शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

चिरकुट चर्चा और थोड़ी सी हलकटई

शेयर मार्केट जैसे सॉफिस्टिकेटेड क्षेत्र में 'चिरकुट'!
अनिल रघुराज को मेल कर एक 'सर्वहारा शब्द' को 'पूँजीवादी क्षेत्र' में स्थान देने के लिये बधाई दिया जिसे उन्हों ने सहर्ष स्वीकार किया। (यह अलंकारिक भाषा शैली है, वाकई ऐसा होने की गारंटी नहीं है।)
मन में चिरकुटई जोर मारने लगी - यार! इस शब्द का उत्स क्या है? फेसबुक पर मित्रों के लिये यह सन्देश पठाया (जाहिर है कि चिंतन में चिरकुटई कर गया। फेसबुक पर 'फेस वैल्यू' टाइप सन्देश!)
चिर = हमेशा, लम्बी अवधि का।
कुट = घर, गृह, दुर्ग, गढ़, पत्थर तोड़ने का हथौड़ा, कलश, पहाड़, वृक्ष।
तो
चिरकुट = ????
इसे आर्जव ने पसन्द किया। चिरकुटों का बन्धुत्व!
नीरज बसलियाल ने प्रयास किया:
"लम्बी अवधि का पत्थर तोड़ने का हथौड़ा" 
इससे यह स्पष्ट हो गया कि वह मेरे टाइप के विद्वान हैं। मुझे पसन्द भी हैं क्यों कि अपने कुछ हमउम्र मित्रों के इस ताने के बावजूद कि तुम फालतू बुढ्ढों की दोस्ती में बोरिंग होते जा रहे हो, वह मुझे भाव देना और मेरी अहमकाना बातों को सुनना (listen या hear तो वही जानें) नहीं छोड़ते। बाकी किसी ने ज़हमत नहीं उठाई। निष्कर्ष यह कि उन्हें छोड़ कर फेसबुक की मेरी बाकी मित्रमंडली चिरकुटई में विश्वास नहीं रखती।
सुबह चिरकुट मामला गम्भीर हुआ तो थोड़ा जोर लगाया और यह बात ध्यान में आई:
चिरकुट कपड़े के बेकार छोटे पुराने भद्दे टुकड़े को कहते हैं। वस्त्र को 'चीर' भी कहा जाता था। यही लोकबोली में उस समय चिर हुआ होगा जब टुकड़े की क्षुद्रता दिखाने के लिये साथ में प्रत्यय जोड़ा गया होगा। 'कुट' का उत्स भी देसज ही है लेकिन स्पष्ट नहीं हो पा रहा।
अब किसे कहाँ चिपकाया जाय? अचानक ही शब्द चर्चा ग्रुप मन में कुलबुलाया जहाँ बहुत से विद्वान चिरकुट पंजीकृत हैं और शब्दों को लेकर आयँ, सायँ, बायँ, दायँ करते रहते हैं। वहाँ पोस्ट किया और दिनेशराय द्विवेदी का पहला उत्तर आया:
हाड़ौती में कपड़े के बेकार छोटे पुराने भद्दे टुकड़े को 'छींतरा' कहते हैं।
दूसरे उत्तर में ही निर्मलानन्द अभय तिवारी ने मुझे इन सुघर शब्दों में मुझे चेताया:
गिरजेश('इ' की मात्रा 'र' से मिसिंग!) भाई, इस पर पहले चर्चा हो चुकी है, देखिये इसे: https://groups.google.com/group/shabdcharcha/browse_thread/thread/76e286a932b0e5ad/dd94a25cdb6db169?hl=en&lnk=gst&q=%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%9F#dd94a25cdb6db169
और अजित भाई के अनुसार यह  चिरकुट शब्द चीर+कृतं से बना है। उनका विश्लेषण विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ देखें: http://shabdavali.blogspot.com/2008/10/blog-post_10.html
उन शब्दों में अंतर्निहित हड़क तत्त्व से मैं पानी पानी हो गया - यार! ‘चिरकुट’ शब्द पर मसाला ढूँढ़ने में इतना मेहनत करने के पहले तुम्हें ब्लॉग जगत के ये दो धुरन्धर क्यों ध्यान में नहीं आये?
अनूप शुक्ल और अजित वडनेरकर। अजित वडनेरकर ने चिरकुट पर विद्वता का प्रदर्शन किया है तो आशा के अनुरूप ही अनूप शुक्ल ने चिरकुट से अधिक चिरकुटई पर फुरसतई की है (लिंक आगे है)।
आप लोग इन विद्वानों के ये लेख अवश्य पढ़ें।
अभय तिवारी को मैंने यह ज्ञापन दिया:
धन्यवाद।
मुझे भी पहले ही सोच और ढूँढ़ लेना चाहिये था कि इस 'लोकप्रिय दिव्य'
शब्द पर चर्चा हो चुकी है या नहीं? चिरकुटई से बाज नहीं आया मैं ;)
ज्ञान प्रसार हेतु क्या यह चर्चा लिंक देकर अपने ब्लॉग पर डाल सकता हूँ?
जिसका अनुमोदन उन्हों ने 'बेशक' कर दिया। लिहाजा शब्द चर्चा की चिरकुटई भी यहाँ कॉपी पेस्ट कर रहा हूँ:
_____________________________
बनारस और अन्य इलाकों में यह गाली बहुतायत प्रयोग की जाती है। इसका क्या
