रविवार, 4 जुलाई 2010

भारत बन्द ... बन्द कीजिए फालतू की नौटंकी !

5 जुलाई को सत्ता के दलालों ने आम जनता को न्यौता दिया है - भारत को बन्द करो ! आप से अनुरोध है कि इस वाहियात न्यौते पर अमल न लाइए। काम कीजिए। इस दिन दो के बजाय चार फाइलें निपटाइए। रुके हुए पेमेंट कराइए। दुकान पर ग्राहकों से थोड़ा और प्रेम से बतियाइए। कोई रुका हुआ फैसला ले लीजिए। ... उन्हें बताइए कि भारत बन्द नहीं हो सकता! गए वो ज़माने !! अब यह देश चल पड़ा है। दौड़ने को कहो दौड़ेगा, रुकने को कहोगे तो तुम्हें रौंदेगा। नौटंकी अब गली गली नहीं रंगशालाओं में ही होगी और कायदे की होगी - भँड़वागीरी नहीं चलेगी।
मैं सत्ता में बैठे लोगों का एजेंट नहीं - कोई भी शासन में होता, इस तरह से भारत बन्द का समर्थन मैं नहीं करता। क्या है मुद्दा ? यही न कि पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में वृद्धि हुई है ! असलियत मालूम है आप को ? सब्सिडी का खून कब तक चाटते रहेंगे ? रसीला गोस्त तो वे चाभ रहे हैं जिनकी तिजोरियाँ यहाँ नहीं स्विट्जलैण्ड में हैं। होश में आइए !
कितनी बार आप लोगों ने भारत बन्द किया है:
- जब सिनेमा के टिकट के दाम बढ़े हैं ।
- जब किसी मॉल में दो पैसे की चीज दस रुपए में चाभे हैं और चटकारे ले दोस्त परिचितों पर भाव जताए हैं ।
- हर महीने दो महीने पर जब दूध के भाव बढ़े हैं ।
... यह लिस्ट अंतहीन है।
भरतों की संतानों ! जिस रसमलाई की आप को आदत पड़ चुकी है, वह बहुत दिनों तक नहीं मिलने वाली। ज़हर बन कर समूचे तंत्र को डायबिटिक बना रही है। अनुशासित होइए। अभी पहला स्टेज है। गनीमत है। दूसरे स्टेज पर रोग असाध्य हो जाएगा। ज़रा इंटरनेट पर दुनिया के दस सबसे ग़रीब देशों की अवस्था से परिचित हो लीजिए। भारत बहुत अलग नहीं है।
ग़रीबी दान और भीख से नहीं, उद्यम से जाती है। सब्सिडी देने के लिए पिछवाड़े से पैसा काटने का रिवाज अधिक खतरनाक है। बेहतर है कि यह टीस मारते हुए भी कि  उफ! बहुत महँगाई है, सही कीमत अदा की जाय और अनुशासित हुआ जाय।
पेट्रोलियम पदार्थ विकास के लिए अनिवार्य हैं और उनका अनुशासित हो कर उपयोग आवश्यक है । क्यों कि तमाम ग्रीन स्रीन, वार्मिंग ठंडी, सोलर पोलर, हवा हवाई हल्लों के बावजूद मानव सभ्यता अभी तक इनके ऐसे विकल्प ढूँढ़ नहीं पाई है जो इन्हें प्रतिस्थापित कर दें। और ये दिन ब दिन तेज़ी से घट रहे हैं । कारूँ के खजाने नहीं मिल रहे !
भारत सरकार के विज्ञापन से आप लोगों को अवगत कराता हूँ। यह कोरा सरकारी प्रचार नहीं है। इस देश के एक नासूर को खोल कर बताया गया है।
- भारत अपने कच्चे तेल की आवश्यकता का 80% आयात करता है। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव से घरेलू कीमतें प्रभावित होनी ही हैं।
- सार्वजनिक वितरण की केरोसीन की क़ीमत रु. 19 प्रति लीटर बढ़नी चाहिए थी जब कि बढ़ी सिर्फ रु. 3 प्रति लीटर।
