गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

रहरपुर चिट्ठाकार संघटन या रहरपुर ब्लॉगर असोसिएशन

पहले ही बता दूँ कि रहरपुर टहलगंज का एक मुहल्ला है (और दस्तूर के मुताबिक गंज ब्लॉगर असोसिएशन आलरेडी बना हुआ है लेकिन वह निष्क्रिय है)।
 अपने अजीज मित्र रवायत खान के शब्दों में कहूँ तो रहरपुर टहलगंज की सबसे पॉश कॉलोनी है। अपनी अपनी किस्मत है! मुझे तो पॉश कहना ही नहीं आता, बस लिख सकता हूँ। 
आज 'पलटदास नवावतार प्रवर्तक' से बातचीत के दौरान यह आइडिया मन में आया। ज्ञानियों से मित्रता रखने के कई लाभ हैं, उनमें एक यह भी है कि मन में आइडिये बहुत आते हैं। 
तो भाई लोगों और परम सम्माननीया भाभियों! (भाई के साथ संगति बैठाने के लिए ही कहा, कोई अन्यथा, वृथा अर्थ न लें/लगाएँ और न किसी को लेने/लगाने दें)
  'रहरपुर चिट्ठाकार संघटन या रहरपुर ब्लॉगर असोसिएशन' का गठन किया जा चुका है।

रजिस्टर्ड ऑफिस का पता: 
(ऑफिस की गुमटी 'पलटदास प्रवर्तक बाबा' के सौजन्य से)
रहरपुर, 
अरमान टीला 
(संकठा पान वाले के बगल में)
टहलगंज, पिनकोड (अभी डाकतार विभाग की सेवा यहाँ नहीं है।)

चूँकि यह पोस्ट मैं लिख रहा हूँ इसलिए प्रेसीडेंट या अध्यक्ष का पद मैं स्वीकार करता हूँ। मुझे चुनने के लिए आप लोगों को बहुत बहुत धन्यवाद। ईश्वर आप लोगों की प्यार से तड़पती आत्माओं को शांति बख्शें।  
रहरपुर के एकमात्र दूसरे ब्लॉगर जिन्हें मैं जानता हूँ, वह हैं - और कोई नहीं बल्कि रवायत खान। इसलिए उपाध्यक्ष पद उन्हें। उन्हें चुनने की आवश्यकता नहीं। खान लोग चुनाई में नहीं छिनाई में यकीन रखते हैं, सो आप चुनें या न चुनें रवायत भाई उपाध्यक्ष हो ही जायेंगे (मेरे दोस्त हैं नहीं तो अध्यक्ष पद भी या ही .... समझ गए न?)  
बाकी पदाधिकारियों और मेम्बरानों  की तलाश जारी है। जैसे जैसे मिलते जाएँगे, यहाँ नाम चढ़ता जाएगा।

इस संघटन (या संगठन?... मेरी बला से!) के उद्देश्य:
(1) संसार के सभी एग्रीगेटरों और जिस किसी चीज में भी ए,ग,ट,र आते हों, वहाँ रजिस्टर होना, भले स्तर कुछ भी हो। गटर भी चलेगा। 
(2) उद्देश्यपरक और विषयनिष्ठ ब्लॉगरी करना ( इन दो शब्दों के अर्थ अभी तक मिल नहीं पाए हैं, की फरक? चलँगा) 
(3) ऊपर के दो कम पड़ रहे हैं क्या जो इसकी नौबत आ गई? 

अरे एक भी नहीं रहता तो भी चलता। बिना उद्देश्य के इतना बड़ा देश चल रहा है, असोसिएशन तो दौड़ेगा। 

अगली गतिविधि: 
सन् 2011 के प्रारम्भ की शुभ बेला में संघटन के नाम की पुष्टि। तब तक शायद कुछ मेम्बरान भी आ जाएँगे। 
वैसे रहरपुर में प्रॉपर्टी के भाव बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर आप को असोसिएशन का मेम्बर बनना है तो जल्दी से एकाध फ्लैट ले लीजिए। रवायत भाई इसी धन्धे में हैं। आप को चवन्नी बटा सैकड़ा परसेंट की छूट भी मिल जाएगी। 

क्या कहा? ब्लॉगरी नहीं आती? नहीं करते? की गल जी - हम हैं न। दसियों ब्लॉग अपने नाम बिन खर्चा पानी बैनामा हैं , कोई भी दे देंगे। लिखना ज़रूरी थोड़े है! 

