शुक्रवार, 30 मार्च 2012

'राम की शक्तिपूजा' - निराला : एक स्वर आयोजन की भूमिका


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वाचक का वक्तव्य:
'...भूमिका में मेरा अपना कुछ नहीं है। वाल्मीकि, चतुरसेन और नरेन्द्र कोहली के अध्ययन से रामकथा की जो समझ बनी, उसका अत्यल्प निराला की कालजयी रचना की पठन प्रस्तुति की भूमिका के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ। 
समग्र तो 'लघु उपन्यास अग्निपरीक्षा' के कलेवर में कभी आयेगा। लिखित रूप नहीं दे रहा, यह तो सुनने के लिये है। ...वर्तमान में बंगलुरू में रहते श्री ललित कुमार का आभारी हूँ जिन्हों ने स्वयं पढ़ कर मुझे राह दिखाई कि जो भी करना है, कर डालूँ। ...स्वास्थ्य ठीक नहीं है। ज्वर की थकान  के कारण मेरा साधारण स्वर और दोषपूर्ण हो गया है लेकिन संतोष है कि आरम्भ कर दिया...यह वर्षों से बेचैन निज कामना को शांत करने का एक आयोजन है।'
                                               - गिरिजेश राव   

bhoomika
जहँ जहँ चरन पड़े राघव के
           

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20 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर। कविता पाठ की प्रतीक्षा है।

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  2. ओज पूर्ण प्रस्तावना, कविता सुनने की इच्छा बलवती हो आयी है।

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  3. निश्चय ही प्रभावपूर्ण और ओजभरी प्रस्तुति!इसी प्रस्तावना के आलोक में अब शक्ति पूजा-अनुष्ठान की प्रतीक्षा असह्यहो चली है!

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  4. उत्सुकता बढ़ाती अद्भुत प्रस्तावना...
    सादर।

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  5. आचार्य, फ़ाईल डाऊनलोड कर ली है। फ़ोन में ट्रांसफ़र करके और अकेले में बैठकर सुनेंगे। शीघ्र स्वास्थ्यलाभ के लिये कामनायें।

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  6. ’मेरा मुझमे कुछ नहीं’ का उदात्त उद्घोष ही कहानी कह रहा है भईया!
    डाउनलोड किया, सुना - बेहतरीन अनुभव!
    बहुत आभार!

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  7. श्री राम जन्म की बधाईयाँ :) शुभकामनाएं |

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  8. इस फ़ाइल को डाउन लोड कैसे किया जा सकता है ? कृपया कोई मार्गदर्शन करें|
    शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिये कामना करता हूँ |

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  9. सुनने की इच्छा है अब ... रामनवमी की बधाई और शीघ्र स्वस्थ लाभ शुभकामना ...

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  10. जबरदस्त है भैया जी. अगली कड़ी की प्रतीक्षा है...

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  11. प्रभावी प्रस्तुति है .
    स्वास्थ्य -लाभ हेतु शुभकामनाएँ.

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  12. उफ़्फ़! शरभंग से पावो जम्फ़ेल यशी ला तक का आत्मदाह इस बात का प्रतीक है कि राक्षस अभी भी बकाया हैं। वानर अभी भी भखे जा रहे हैं, मल्लयुद्ध का साहस नहीं जुटा पाये हैं। क्या एक और वनवास की प्रतीक्षा है? बहुत सुन्दर! धन्य भये! जय हो!

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  13. जय हो!
    धन्य हुआ!
    कहीं भी ज्वर परिलक्षित नहीं होता वाणी में।
    ओज! साधु!

    शीघ्र स्वास्थ्य लाभ करें।

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