- रसोई गैस की कीमत प्रति सिलिंडर रु.261 बढ़नी चाहिए थी जब कि बढ़ाई गई सिर्फ रु.35 प्रति सिलिंडर। साढ़े ग्यारह करोड़ परिवारों को सप्लाई की जाने वाली इस गैस के कारण अर्थ व्यवस्था पर कितना दबाव है, ज़रा हिसाब लगाइए। कैलकुलेटर लेकर 2599 के आगे कितने शून्य आते हैं ? गिनते रहिए ...
डीजल पेट्रोल का भी यही हाल है। एक बड़ा सीधा सा तर्क है कि डीजल का दाम बढ़ने से सारी वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं।  सही है। इसीलिए यहाँ सरकारी नियंत्रण रखा गया है लेकिन बोझ उठाने की और सहने की भी एक सीमा होती है। जब अति हो जाती है तो ऐसे कदम लेने पड़ते हैं। कोई भी सत्ता में रहेगा, लेगा।  तरीके अलग अलग हो सकते हैं । कुछ आप को कम कष्टकारी लग सकते हैं, कुछ अधिक।
जरा अपने ग़रीब पड़ोसियों के यहाँ की क़ीमतों पर नज़र डालिए:
देश
रसोई गैस (रु. प्रति सिलिंडर)
केरोसीन (मिट्टी का तेल) प्रति लीटर
पाकिस्तान
577
    35.97
बंगलादेश
537
    29.00
  श्रीलंका
822
21.00
नेपाल
782
   39.00
भारत (दिल्ली की क़ीमतें, बाकी ज़गह थोड़ी कमी बेसी हो सकती है।)
345
12.32
कुछ समझ में आ रहा है ? मुर्गी को हलाल न होने दीजिए, सोने के न सही सामान्य अंडे नियमित मिलते रहेंगे। कभी कभी देखभाल का खर्च ज़रूर बढ़ेगा।   
अब आप बताइए:
- आप के यहाँ (4 का परिवार) एक सिलिंडर  कितने दिनों चलता है ? एक महीने ? एक महीने में रु. 35 अधिक देना हो तो हाय तौबा और मॉल मे एक दफे सिनेमा देखने जाने पर हजार रूपये फूँक देने पर वल्ला वल्ला ! कितनी बार आप सिनेमा देखने जाते हैं - महीने में ? कभी सोचा कि वहाँ 35 रु. की कटौती कर ली जाय? नहीं । क्यों ? - कीजिए। यह सरकार का नहीं आप के देश का सवाल है। बाहर से जब खरीदा जाता है तो डॉलर में भुगतान किया जाता है। विदेशी मुद्रा कोश प्रयोग में लाया जाता है। कुछ समझ में आया?
- कितनी बार रेड लाइट सिगनल पर आप गाड़ी बन्द किए हैं ? एक बार भी नहीं। क्यों ? हरी होते ही फुर्र से निकलने की जल्दी होती है। कितना समय बचता है? किसी पर इम्प्रेशन जमा रहे होते हैं? उस इम्प्रेशन की क़ीमत क्या है ?
- मिट्टी के तेल की चोरबाज़ारी है। सिलिंडर से गैस निकाल ली जाती है। कितनी बार आप लोग गोल बना कर इसके विरुद्ध खड़े हुए हैं? एक बार भी नहीं। क्यों? अपना क्या जाता है?
नेता जी कितनी बार आप को बुलाने आए हैं भारत बन्द कराने के लिए ?  एक बार भी नहीं। क्यों? अरे वही तो यह धन्धा सँभाल रहे हैं। मुद्दा उठा कर कौन उन्हें नाराज़ करे ?
ज़रा सोचिए। समस्याएँ आप से ही हैं और आप से/पर ही समाप्त होंगी । अपने भीतर  कुछ अनुशासन लाइए।
'भारत बन्द' का व्यय कितना होगा ? फिलहाल तो बढ़ोत्तरी के बावज़ूद तेल सब्सिडी पर व्यय रु.53000 करोड़ सालाना है। आप के पर्स से ही जा रहा है लेकिन जिस तरीके से जा रहा है वह तंत्र को रोगग्रस्त किए हुए है। 

