रविवार, 25 सितंबर 2011

प्रार्थना

आज मन बहुत उदास है। प्रख्यात गायक जगजीत सिंह मस्तिष्क रक्त स्राव के कारण गम्भीर स्थिति में हैं। कहते हैं कि पहला प्रेम कभी नहीं भूलता। उनका गाया फिल्म ‘प्रेमगीत’ का अमर गीत ‘होठों से छू लो तुम’ संगीत के प्रति मेरे प्रेम का पहला कारण बना। आज भी आठवीं कक्षा की वह आठवी घंटी याद आती है जब कहानियों के क्षेत्र से गायन की ओर पहला पग लिया और उससे आगे कभी नहीं बढ़ा। पता नहीं गीत की सादगी है, संगीत की सहजता है या स्वर में भोले से स्वीकार और आग्रह का पुट है – आज भी जब यह गीत सुनता हूँ तो पग ठिठक जाते हैं। कुमार गन्धर्व, मल्लिकार्जुन मंसूर तो बहुत बाद में मन में समाये लेकिन जगजीत सिंह! पता नहीं कब...

उनका ऋणी हूँ कि भक्ति संगीत से मुझे जोड़ रखे हैं। ‘जनम सफल होगा रे बन्दे मन में राम बसा ले’ भजन में स्वर की वही सहजता है जैसे कोई साधू दिन भर के थके माँदे को समझा रहा हो। जिन चन्द विभूतियों के कारण यह नास्तिक समर्पण और प्रार्थना के स्वरों का अवगाहन आज भी करता है, उनमें जगजीत सिंह भी हैं।

ऋणी हूँ कि व्यर्थ सद्भावना के बवंडरों के बीच औसत दर्जे के पाकिस्तानी गायकों के प्रमोशन और भारतीय प्रतिभाओं की उपेक्षा के विरुद्ध अकेले जगजीत सिंह ने स्वर उठाया है। 

आज जाने किससे प्रार्थना में झुका हूँ कि नहीं, कुछ भी अवांछित नहीं होना चाहिये। आज भगवद्गीता नहीं देखनी मुझे ...




'पहला प्रेम' गीत 

'और' प्रार्थना - मुझे निर्वेद या वैराग्य नहीं चाहिये। यह बस एक नासमझ प्रार्थना है, ठीक गीत के वीडियो जैसी। 

         

11 टिप्‍पणियां:

  1. अरे! यह प्रार्थना तो पहली बार सुनी पर इससे बचपन में पिताजी द्वारा अनेक बार सुनी हुई "मोहन भैया" की कहानी याद आ गयी - यही थी बस उसमें राम का स्वरूप मोहन का था।

    प्रेमगीत से जुड़ी हुई भी बहुत सी यादें हैं जो आज भी चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं। :)

    संगीत प्रचार के लिये जगजीत सिंह का योगदान अद्वितीय है।

    आभार!

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  2. जगजीत सिंह की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी है. उन्होंने गज़ल गायन को एक नया आयाम दिया, उसे साधारण श्रोताओं तक पहुँचाकर. जो लोग गज़ल के नाम पर ही घबरा जाते थे, उन्होंने गज़ल सुनना जगजीत सिंह से ही शुरू किया. हम सभी उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं.

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  3. हमारी शुभकामनायें उनके स्वास्थ्य को बल प्रदान करें।

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  4. सही है गजल को कुलीनों की महफ़िल से उठाकर आम इन्सान के लबों पर लाने का करिश्मा उसी रूहानी मखमली आवाज ने किया,जिसे दुनिया
    'जगजीत सिंह' कहती है।उनकी लम्बी उम्र की कामना के साथ उनकी गायकी को सलाम।

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  5. वो जल्द स्वस्थ हों और संगीत की महफ़िले सजाते रहें, उनके गाये गीत गजलें सदियों तक महकेंगी.

    रामराम.

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  6. पहले लोग गज़ल को बड़ी अजीब नज़र से देखते थे। जितने आढ़े टेढ़े, पेंचदार उर्दू शब्द होते उतना ही उन्हें लगता बहुत बड़े लोगों की समझ की बात होगी, उनका जायका होगा। लेकिन वो जगजीत सिंह ही थे जो कि गज़ल को आसान तरीकों से जन जन तक पहुंचाने में कामयाब हुए।
    उनके लिये ईश्वर से प्रार्थना है कि जल्द अच्छे हों।

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  7. आज आपका लेख पढ़ा .....अभी पिछले ही रविवार को जगजीत सिंह जी का लाइव कार्यकर्म हमारे करनाल में हुआ था ........और एक दम से ये खबर .........मन हताहत हो गया ..........मन से बस उनके लिए ये दुआ ही निकलेगी कि वो जल्दी से ठीक हो जाये

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  8. उनके लिये ईश्वर से प्रार्थना है कि जल्द अच्छे हों।

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  9. उनके मंगल हेतु मन से प्रार्थनाएँ उठ रही है !

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