बुधवार, 7 जुलाई 2010

बन्द बन्द, कमर पर लात, फुटबाल के बहाने... फाइनल कब होगा ?

हम फुटबाल के सेमीफाइनल देखत देखत सोय गएन।

सपना देखे कि एक तरफ कंग्रेसी और दूजी ओर लाल गेरुआ सब एकै साथ आपस में फुटबाल खेल रहैन । थोड़ा अउर ध्यान से देखै तो फुटबाल की ज़गह अपने लखनलाल का कॉमन मैन (स्टुपिड) दे दना दन लात खाए जा रहा था। रेफरिया 'बन्द बन्द' चिल्लाय रहा था। सीटी बजी तो नींद खुली देखा भोर हो रही थी। मलिकायन भी मेरे चौंक उठने से जग गई थीं - मैंने उन्हें बताया भोर के सपना सच होत है।
कहा कमर पर ऑयोडेक्स लगाय दो, बड़ी पिराय रही है। लात तो हर जगह पड़ी है लेकिन कमर पर कमीनों का जोर अधिक था।
जाने कितनी दफा और लात खानी है! जाने फाइनल कब होगा ? 

12 टिप्‍पणियां:

  1. उसपर ये लातें तब तक पड़ती रहेंगी जब तक वो हमेशा के लिए गोलपोस्ट के अंदर ना चला जाये :(

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  2. यह बिना गोल का खेला है,
    बस लात चलावन मेला है ।

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  3. जब आम आदमी की याददाश्त इतनी अच्छी हो जाएगी की मतदान करते समय जन प्रत्याशियों के पूरे कार्यकाल का लेखा -जोखा याद रख सके ...!

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  4. कमर और लात पर किसी का शेर है -
    '' दुश्मन ने मेरी पुस्त पर क्यों वार किया है
    यह बात पूछने को मेरे यार बहुत हैं ! "
    हाय तोबा मचती है और फिर 'बंद' का बाजूबंद जिन्दगी भर कामन-स्टुपिड-मैन से कहलवाता रहता है कि ''बाजूबंद खुल-खुल जाय '' ! यह खयाल-गायन कहाँ ख़त्म होने का !

    अब आम आदमी पर यह लात तो पड़ती ही है , रेफरिया दगाबाज जनता कै बात न मानिस !

    कमर पर कमीनों का जोर अधिक इसलिए रहा क्योंकि मूलाधार-चक्र तो वहीं है !

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  5. किसी उल्टे पैदा हुए शख्स से फिर लात खाईए...सब ठीक हो जाएगा :)

    दवाई रूप में भी लात....अब वो क्या है कि लोहा ही लोहे को काटता है :)

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  6. लम्बे समय तक कमर के आस पास फैट के बढ़ने से मधुमेह और हृदय बीमारी जैसी समस्याओं का खतरा पैदा हो जाता है...........सो बधाई ! इसी बहाने कम से कम ऐसे स्लिम ट्रिम बने रहेंगे !!

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  7. आम आदमी तो हर रोज़ पेट पर लात खाता है. कमर पर लात तो उन्होंने स्वाद बदलने के लिए लगाई होगी. आम बाम मलिए, काम धाम पे चलिए!

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  8. लतखोर लोग ..इलाज केवल लतौअल -चाहे फुटबाल हो या प्रजातंत्र !

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