शनिवार, 29 दिसंबर 2012

नहीं रोना मुझे


10 टिप्‍पणियां:

  1. she was abhimanyu,
    and draupadi
    rolled into one

    in a state
    ruled by blind insensitive rulers
    silent spectators
    supporting their sons
    to violate their girls

    the sons of the head of state
    insulting womanhood as a birthright
    their friends screaming
    the propriety of
    getting them naked
    and fixing the price....

    the elders are bheeshmas
    hiding behind selfish oaths of office
    the daughters draupadi

    but
    damini was nirbhaya
    she was abhimanyu
    who struggled
    alone
    against the killers
    who surrounded her
    and attacked her

    alone she fought
    refused to give up
    refused to accept defeat
    till the last breath

    she lives on
    we have died
    as a society

    i as a woman
    want to curse
    this land of insensitive rulers
    to a fate
    of no daughters being born here
    for the next 80 years
    so
    this cruel humanity dies out
    for want of mothers
    as
    they have misused her
    insulted the ability to give birth
    in violating her very same ability
    over and over and over
    repeatedly from centuries
    without any letup ...

    and a new era begins
    after the mass wipe out
    of this inhuman society
    who die out because
    they had no mothers to give birth....

    but i won't curse
    because there are good people too
    who shall suffer.....

    but i pray to warn
    them who are snigerring
    with dirty thoughts in
    their dirty minds

    if you sniger
    and you smile
    and speak lewd remarks
    in the privacy of your drawing rooms
    in the privacy of your dirty brains
    then
    you are cursed
    to the
    end of your personal humanity
    and you shall suffer
    this destiny
    when the pot of sin is filled.....

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  2. हम तो उसका ख्याल नहीं कर पाये, ईश्वर ही उसे प्रसन्न रख पायेगा।

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  3. बिलकुल नहीं रोना हमें! --यह साहस भर रहा हूँ।
    क्या कहूँ इस मृत्यु को? किस शब्द से विशेषीकृत करूँ।
    हहरा रहा हूँ। तनिक भी बुद्धिजीवी न बनते हुए खूब-खूब दहाड़ें मार कर रोने का मन कर रहा है। मैं आह से निकली उस प्रेरणा में विश्वास कर रहा हूँ जिससे मुझे अपने सम्मुख किसी और नारी के प्रति किसी असम्मान-दुर्व्यवहार पर लड़ने की शक्ति आये!
    पर सच में मैं खूब रोना चाहता हूँ, रो रहा हूँ।

    मुझे चुप रहने को कहने पर मुझे गुस्सा आयेगा, जो मैं नहीं चाहता ।
    मैं चाहता हूँ इन आँसुओं में इस देश का नेतृत्व तिरोहित कर दूँ। मैं चाहता हूँ कि इस बलात्‌ व्यवहार और उस कारण हुई मृत्यु पर जीभ चलाने वालों और विमर्श करने वालों कों संज्ञा शून्य कर दूँ।
    मैं चाहता हूँ मैं खूब रोऊँ।

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  4. सिसकना छोड़ अब कड़कती दामिनियाँ !

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  5. सच है, रोना स्वाभाविक है लेकिन उससे आगे बढ़ाने कि ज़रूरत है, मेरी संवेदनाएं और शुभकामनायें ...

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  6. रोना कमज़ोर बनाता है और अभी मजबूती की ज़रूरत है.. आग जलती रहने की.. नींव हिला देने की आवश्यकता है!! अभी नहीं तो कभी नहीं!!

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  7. सच है अभी नहीं तो कभी नहीं ...
    आंसुओं को हथियार बनाने की जरूरत है आज ...

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  8. कुव्यवस्था के खिलाफ जो युद्ध शुरू हुआ है,जारी रहे.
    सोये हुए देश को जगा गई है वह.
    दामिनी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि!

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