46 टिप्‍पणियां:

  1. ये बन्द वास्तव में राजनीतिबाजों की नौटंकी है, इससे स्वार्थी तत्वों के अलावा अन्य सभी का नुकसान ही होता है, रोज कमाने खाने वालों की रोजी रोटी तो मारी ही जाती है।

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  2. नौटंकी तो है..इसमें कोई शक नहीं.....लोग भले कहें कि नौटंकी प्रथा का अवसान हो चुका है लेकिन नहीं...हर स्तर पर यह नौटंकी अपने नए नए रूप लेकर और निखर रही है।

    कभी सरकार में बैठे लोग नौटंकी करते हैं कि हम दाम बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं लेकिन कैबिनेट में होने के कारण साईन करना पड़ा तो कभी कोई विपक्षी को अब जाकर होश आ रहा है कि महंगाई बढ़ गई है.....जबकि यही विपक्षी जब सत्ता में थे तो यह लोग भी यही रोना रो रहे थे कि सब्सिडी कब तक देते रहें।

    न जाने यह नौटंकी और कब तक चलेगी।

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  3. आपसे असहमत तो हो ही नहीं सकते, प्रदेश बन्द, भारत बन्द वगैरह निहायत ही बेतुकी चीजें हैं। क्या क्या झेलना पड़ता है, परिवार सहित भुक्तभोगी हूं। लेकिन सवाल आगे और भी हैं।
    पेट्रो उत्पादों की मूल्य वॄद्धि इतना नहीं सालती, जितना यह बात कि इसका असर हुक्मरानों पर क्यों नहीं होता? कितने नेताओं ने अपने लिये पायलट पैट्रोलिंग बन्द करवाई है? एक नेता के कहीं आने जाने पर तीन चार गुना गाडि़यां आगे पीछे चलती हैं, और कुछ नहीं उसका खर्चा ही क्यों नहीं संबंधित सांसदों, विधायकों के भत्ते से काटा जाये?
    कृषकों के लिये सब्सिडी है, जो चुनाव के दौरान और ज्यादा दयानतदारी दिखाते हुये बढ़ा दी जाती है। कितने जरूरतमंद कॄषक हैं जो इस सब्सिडी का लाभ पाते हैं?
    कायदे से सब्सिडी जैसी चीज का खत्म होना ही श्रेयस्कर है, जब तक ये रहेंगी, पिक ऎंड चूज़ के तहत रसूखदार लोग बेजा लाभ उठाते रहेंगे।
    आप सवाल सही उठाते हैं,कुछ तो असर लोगों पर पड़ेगा ही।

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  4. बंद का विरोध तो सचमुच उचित है, लेकिन जो बातें आपने बाद के अनुच्छेदों में कही है वो विचारणीय नहीं, शोचनीय हैं.

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  5. सही है , भारतेंदु हरिश्चंद्र का बलिया वाला व्याख्यान याद आ रहा है , १९ वीं
    शताब्दी में ही उन्होंने कहा था कि भारतीय रेल के डिब्बे जैसा आचरण न करें !
    ( तब भारत में रेल ३-४ दशक पहले आयी थी और यह उपमा नयी थी , पर आज भी
    प्रसंग गर्भत्व की दृष्टि से उतनी ही सटीक व नई है ! ) जब भडुवे इंजन बनने का
    का दावा करें तो उन्हें बताना जरूरी है कि '' अब यह देश चल पड़ा है। दौड़ने को कहो
    दौड़ेगा, रुकने को कहोगे तो तुम्हें रौंदेगा। ''

    आप द्वारा दिए गए आंकड़ों पर मैं भी ठहरा !

