...कल रात जहाँ भी शुभकामना सन्देश देने के लिए ट्राई किया, या तो बी एस एन एल साहब ने इनकार कर दिया या मोबाइल उठा भी तो शोर शराबा और हेलो, हेलो ...कट। बन्दों ने पलट कर काल करने की जहमत नहीं उठाई। एस एम एस से मेरी बनती नहीं। बाद में खयाल आया कि उनके मौजा ही मौजा में मैं मूर्ख बेफिजूल ही खलल डाल रहा था। आलसी महराज! तुम्हें रात की पार्टी सार्टी के समय ही सूझी? ग़लत समय पर नेक इरादे!
... मैं तो आज के दिन याद ही करता रह जाता हूँ कि यार! लास्ट टैम इसे कब सेलीब्रेट किया था? याद ही नहीं आता। Such a dull, insipid, bore man!
हाँ, कुछ ग्रीटिंग कार्ड, कुछ फूल, कुछ मुस्कुराहटें अवश्य याद आती हैं।
अपनी जमा पूँजी वही हैं, चक्रवृद्धि क्या साधारण ब्याज भी नहीं लगता और मूलधन की क्रय क्षमता घटती ही जा रही है।... दो दिन पहले पढ़ा था कि अब चवन्नी इतिहास की वस्तु होने जा रही है।
कहीं क्रय क्षमता घटते घटते मेरी जमा पूँजी भी चवन्नी तो नहीं हो जाएगी?
छड़ यार! अल्लसुबह क्या बकबक करने लगे?...
यादों में मगन रहिये, वर्तमान नववर्ष मनाइये और भविष्य के उजले सपने देखिए।
मेरी शुभकामनायें हमेशा आप के साथ हैं, कभी चवन्नी नहीं होंगी।