आ नो भद्रा: क्रतवो यंतु विश्वत:।
संगच्छध्वं संवदध्वं संवो मनांसि जानताम
देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते
समानीव आकू पि: समाना हृदयानि व:
समानमस्तु व मनो यथा व: सुसहासति।
| धूप! |
पास बैठो कि मेरी बकबक में नायाब बातें होती हैं, तफसील पूछोगे तो कह दूँगा,मुझे कुछ नहीं पता।
Half of what I say is meaningless, but I say it so that the other half may reach you.- KG (S&F)
आ नो भद्रा: क्रतवो यंतु विश्वत:।
संगच्छध्वं संवदध्वं संवो मनांसि जानताम
देवा भागं यथा पूर्वे संजानाना उपासते
समानीव आकू पि: समाना हृदयानि व:
समानमस्तु व मनो यथा व: सुसहासति।
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