रविवार, 19 सितंबर 2010

चुपचाप सो जाओ।

"सुनो जी! मेरे पाँवों में बहुत दर्द है।"
"लेट जाओ, पाँव दबा देता हूँ।"
"धत्त! लोग क्या कहेंगे?"
"लोग? कहाँ? बताएगा कौन? तुम भी न!"
"छोड़ो ठिठोली। वह दवा दे दो। तुमसे पैर दबवा कर नरक में नहीं जाना।"
"नरक? इतने दिनों से मेरे साथ रहते हुए भी मानती हो?"
"नहीं...
हाँ...वह दवा दे दो। और चुपचाप सो जाओ।"

23 टिप्‍पणियां:

  1. "धत्त! लोग क्या कहेंगे?" यही तो बड़ा चक्कर है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. "नरक? इतने दिनों से मेरे साथ रहते हुए भी मानती हो?"
    डायलाग संशोधन -
    "इतने दिनों मेरे साथ रहने के बाद भी और किस नरक की बात कर रही हो ? "

    उत्तर देंहटाएं
  3. नमस्कार,
    जन्मदिन की शुभकामनायें हम तक प्रेम, स्नेह में लिपट पर पहुँचीं.
    मित्रों की शुभकामनायें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देतीं हैं.
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  4. @ "इतने दिनों मेरे साथ रहने के बाद भी और किस नरक की बात कर रही हो ? " :)

    यहाँ भावभूमि अलग है। शब्द और वाक्य जब वृहद कालखण्ड और अनुभूतियों को समेटे होते हैं तो साधारण होते हुए भी अर्थ के मामले में परतदार हो जाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  5. @ "नरक? इतने दिनों से मेरे साथ रहते हुए भी मानती हो?"
    साथ रहकर अगर स्वर्ग का अहसास हुआ हो तो इन बातों को माना ही जायेगा।
    क्या इस तरह की बातें वाकई पिछड़ेपन की निशानी हैं?
    सधे शब्दों की जादूगरी।

    उत्तर देंहटाएं
  6. क्या दोस्त....एकदम राप्चिक ठेलेला है भिड़ू :)

    चंद शब्दों में ही बहुत कुछ कह दिया है।

    उत्तर देंहटाएं
  7. सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग का सुन्दर चित्रण.....

    उत्तर देंहटाएं
  8. इतने वर्षों तक मेरे साथ रहने के बाद भी नरक का भय ...:):)

    उत्तर देंहटाएं
  9. साक़ी शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर
    या वो जगह बता जहाँ पर खुदा न हो॥
    [शायर याद नहीं]

    उत्तर देंहटाएं
  10. प्रेम पत्र का एपिसोड २७ और आज की पोस्ट पर आई टिप्पणियां गिनी !
    लगता है मित्र चाहते है 'जो चला गया उसे भूल जा'
    या फिर 'सबका मालिक एक' :)

    उत्तर देंहटाएं
  11. प्रेम पत्र पढ़कर तो दिल में दर्द होना था! कहीं आराम करने और लम्बी सांस लेने के लिए तो नहीं कहा गया..पांव में दर्द है! देखिए, सही मर्ज की सही दवा दीजिएगा।

    उत्तर देंहटाएं
  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  13. लोगों का क्या है ....लोगों का काम है कहना !! ..............बीत ना जाए .... :-)


    प्राइमरी का मास्टर

    उत्तर देंहटाएं
  14. इतने दिन में तो दर्द ही दवा हो जाता है. नहीं हुआ तो अभी कुछ शेष है.

    उत्तर देंहटाएं
  15. पढ़िए जी, बात को साफ़ साफ़ कहने कि आदत नहीं हैं इसलिए स्पष्ट कहूँगा .

    अपनी बुद्धि मोटी है , बारीक़ बात दिमाग में घुसती ही नहीं.

    क्या कहा गया समझ नहीं आया अतः लेख बेहतरीन है.......

    उत्तर देंहटाएं
  16. स्त्री मन के इन भावों को संस्कार/आदर/सम्मान/हिचक/झेंप कुछ भी नाम दे सकते हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  17. स्त्री बुद्धिमान थी पैर दबवा लेती नरक मे जाती जो भोग रही हैं उसको दुबारा भोगने की चाह नहीं थी , उस साथ से इह लोक मे ही भर पायी परलोक मे !!!!!1

    उत्तर देंहटाएं
  18. पत्‍नी सचमुच बहुत बुद्धिमान है। पति को आहत किए बिना पिंड छुड़ाना जानती है :)

    उत्तर देंहटाएं
  19. "धत्त! लोग क्या कहेंगे?"

    aapas ki baton me log kya kahenge....
    aur kahna bhi nahi chahiye.....

    pranam

    उत्तर देंहटाएं
  20. देखिए न! बात की बात में लोगों ने क्या-क्या कह दिया। :)

    उत्तर देंहटाएं

कृपया विषय से सम्बन्धित टिप्पणी करें और सभ्याचरण बनाये रखें।
साइट प्रचार के उद्देश्य से की गयी या व्यापार सम्बन्धित सामग्री वाली टिप्पणियाँ स्वत: स्पैम में चली जाती हैं, जिनका उद्धार सम्भव नहीं क्यों कि उनसे दूसरी समस्यायें भी जन्म लेती हैं। अग्रिम धन्यवाद।