गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

कहना गोयबेल्सों से - सत्यमेव जयते नानृतं




पाओलीन और योगेन्द्र जो कि घटनास्थल पर उपस्थित थे, के बयान आधुनिक गोयबल्सों को झूठा साबित करते हैं। 
“If you repeat a lie often enough, it becomes the truth. ”
― Joseph Goebbels
“It would not be impossible to prove with sufficient repetition and a psychological understanding of the people concerned that a square is in fact a circle. They are mere words, and words can be molded until they clothe ideas and disguise.”
― Joseph Goebbels
“The bigger the lie, the more people will believe it.” 

"एक झूठ को कई बार और पर्याप्त बार दुहाराओ तो वह सच हो जाता है।" - हिटलर का प्रचारक गोयबेल्स  

आशा है, विश्वास है कि जनता झूठ को समझेगी।
आशा है कि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के सद् पालक भारत गणराज्य के इस आदर्श वाक्य को नहीं भूलेंगे:
सत्यमेव जयते

मुंडकोपनिषद् के जिस सूत्र से यह अंश लिया गया है, उसका सम्पूर्ण इस प्रकार है:

सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पंथा विततो देवयान:।
येनाक्रमंत्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानं॥ (3.1.6)

सत्य की ही जय होती है, झूठ की नहीं। सत्य से ही देवयान मार्ग परिपूर्ण है। इसके द्वारा कामनारहित ऋषिगण उस पद को प्राप्त होते हैं, जहाँ सत्य के श्रेष्ठ भंडाररूप का निवास है।
आशा है कि आधुनिक युग के ऋषिगण इसे नहीं भूले होंगे।
___________

 चार नीतियाँ होती हैं - साम, दाम, दंड और भेद। आदर्श शासक इनमे संतुलन बना कर चलते हैं लेकिन वर्तमान शासनतंत्र तो ....
साम का तो प्रश्न ही नहीं। उनके लिये दाम दंड के बाद आता है। दंड का प्रदर्शन राजपथ पर देखा ही जनता ने। दस लाख में दाम है और भेद नीति है कॉंस्टेबल की कथित चोटों के कारण मृत्यु ताकि:
 
(1) जनता और युवा अपराधबोध से ग्रसित हो नैतिक साहस खो बैठें। 
(2) बलात्कार के मुद्दे से जुड़ी तमाम नग्न सचाइयाँ पुन: नेपथ्य में चली जायँ। 
... आगे और भी आप समझ सकते हैं। 

इसे समझिये और मत भूलिये कि समूचा आन्दोलन इन दो बातों के लिये था:
- बलात्कार सम्बन्धित क़ानूनों में परिवर्तन 

- देश भर में त्वरित न्यायपीठों की स्थापना ताकि स्वयंसिद्ध बलात्कार के मुकदमों में निश्चित समय सीमा में न्याय और दंड की कार्यवाही सम्पन्न सके। 

यह तंत्र आप का है। यदि यह आप के विरुद्ध है तो भी आप इससे भीतर से लड़ सकते हैं। लोकतंत्र में लड़ाइयाँ ऐसे ही लड़ी जाती हैं। बिना किसी दुविधा के न्यायमूर्ति वर्मा की समिति को क़ानून में परिवर्तन से सम्बन्धित जो भी बात आप को कहनी हो, भेज दें – अंतिम तिथि 5 जनवरी से पहले ही। विलम्ब न करें। आप का थोड़ा सा समय आधी आबादी और समूचे देश के लिये कल्याणकारी होगा।

ई मेल: justice.verma@nic.in
फैक्स: 011- 23092675

3 टिप्‍पणियां:

  1. झूठ के सौदागर ऐसे हुये बेपर्दा!
    http://storify.com/barbarindian/constable-tomar

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  2. some questions on the diversion tactics by delhi police, using their own colleagues tragic death to divert a very genuine issue

    1. if he had a heart problem and was not physically fit, WHY WAS he ordered to such a tough field duty?

    2. the post mortem report said that heart attack COULD happen due to injuries , not that it DID SO HAPPEN _ JUST COULD HAPPEN. why such confusing terminology? legally, in the court of law, an autopsy surgeon can testify ONLY to medical findings - not to surmises about what could happen, nor about what COULD have happened at India gate where the autopsy surgeon was not present.

    3. WHY was the body cremated in such a hurry ?

    4. Why did they not take and keep X_ray images proving brokken rib bones ?

    5. How soon will they throw mud and try to intimidate the two witnesses?

    6. Was the post mortem done with only those medical men who are attached to the police dept permanently, why not post mortem specialists from other cities were called?

    7. How does the death of a constable - WHATEVER BE THE REASON - make the protest "violent and unlawful"?

    8. If physically unfit person is ordered to field duty which COULD cause death - is the COMMANDING OFFICER not to be co-accused ?????

    unending questions - no answers from authorities

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