सोमवार, 27 सितंबर 2010

27 सितम्बर पर


दिल दे तू इस मिज़ाज का परवरदिगार दे
जो ग़म की घड़ी को भी खुशी से गुज़ार दे।
________:      *       :________
सजा कर मय्यत-ए-उम्मीद नाकामी के फूलों से
किसी हमदर्द ने रख दी मेरे टूटे हुए दिल में। 
________:      *       :________
छेड़ ना ऐ फ़रिश्ते! तू ज़िक्रे ग़मे जानाँ
क्यों याद दिलाते हो भूला हुआ अफसाना? 
________:      *       :________

भगतसिंह की जेल नोटबुक (1929 - 31) ,  पृष्ठ  24(27)
आभार: शहीदेआज़म की जेल नोटबुक 

आज 'अद्भुत प्रेमी' भगतसिंह का जन्मदिन है (27 सितम्बर 1907)

18 टिप्‍पणियां:

  1. आभार आपका ..
    भगत सिंह को नमन और श्रद्धासुमन

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  2. आत्मा को चैन पड़ गया शायद
    यूँ ही कोई अपना नाम क्यों ले?

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  3. शहीद् ए आजम सरदार भगत सिंह जी को उनके १०४ वे जन्मदिवस पर सभी मैनपुरीवासीयों की ओर से शत शत नमन |

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  4. भगत सिंह और उसके हमख्यालों को हमारा नमन।
    इस संबंध में आज के अखबार में एक छोटी सी खबर देखी थी बस, होता किसी नेता अभिनेता का जन -दिवस तो.......।

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  5. सुन्दर ईश्वर को हम बना रहे होते है, न कि वह हमें?? कुछ ऐसी ही बात है न श्रीमन

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  6. श्रद्धासुमन!
    एक शहीद, एक पैगम्बर, एक मसीहा, एक अवतार काफी नहीं है:
    वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा।

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  7. लोग कहते हैं भगत सिंह...ज़िंदाबाद , इन्कलाब... ज़िंदाबाद !

    मुझे वे अविनाशी से लगते हैं !

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  8. भगत सिंह को कल याद तो किया था ...अब जब उनके जैसे हैं नहीं , तो उनका जन्मदिन मनाये कैसे जोर शोर से ...!

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  9. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  10. दिल दे तू इस मिज़ाज का परवरदिगार दे
    जो ग़म की घड़ी को भी खुशी से गुज़ार दे।

    अच्छी पोस्ट के लिए आभार

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  11. क्यों याद दिलाते हो भूला हुआ अफसाना?

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  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  13. इस सुन्दर पोस्ट के लिए आभार ...... क्या इस jpg picture को अपने लेख में इस्तेमाल कर सकता हूँ ?

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  14. गौरव जी के ब्लॉग पर आपके दिये लिंक से यह नायाब जानकारी यहाँ मिली।
    आभार, आपका।

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