    विरोध होना जरूरी तो है ही नहीं तो निरंकुचता का एक मृदु - वातावरण बनने लगता
    है , पर मैं मानता हूँ कि विरोध ( बंद ) जो जनता के बीच की आवाज हो कर बढ़े वही
    स्वागतयोग्य है ,शक्ति संपन्न और संभावनाशील है , रूस की जारशाही का उलट जाना
    उदाहरण है ! पर इन नेताओं ने विरोध - बंद को निजी हथियार सा बना लिया है ! ऐसी
    स्थिति में तथाकथित हुक्मरानों द्वारा प्रायोजित बंद जनता द्वारा बेअसर किये जांय , यही
    बेहतर होगा !

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  6. आप अंदर की बात जानते हैं सो आपसे सहमत !

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  7. भीड़ को ललकारने वाले कभी तार्किक बातें नहीं करते। आपकी तर्कणा इन नेताओं की दुकान बन्द कराने वाली है। भारत बन्द का नारा भीड़ की मानसिकता को भुनाने का हथियार है। रुककर स्थिरचित्त हो सोचने वाले इन आन्दोलनों से अलग हो जाएंगे।

    काश आपकी अपील/ समझाइश पर ये नेता भी कान देते।

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  8. एक सच्‍चाई यह भी है कि इस एक दिन के बंद से आप कितने मानवीय श्रमिक घंटे बरबाद करेंगे। अब देखिए न मैं जहां काम करता हूं वहां बंद के कारण सुरक्षा की दृष्टि से अवकाश घोषित कर दिया गया है। हालांकि उसकी भरपाई हमें शनिवार को काम करके करनी है। हमारे यहां शनिवार को भी अवकाश्‍ा होता है।

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  9. तमाम राजनीतिक दल जानते हैं की पेट्रोलियम पदार्थों के दाम कितने होने चाहिये. ये हकीकत में एक नौटंकी के अलावा कुछ नहीं है. अगर ये दल अज सत्ता में होते तो ये भी यही करते.तो फिर ये झूठा नाटक इसलिए. भ्रस्टाचार के विरुद्ध आज तक कोई भारत बंद हुआ है. बढ़ती बेरोजगारी और गरीबी के लिए कभी भारत बंद हुआ है. ऐसा कभी नहीं हुआ.है. ऐसे बन्ध का कोई औचित्य नहीं है.

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  10. आपकी बात से शत प्रतिशत सहमत |जरूरत है स्वयम को अनुशासित करने की | हम भी बंद का विरोध करते है |

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  11. हम आपके साथ हैं भारत बंद हाय हाय मगर मगर .....वोट की खातिर ये सरकारें मनरेगा और पी डी एस प्रणाली और कई अनुत्पादक मदों पर पर टैक्स पेयर्स का अकूत धन लुटा रही है ..इसे कोई रोकेगा?
    नहीं तो हम जल्दी ही दरिद्र होने वाले हैं -कोई बहुत स्कीम इस देश में हो रहा है और हम अनजान हैं -अज्ञानता ही आनंद है !
    कल तो आनंद का पर्व है -हम बंद नहीं मनायेगें ,आनंदम आनदम मनायेगें !

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  12. भारत बन्द करने वालो को बन्द करे तो समस्याये कुछ कम होगी

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  13. भारत बन्द करने वालो को बन्द करे तो समस्याये कुछ कम होगी

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  14. सीधी खरी कड़ी बात। मुझे पसन्द आई। डा. अरविन्द की बात में दम है लेकिन अज्ञान आनन्द का कॉंसेप्ट इस देश के लिये बहुत घातक प्रूव होगा ।

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  15. भाई साहब शायद आपकी अक्ल पे ताला पड़ा है . पूरा मुंबई और चेन्नई तेल पैर बैठा है और इस सरकार का खेल देखिये अगर मुकेश अम्बानी तेल निर्यात करता है तो उसे ड्यूटी में रिआयत मिलती है और अगर वही वो भारत में बेचता है तो इतना टैक्स की उसका तेल बाकी सरकारी फर्मो से ज्यादा दाम का हो जाता है आप सत्ता के दलाल न बने तो बेहतर है बिना जानकारी के या आधी अधूरी जानकारी लेकर अर्थ शास्त्री न बने तो बेहतर है