इतिहास-भूगोल है ?
चिरकुट का अर्थ पुराना, स्थान स्थान से फटा कपड़ा है।
मुझे नहीं पता था कि चिरकुट कोई गाली है।
यह "शैतान" या "हरकती" या "नटखट" के अर्थ में किसी व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाने
वाला शब्द है।
वैसे जबसे ओरकुट आया है तब से उसकी साइट की कोडिंग में अनेकों त्रुटियों के कारण ओरकुट का नाम हमने मज़ाक में चिरकुट रख दिया है।
कृपया बताएँ कि यदि यह गाली है तो इसका अर्थ क्या है। यदि यह गाली है तो मुझे इसका
प्रयोग नहीं करना चाहिए।
रावत
चिरकुट गाली नहीं है.
आपने ऑर्कूट को चिरकुट कहा होगा मगर चिरकुट.कॉम सचमुच में एक साइट थी जो अब
बन्द हो गई है शायद.
चिरकुट "लघुता" दर्शाने के लिए भी उपयोग में लिया जाता है, मगर चिरकुटाई के तहत
ही.
एक चिरकुट चिंतन कभी किया था हमने देखिये यहां
http://hindini.com/fursatiya/archives/446
अनूप शुक्ल
मेरे एक सहयोगी मित्र रमेश सहाय इस समय मेरे सामने बैठे हैं और बता रहे हैं कि चिरकुट शब्द कुर्कुट से आया है । कुर्कुट का मतलब मुर्गा होता है । अंग्रेज़ी में चिर्प (Chirp) का मतलब चें चें करना होता है । तो अपने कालेज के दिनों में जब वे लखनऊ में हास्टल में रहते थे, तब वे लड़कों को कुर्कुट कहा करते थे ।
लड़कियों के लिए उन्होंने और उनके दोस्तों ने यह चिरकुट शब्द बनाया था। यानी चेंचें कर ने वाली । अंग्रेज़ी के चिर्प और हिन्दी के कुर्कुट को कुट लेकर ।
इनका कहना है कि तब पचास साल पहले जब ये शब्द इन लोगों ने बनाया था, इन्होंने यह नहीं सोचा था कि त्यह शब्द इतना लोकप्रिय हो जाएगा कि हिन्दी भाषा का एक शब्द ही बन जाएगा और उसका लोग विभिन्न अर्थों में इस्तेमाल किया करेंगे ।
रमेश सहाय जी ने अभी बताया कि हलकट शब्द भी अंग्रेज़ी के ’हेलकैट’ शब्द से ही आया है। अंग्रेज़ी में हेलकैट का मतलब होता है डायन । इसी से हिन्दी में हलकट शब्द बन गया  और फिर भिन्न अर्थों में उसका उपयोग होने लगा।
कृपया हमारी ये वेबसाइट देखें
www.kavitakosh.org
www.gadyakosh.org
1936 में संपादित रसाल जी के शब्दकोष में चिरकुट का अर्थ दिया है,
चिरकुट(चिर+-कुट= काटना) फटा पुराना कपड़ा, चिथड़ा, गूद़ड़।
अबक्या रमेश रहाय जी ने 1936 में कालेज की पढ़ाई पूरी कर ली थी
क्या रसाल जी ने सहाय जी से लेकर यह शब्द अपने कोष में रखा।
धन्यवाद आभा जी! मैंने रमेश जी को आपकी बात बता दी है। वे बगलें झाँक रहे हैं
और कह रहे हैं कि हो सकता है पहले भी इस तरह का कोई शब्द रहा हो ।
धन्यवाद भाई
सहाय जी को हलकट के बारे में भी बता दें
हलक के माने अरबी में गला होता है
जो गला काटे वह हलकट होगा....
यानी हलकट गरकटवा है
अनूप जी ,आप की पोस्ट -चिरकुट शब्द देखते ही याद आई...,।
मुझे नहीं लगता कि हलकट को गला काटने वाले के अर्थ में प्रयोग करते हैं। ये तो मुन्नाभाई
प्रकार की भाषा है, गुण्डे लोग किसी को चमकाने के लिए इस शब्द का प्रयोग करते हैं, अबे
ओ हलकट। अब, जो गला काटने वाला है, उससे लोग डरेंगे, उसके लिए इस तरह से इस शब्द
का प्रयोग कैसे करेंगे वरना उनका ही गला कट जाएगा।
कृपया इसके और अर्थ बताएँ।
रावत
चिरकुट का इतिवृत्त जानिए यहां-
एनडीटीवी में चिरकुट चर्चा
<
http://shabdavali.blogspot.com/2008/10/blog-post_10.html>
शुभकामनाओं सहित
अजित
गुरु ग्रन्थ में कबीर का फुरमान है;
कहै कबीरु सुनहु रे संतहु मेरी मेरी झूठी,
चिरगट फारि चटारा लै गइओ तरी तागरी छूटी
यहाँ चिरगट का अर्थ पिंजरा किया जाता है. क्या यह चिरकुट ही तो नहीं?
Baljit Basi
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इस चर्चा के बहाने अपनी अपनी चिरकुटई लेकर ढेरों चिरकुट यहाँ इकठ्ठे हो गये हैं। मैं निश्चिंत हूँ कि 'चिरकुट' या 'चिरकुटई' पर सन्दर्भ के लिये भविष्य में लोगों को अन्यत्र नहीं जाना पड़ेगा।  