जय फलाने! जय चिलाने!! 
सुभाषित:  अपने धर्म के प्रसार के लिए दूसरे के धर्म की ऐसी तैसी करनी जरूरी है।
 इति ही ही फी फी। पांघव काल की बातें बाद में ... 
(पुरुषवादी ब्लॉगर समाज में किशोरावस्था को पांघव काल कहा जाता है। 'पांघि' होठों के ऊपर उगती रेख को कहते हैं। पांघव उसी से बना है।) 

29 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे भी कोई पद दे दीजिये, प्लीज़ प्लीज़, मैं बड़ी ईमानदारी बेईमानी करूँगा | देश को गाली बकना भी हमारी प्राथमिकता में होना चाहिए |

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  2. क्‍या कहा, कुमारी अन्यथा और सुश्री वृथा को अर्थ ना दें, तो ट्रेजरार कउन है भाई ??

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  3. रहरपुर पॉश कॉलोनी में प्लाट का बज़ट तो न है,महाराज। कोई सम्मान जैसे 'सर्वाधिक गतिमान पलटदास' आदि का जुगाड हो जाता तो भयो भयो प्रभु।

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  4. गिरजेश जी आनंद दायक पोस्ट
    इधर पांच छै पद भेजिये जी

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  5. माननीय अध्यक्ष महोदय,

    आपको बधाई देने के बाद सर्वप्रथम मैं आप के 'संघटन' की सदस्यता के लिए आवेदन करना चाहूंगा. कृपया निम्नलिखित बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए मेरी सदस्यता पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए:

    योग्यताएं और क्षमताएं:

    १. जुगाड़ तकनीक में महारत
    २. बिना बात के बात बढ़ाने में माहिर
    ३. बिना काम के काम करने और कराने में दक्ष
    ४. हाँथ पर हाँथ धरे बैठने का विशेष हुनर
    ५. घोटाला करने की और क्षेत्रवाद और क्षेत्रीयता फैलाने का विशेष प्रशिक्षण
    ६. भाई-भतीजावाद में डी.लिट. की मानद उपाधि
    ७. घेराव करने और काम नहीं चलने देने में पीएच डी

    चारित्रिक विशेषताएं:

    १. पेट इतना गहरा कि करोड़ों - अरबों का माल हजम और डकार तक ना आये
    २. स्वाद की कोई परवाह नहीं- हम पशुओं के चारे से ले कर गरीबों के निवाले तक चटकारे ले-ले कर खाते पचाते आयें हैं.
    ३. इमानदार और इमानदारी मेरे लिए हराम हैं, मैं इनकों छूत का रोग मानता हूँ.
    ४. ना कोई काम करना ना करने देना मेरे जीवन का मुख्य ध्येय है.
    ५. बी सी करना अपना प्रिय शगल है

    और अंततः लेकिन अंतिम नहीं:
    ६. जब कोई चरित्र होगा तब ना चारित्रिक विशेषताओं पर नज़र जायेगी...
    बस यही कहते हुए कि हम जिस भी संघटन में गए, उसका विघटन कर के ही निकले, मैं आप से अपनी सदस्यता के मुद्दे पर पुनर्विचार करने की प्रार्थना करता हूँ.

    आपका ही
    एक आम भारतीय नेता (नागरिक भी कह सकते हैं, आपकी मर्जी)
    १९४७ से ले कर आज तक -- गर्व है.