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  16. प्रिय समीर जी,
    बेहतर होता कि गिरिजेश ही जवाब देते लेकिन आप की बात इतनी ओछी है कि रहा नहीं जा रहा. यहाँ अर्थशास्त्री बनने का दावा नहीं सरकार द्वारा दिए विज्ञापन को बताया गया है. यदि आप दूसरा पक्ष रखना चाह रहे हैं तो आँकड़े दीजिए. बताइए कि अम्बानी को रिफायनरी लगाने और तेल फील्ड खोजने पर क्या क्या रियायतें लिखित रूप में दी गईं थीं. मद्रास और बॉम्बे के तेल क्षेत्रों की क्षमता, उपलब्धता और ड्र्लिंग के लिए बेंचते समय के कॉंट्रैक्ट भी बताइए.
    सबसे बड़ी बात यह बताइए कि ये नेता जो बन्द की बातें कर रहे हैं अपनी स्टेट सरकार में तैक्स इतना कम क्यों नहीं कर देते कि अम्बानी को तेल बेचने में सुभीता हो जाय?
    आप जैसे पाखंडी, खोखले और पॉपुलिस्ट लोगों ने ही इस देश का बेड़ा गर्क कर रखा है.

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  17. प्रिय समीर जी,
    बेहतर होता कि गिरिजेश ही जवाब देते लेकिन आप की बात इतनी ओछी है कि रहा नहीं जा रहा. यहाँ अर्थशास्त्री बनने का दावा नहीं सरकार द्वारा दिए विज्ञापन को बताया गया है. यदि आप दूसरा पक्ष रखना चाह रहे हैं तो आँकड़े दीजिए. बताइए कि अम्बानी को रिफायनरी लगाने और तेल फील्ड खोजने पर क्या क्या रियायतें लिखित रूप में दी गईं थीं. मद्रास और बॉम्बे के तेल क्षेत्रों की क्षमता, उपलब्धता और ड्र्लिंग के लिए बेंचते समय के कॉंट्रैक्ट भी बताइए.
    सबसे बड़ी बात यह बताइए कि ये नेता जो बन्द की बातें कर रहे हैं अपनी स्टेट सरकार में तैक्स इतना कम क्यों नहीं कर देते कि अम्बानी को तेल बेचने में सुभीता हो जाय?
    आप जैसे पाखंडी, खोखले और पॉपुलिस्ट लोगों ने ही इस देश का बेड़ा गर्क कर रखा है.

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  18. सहिये धीपाये हैं आप...
    सूपट बात कहे हैं..
    हाँ नहीं तो..!!

    उत्तर देंहटाएं
  19. कई बातों पर सहमति के बावजूद मुझे लगता है कि यदि सरकार को सब्सिडी हटाने के प्रति इतनी ही आर्थिक हिम्मत दिखानी थी तो उसे इन आयातित पदार्थों पर उसी तरह का टैक्स लगाना चाहिए था ....जैसा रोजमर्रा के सामानों में लगा हुआ है ....मुझे लगता है यह पदार्थ और सस्ते हो जाते |

    भारत बंद से सहमति तो नहीं ...पर पता नहीं क्यों मुझे सरकार के तरीकों पर यकीन नहीं ....महगाई जिस गति से बधाई जा रही है ....उसमे गरीब आदमी का जीना मुहाल हो चुका है ......उनके लिए रास्ता कैसे निकलेगा ????

    चलते चलते !!

    महत्वपूर्ण चुनौती आपके माध्यम से सरकार को देता हूँ कि सब्सिडी कटौती के नाम पर आप हर चीज को दस गुना कर दें ....वह स्वीकार है बशर्ते निचले स्तर पर जीवन यापन कर रहे लोगों का जीवन यापन सरल हो सकें तो ?

