

    स्‍वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई।

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  13. जय हिंद

    http://rimjhim2010.blogspot.com/2010/08/blog-post_15.html

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  14. एकता के भाव पिरो लाती सुन्दर पंक्तियाँ।

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  15. गंगा-जमुनी संस्कृति को परवान चढ़ाती यह पोस्ट सचमुच पलकों की कोरों को को नम करने के लिए काफी है.
    अये वादिये हिमालय, सदहा सलाम तुझ पर
    गंगा सलाम तुझ पर, जमना सलाम तुझ पर।
    जज्बाते खास ले जा, अहसासे आम ले जा
    ओ हिन्द जाने वाले, मेरा सलाम ले जा।
    ..कितनी पाक दुआएँ हैं! आपने इन्हें प्रकाशित करने का समय भी खूब चुना.

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  16. यह भी तो उदात्त प्रेम का एक पहलू है -वतन का प्रेम!
    जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ...

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  17. छू लेने आली पंक्तियाँ हैं. कवि का संक्षिप्त परिचय और सुखद है.

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