11 टिप्‍पणियां:

  1. ..मतलब कई जगह भटकना पड़ेगा। अभी चुरकटई का मूड नहीं है।

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  2. इस तरह तो चिरकुट अर्थहीन ही रह जाएगा। भाव से इसका अर्थ 'व्यर्थ'ही दृष्टिगोचर होता है। चाहे उसे चींथरे चींदी से जोड लें।

    'हलकट' भाव से तो हलके या ओछेपन का ध्योतक अधिक है अतः यह 'हलके' शब्द से आया होगा।

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  3. 'राप्चिक'के बारे में भी कुछ जानकारी मिल जाये तो बढ़िया

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  4. चिरकुट bahut baar sune hai

    mara sarwa ke chirkut ba........

    bada chirkut bye....

    jai baba banaras....

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  5. शलभ तो सच में ही खो गए शायद..... और कोई वरीड भी नहीं लग रहा उनके लिए ..... क्या ढूँढने की औपचारिकता / कर्तव्यपूर्ति इतनी जल्दी पूरी हो गयी? या कि वह लेखक एक इंसान से चिरकुट में ट्रांस्फॉर्म हो गए?

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  6. एक प्रयास मैं भी कर ही लूं?
    जैसे पंत जी कविता ‘चिरसुख’ में चिर लंबे समय के लिए प्रयुक्त हुआ है, और ‘तिलकुट’ में कुट कूट कर बनया गया (तिल) के लिए। तो दोनों को मिला कर इतने लंबे समय तक कूटा जाए कि ‘चिथड़ा’ बन जाए (कुटने वाले का)।

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  7. बहुत खूब! ये तो बड़ी मजेदार चर्चा हो गयी! :)

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  8. लम्बे समय तक कूटने (लातियाने ) के योग्य अर्थात चिर्कुट!यह ऐसे ही लिखा जाएगा न ?
    हमें भी राप्चिक शब्द की व्युत्पत्ति जाने की तीव्र उत्कंठा है ,कोई बताएगा क्या ?

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  9. ग्राम देवताओं की श्रेणी में एक नाम होता है- 'चिरकुटी दाई', ऐसी मान्‍यता के स्‍थान पर पेड़ की डगाल पर कपड़े की चिदियां बंधी होती हैं.

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