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  6. गंगा-जमुनी संस्कृति के नाम से एक ब्लॉग, सॉरी, एक फ्लेट रहपुर में हमारे लिये भी बुक कर लें। भविष्य में हमें बेचना हो, तो दाम अच्छे मिलेंगे, ऐसी आशंका है।

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  7. महान उद्देश्यों को लेकर चली एक महायात्रा को शुभकामनायें। कार्यवृत्त भी देते रहियेगा।

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  8. भई रहरपुर के फ्लैट्स की ढेरो खूबिया हैं।

    सबसे पहली खूबी तो यही है कि रहरपुर के कुछ डिलक्स कैटेगरी के फ्लैट्स की सीलिंग हाईट आप एडजस्ट कर सकते हैं। ये टो-टल्ली एडसजस्टेबल हैं, ब्लॉगरों के लिये खास तौर पर बनाये गये हैं।

    बता दें कि एडजस्टेबल सीलिंग हाईट का कॉन्सेप्ट हमने ब्लॉगरों की जरूरत को देखते हुए ही रखा है। पता नहीं कब किस को कितने इंची साइज के प्लेटफार्म की जरूरत पड़ जाय।

    वैसे भी पलटदास जैसे ब्लॉगर तो छह इंची की हाइट से ही संतुष्ट हो लिये लेकिन कई ऐसे भी हैं जिन्हें कि और ज्यादा उंचे प्लेटफार्म की जरूरत होती है ब्लॉगिंग में अपनी बात रखने के लिये ताकि अपनी नैतिकता, धार्मिकता, औऱ तमाम चिलगोजईयों को और भी उंचे तौर पर कह सकें।
    तो जिन किसी ब्लॉगरों के लिये छह इंची हाईट कम पड़े वो बारह याकि चौबीस जैसा चाहें उस लेवल तक प्लेटफार्म चुन सकते हैं और ऐसा करते हुए उनका सिर सीलिंग से टकराएगा भी नहीं क्योंकि यह टो-टल्ली एडजस्टेबल डीलक्स फ्लैट है :)

    दूसरी बात- रहरपुर के प्लॉट्स खरीदने के दौरान आपको इतने सारे महीन अनुभव होंगे कि आप अपने साथ हुए वाकयों पर ढेरों पोस्टें लिख सकते हैं, मसलन कहां कितना खिलाना पड़ा, कहां कितना NOC के लिये देना पड़ा वगैरह वगैरह। इससे ब्लॉगजगत में विषयों की कमी वाला बेस इंफ्रास्ट्रक्चर वाली इंडस्ट्री को बल मिलेगा और तमाम शैडो इंडस्ट्री के जैसे ही शैडो ब्लॉगरों के पनपने का स्वर्णिम अवसर उपलब्ध होगा जोकि हिंदी ब्लॉगिंग के लिये हिंदी सेवा की तरह है और एक तरह से यह बात हमारे लिये कॉर्पोरेट सोशल लाएबिलिटी को फुलफिल्ल करने जैसा है। हम अपने बिजनेस के साथ सोशल लाएबिलिटी को भूले नहीं हैं, इसी से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हम कितने इमानदार किस्म के डेवलपर हैं :-)

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  9. बधाई हो परधान जी,
    छोटा परिवार सुखी परिवार होता है, ज्यादे भीड़ मत इकट्ठी कीजिये। अगली टर्म में रवायत मियां को अध्यक्ष बना दीजियेगा, एक धर्मनिरपेक्षता का फ़ड़कता सुबूत हो जायेगा आपके पास।

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  10. शराफत अली को शराफत ने मारा...

    एक उद्देश्य आड़े-टेढ़े कोड और विज्ञापन लेने का भी है जिनमें से कुछ आपके कम्प्युटर की आंख से काजल भी चुरा ले जायेंगे|

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  11. आप को चवन्नी बटा सैकड़ा परसेंट की छूट,

    यानि की.......

    और जो,टहलगंज में आल रेडी पोजेशन ले रखे हैं उनको कोई अलग से छूट की सम्भावना पर गौर किया जाएगा.

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  12. oh bara bhadra vichar....

    pratidin hazari deten hain.....ummeed
    karte hain....membran group me jagah
    mil hi jayegi.....


    pranam...

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  13. विद्य़ार्थी का भटके तो गुरू मार्ग दिखाए। गुरू भटके तो प्रभु कौन बचाए!