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  20. कई बातों पर सहमति के बावजूद मुझे लगता है कि यदि सरकार को सब्सिडी हटाने के प्रति इतनी ही आर्थिक हिम्मत दिखानी थी तो उसे इन आयातित पदार्थों पर उसी तरह का टैक्स लगाना चाहिए था ....जैसा रोजमर्रा के सामानों में लगा हुआ है ....मुझे लगता है यह पदार्थ और सस्ते हो जाते |

    भारत बंद से सहमति तो नहीं ...पर पता नहीं क्यों मुझे सरकार के तरीकों पर यकीन नहीं ....महगाई जिस गति से बधाई जा रही है ....उसमे गरीब आदमी का जीना मुहाल हो चुका है ......उनके लिए रास्ता कैसे निकलेगा ????

    चलते चलते !!

    महत्वपूर्ण चुनौती आपके माध्यम से सरकार को देता हूँ कि सब्सिडी कटौती के नाम पर आप हर चीज को दस गुना कर दें ....वह स्वीकार है बशर्ते निचले स्तर पर जीवन यापन कर रहे लोगों का जीवन यापन सरल हो सकें तो ?

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  21. राजनीतिबाजों की यह नौटंकी ना जनहित मैं और ना देश हित मैं है. क्या करें? काम करो तो धमकी, ट्रेन बंद.

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  22. अगर नेता ईमानदार हो और जनता पूजा पाठ जयंती स्नान शादी ब्याह मेँ फिजूल धन न गंवाये तो चीजों के दाम सस्ते हो सकते हैं , क्योँ रे मूर्तिपूजकोँ बात ठीक है कि नहीं ?

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  23. भारत बंद होता नहीं है करवाया जाता है, गुंडा गिर्दी के द्वारा. आम आदमी चाहे तो भी इसे नहीं रोक सकता है. एक बार इंदौर में एसे ही एक बंद के दौरान सफ़र करने वालो को पैदल घर आना पड़ा क्योंकि बसों को अन्दर नहीं आने दिया जा रहा था और न ही कोई अन्य साधन. रास्ते में कोई होटल आदि खुली न होने से पानी,दूध, चाय आदि भी उपलब्ध नहीं था. अब इसे बंद को जनता केसे समर्थन देगी.

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  24. साफ हिसाब रखें.. सबसिडी नहीं चाहिए.. और फालतू के कर भी...

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  25. यह बात तो सही है कि हम लोगों को आदत पड़ गयी है भारत बंद करने की..आपका लेख बहुत तर्क पूर्ण है ..सब्सिडी की आदत डाल कर सरकार देशवासियों को गफलत में रखती है...सरकारी क्षेत्र में हर जगह भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता की जड़ें मजबूती से घुसी हुई हैं...काश कहीं इमानदारी होती तो जनता त्रस्त नहीं होती.....बाकी भारत बंद का मैं भी विरोध करती हूँ क्यों कि इससे जो देश का नुक्सान होगा उसे भी आम जनता को ही झेलना होगा....

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  26. तेल पर हम कितना खर्च करते हैं? उपभोग को कम किया जा सकता है। सड़कें निजी वाहनों से अटी पड़ी हैं, रास्ते जाम हैं,फुटपाथ गायब हो चुके हैं। स्कूटर, मोटर सायकिल, कार बिक्री पर टैक्स नहीं लग सकता?
    बंद एक शोक सभा हो गया है।

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  27. I know that all politicians are same. they come in politics just for Money, name and fame. not for public security.

    But I could not understand Mr. Girijesh Rao what made you say that? Well I will be supporting Bandh against the price hikes. I think Govt. don't think for common people. Fuel price hike impacts increase in cost of daily use commodity....What the hell Congress and supporting parties doing??? Just going for bandh is not only the solution, all other parties must come and join to get price hike back...so that we can get some relaxation.


    Petrol price in pakistan 26bangladesh 22 cuba 19 nepal 34burma 30 afganisthan 36 qathar 30 INDIA 53. In India basic cost per litre 16.50 Central tax Rs. 11.80 excise duty 9.75 state tax 8.00 vat ces 4.00 total 50.05 now extra 3rupees great job frm govt,HPCL FY 0809 Profit 574.5 crIndian oil FY0910 5556.77 crBharat petrolium 5015.5cr .

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  28. हम भी भारत बंद का मजबूरी में ही समर्थन कर रहे हैं, हमारे यहाँ तो ऑफ़िशियल छुट्टी है, और सोमवार की जगह शनिवार कार्य करना है। ये बंद वाले राजनैतिक लोग कम हैं, गुंडे ज्यादा हैं जिनको पुलिस का संरक्षण मिला हुआ है।

    और बाकी तो आपने बहुत कुछ कह दिया है, हम तो केवल इतना ही कहना चाहेंगे कि अगर सही तरीके से टैक्स लगाया जाये तो ये आयकर खत्म ही हो जाये और विदेशी कंपनियाँ जिनके तलवे सरकार और उनके लोग चाटते हैं वे सिर पर पैर रखकर भाग जायें।

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  29. सीधी सच्ची खरी बात की है आपने...बंद से किसी का भला नहीं होने वाला...क्या विरोध का येही एक तरीका बचा है? ऐसा विरोध जिस से सबसे अधिक नुक्सान देश की आम जनता का होता है शर्मनाक है...राजनेता अपनी रोटियां सेकने के लिए इस तरह की मूर्खता पूर्ण कार्यवाही करते हैं और पैसे लेकर हंगामा करने वाले उनके चमचे इस बात को समझते नहीं...
    नीरज

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  30. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  31. आपकी बातो से असहमत हूं, रसोई गैस अगर Rs.800 का भी भारत मे मिलता तो महंगाई उतना नही बढती जितना अभी बढी है।

    तेल के दाम एक रूपए भी बढते हैं तो सबजी, आदी सभी का दाम बढ जाता है।

    तेल की कमी है तो पडोसी देशो में Rs.14 से Rs.23 मे क्यों मिल रहा है?

    आपके पास पैसा होगा तब आप कितनी भी महंगाई को झेल सकते हैं लेकीन उन गरीबो का क्या होगा जो Rs.10 से भी कम पैसा एक दिन मे कमाते होंगे?

    मै आपसे ईस बात पर सहमत हूं की एसे देश बंद करना गलत है, लेकीन रू. तीन बढाते बढाते वो सौ रूपए पर ले कर चले गै तो??


    पैसे लूटो या महंगाई बढा कर अरबो खरबो कमाओ एक ही बात होगी, जब कांग्रेस नही थी तब बडे बडे घोटाले होते थे और पकडे जाते थे और अब तो लिगली घोटाला चल रहा है

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  32. किसी प्रकार का बन्द समर्थन के योग्य नहीं है । समस्याओं का क्रम अन्तहीन है, जनता सब समझती है कि कौन उत्तरदायी है ।

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  33. बंद नौटंकी तो हो सकता है ...
    मगर मूलभूत आवश्यकताओं का महंगा होना गरीब को और गरीब बनाना ही तो है ...पेट्रोल ke दाम बढ़ने से हर रोटी, कपडा और मकान से जुडी सभी वस्तुएं महंगी होती है तो पिस तो गरीब ही रहा है ..

    बंद के स्थान पर किया यह जाना चाहिए ki जिन लोगों को यह suvidha मुफ्त उपलब्ध है , उनसे भी uchit दाम वसूल किये जाएँ ...ताकि संतुलन bana rahe ...

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  34. उम्दा पोस्ट.
    ये जो दामों की लिस्ट लगी है वह क्या सभी भारत की मुद्रा में है..? जैसे भारतीय १०० रू. नेपाल में १६० हो जाता है..सभी देशों में गैस के दामों की तुलना भारतीय रू. में ही होनी चाहिए.

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  35. भारत बन्द नहीं हो सकता! गए वो ज़माने !! अब यह देश चल पड़ा है। दौड़ने को कहो दौड़ेगा, रुकने को कहोगे तो तुम्हें रौंदेगा।
    ऐसा ही हो! बंद, हड़ताल, आगज़नी, हिंसा, अपराध के समर्थक इस देश को कहाँ ले जाना चाहते हैं? एक दिन के बंद से १३००० करोड़ रुपये की उत्पादकता की हानि हुई है.