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  14. ताऊ ने भी एक अखिल भारतीय ब्लॉगर असोसिएशन बना लिया है -उसके प्रस्तावों को भी पढ़ आईये ..मैं इन सभी का एक फेडरेशन बनाने वाला हूँ !

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  15. इस खबर का स्वागत है...इसमें महिला ब्लॉगर विभाग भी अवश्य होगा और मैं पहली महिला टिप्पणीकर्ता हूँ...सो..इसका कार्यभार मुझे सौंपने का सविनय निवेदन है...:)

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  16. धत्त तेरी की महाराज.... आप तो टट्टी में वुडलैंड का जुत्ता भिगो कर मारे हैं महाराज....

    जय गोरखपुर... जय कुसिनगर... जय इंजीनियरिंग कालेज....

    हगले बा........


    ऐ...
    हाटा,
    कसया,
    पररोना....

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  17. mae rashmi ravija ji saahayak pad kae liyae aavedan dae rahee hun
    lucknow ki hun jee so itna khyaal to aap ko rakhna hi hogaa

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  18. भाई अपुन के लिए भी जुगाड़ करिए न .... महफूज भाई को टट्टी खुड्डी की याद आ गई .... हा हा हा मजेदार पोस्ट....

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  19. क्या टीप करूँ !
    पलट्दासों के लिए आरक्षण दीजिएगा ? मार हो जायेगी ! :)

    महफूज भाई ने तो बड़ा जुगुप्सा भरा चित्र दिखा दिया ! :)

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  20. इस करिश्माई पोस्ट पर 'अंशुमाली' को 'पश्चिम' से उदित होते देखकर गदगद हूँ ! जै राम जी की !

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  21. बाप रे , बहुत मारूक हो गए हैं जी आप ..पूरा इंसाफ़ का घंटा उठा के बजा डाले हैं ...कुछ छूटा कि नहीं ...महाराज आप घातक हैं जी ,लाफ़िंग गैस हैं ...अईसा हमारा गैस नहीं एकदम स्योर हैं

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  22. .
    .
    .
    जय फलाने! जय चिलाने!!

    जय जय जय हो देव!


    ...

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  23. अरे अरे NRI के कोटे से हमारी सीट भी बुक कर ले, वरना हम धरना दे देगे. धनयवाद बाद मे:)

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  24. ब्लोग्गर्स असोशिएशन में अंतर्राष्ट्रीय ब्लोग्गर्स के लिए भी महिला विंग का प्रावधान होना ही चाहिए...उसके लिए मैं उम्मीद करूँ क्या ?
    :):)

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  25. भाई भतीजावाद के अंतर्गत मेरा एक पद पक्का है ....

    ई हम आपको बता रहा हूँ

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  26. गंगेश के साथ ही बगल मैं मैं भी खड़ा हूँ। रहरपुर के ‘मेड़खंड’ में एक छोटा स्टॉल बुक कराना है। सोच रहा हूँ अब सीधा धंधा कर लूँ।

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  27. अब हम क्या कहें ? हमें तो संबोधित ही नहीं किया गया है.
    आप ब्लॉगजगत के वो महानुभाव हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए दिमाग पर बार-बार चांटे लगाने पड़ते हैं, तब जाकर समझ में आता है. आजकल समझ थोड़ी आलसी हो गयी है, तो इस ब्लॉग पर आने से भी डर लगता है और खाली रस्म अदायगी या खानापूरी के लिए आना और जैसे-तैसे पढ़कर टिप्पणी कर जाना अपने बस की बात नहीं.
    हाँ तो बाबा (आपको भले भूल गया हो, मुझे कभी नहीं भूलेगा कि आपने मुझे कहा था कि बाबा कृपा बनाए रखेंगे, और गलतियाँ सुधारते रहेंगे...बाद में अपना कहा भूल भी गए :-)) सबसे अच्छा तो हमें सुभाषित लगा बाकी का भी थोड़ा-बहुत समझ में आया है... अभी भर लिया है दिमाग में जुगाली करके बताएँगे :-)

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