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  36. @ कुन्नू सिंह ने कहा…
    लेकीन उन गरीबो का क्या होगा जो Rs.10 से भी कम पैसा एक दिन मे कमाते होंगे?

    कुन्नू भाई, वे बेचारे क्या जानें रसोई गैस का भाव क्या है. उनकी फ़िक्र करने वाले कर्मयोगी उनके बीच चुपचाप काम में लगे हैं, उन्हें बंद कराके देश का और नुक्सान कराने की बात नहीं सुहाएगी.

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  37. @ sameer chaturvedi ने कहा…
    भाई साहब शायद आपकी अक्ल पे ताला पड़ा है


    हाँ साफ़ दिख रहा है. ताला नहीं पूरा हड़ताला पड़ा है.
    अब सामान्य ज्ञान का एक प्रश्न सभी पाठकों से. हड़ताल किस भाषा का शब्द है और इसे लोकप्रिय करने का श्रेय किस नेता को जाता है?

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  38. वाणी गीत ने कहा…
    बंद के स्थान पर किया यह जाना चाहिए ki जिन लोगों को यह suvidha मुफ्त उपलब्ध है , उनसे भी uchit दाम वसूल किये जाएँ ...ताकि संतुलन bana rahe ...

    अच्छा सुझाव है. मुफ्तखोरी हर स्तर पर गलत है परन्तु गरीबों के जन-प्रतिनिधित्व के नाम पर मुफ्तखोरी? तौबा-तौबा!

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  39. To aalsi aaj kal footbaal khel raha hai, apne profile par!
    Sahmat hoon.........
    Drama hai, Let them enjoy!

    उत्तर देंहटाएं
  40. बज में कुछ विचार
    Dev Kumar Jha - सही लिखे हैं भाई...Jul 5
    Somyaa mehta - I wanted to say dis exactly... :)Jul 5
    Dr. Mahesh Sinha - petrol aur diesel ke aankde bhee deteEditJul 5
    Dr. Mahesh Sinha - Petrol Price in Pakistan -------26/
    Bangla desh ---------22/
    cuba ----------------19/
    Nepal--------------34/
    Burma ----------30/
    Afganistan ----36/
    Quater----------30/
    &&&&&&&&

    INDIA--------53/EditJul 5
    Dr. Mahesh Sinha - आँकड़े सौजन्य श्री चाणक्य शर्मा
    Basic cost of Petrol is ...16.50
    Central Tax....................11.80
    Ex. Duty .......................8.75
    State Tax......................8.00
    Vat Cess.......................4.00
    Total ____________50.05___
    Now extra 3 rupees.........EditJul 5
    Chankya Sharma - What is rate of aviation oil????

    This is cheap in allover the world , so all the western country plane fill their fuel at Mumbai or Delhi.Jul 5

    उत्तर देंहटाएं
  41. डॉ महेश सिन्हा ने कहा…
    बज में कुछ विचार ...

    यह जानकारी सही नहीं है, कृपया विश्वसनीय सूत्रों से सत्यापित कीजिये. उदाहरण के लिए बांग्लादेश में पेट्रोल की कीमत २२ रुपये न होकर ६५-७० टके के आसपास है जो कि ४५ भारतीय रुपयों के सामान है. इसी प्रकार काठमांडू में पेट्रोल का दाम अस्सी नेपाली रुपये है जोकि ५० भारतीय रुपयों के सामान हुआ.

    उत्तर देंहटाएं
  42. आपने जो लेख लिखा है वह एक दम गलत है। हो सकता आपने है आप इतने पैसा वहन कर सके। लेकिन आप शायद ये नहीं जानते की हमारे भारत देश में ऐसे भी लोग रहते है कि जो महगाई के इस बौझ को नहीं उठा सकते । सरकार जो सब सीडी दे रही है वो आपनी जेब से नहीं दे रही है। आपने शायद गरीबी नहीं देखी।

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