शुक्रवार, 6 मई 2011

सावधान! ...एक डिस्क्लेमर









ऐसी शिकायतें मिली हैं कि मेरे नाम से लोगों को पुस्तकें भेजी जा रही हैं। अगर आपको मेरे नाम से पुस्तक, पत्रिकादि के पार्सल डाक या कुरियर से मिलें तो जान लीजिये कि उन्हें मैं नहीं कोई और भेज रहा है। 
सावधान! वह व्यक्ति फर्ज़ी और जाली है।

... पुस्तकें भले ही असली हों।



18 टिप्‍पणियां:

  1. कैसी किताबें?
    मेरा पता दीजिए जरा उसे. कोई अपनी लिखी किताब पढवाने ले लिए ऐसा कर रहा है क्या? :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. कैसा ज़माना आ गया है! जर्मनी में एक चोर पकडा गया जो मौका लगते ही लोगों के घर साफ कर दिया करता था। जी हाँ बाकायदा झाडू-पोंछा लगाकर [जी नहीं, चुराता कुछ नहीं था, ट्रैसपास की धाराओं में अन्दर है।] ये सब कलयुग के लक्षण हैं या 2012 के?
    [यह टिप्पणी एक मज़ाक है - लगे हाथ मैं भी एक डिस्क्लेमर लगा दूँ]

    उत्तर देंहटाएं
  3. हम तो असली व्यक्तिओं की भी नहीं पढ़ते...
    वैसे भी आलसी क्या ख़ुद किसीको कुछ भेजेगा...

    उत्तर देंहटाएं
  4. सावधान किया, अच्छा किया। हाय रे प्रकाशक! तू पान की दुकान क्यो नहीं खोल लेता..?

    उत्तर देंहटाएं
  5. हमें भी भिजवा दो ...बिना पैसा दिए ही पढ़ लेंगे ! :-)

    उत्तर देंहटाएं
  6. हमे भी भिजवा दिजीये ! हमे मुफ़्त की कोई भी चीज बुरी नही लगती है!

    उत्तर देंहटाएं
  7. पहले वाली किताब का जिल्द अभी तक साबूत है .....पन्ने चने वाला ले गया.....इसलिये भेजने से पहिले खुदै सोच लो :)

    उत्तर देंहटाएं
  8. कुछ मिले तो सही!
    नाम आपका (न)ही लेंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  9. मुफ्ते माल दिले बेरहम !

    मुफ्त का माल में हमें किसी प्रकार का कोई गुरेज नहीं !
    (इसे डिस्क्लेमर के अलावा और कुछ समझने की जुर्रत ना की जाए)

    उत्तर देंहटाएं
  10. मुझे वैसे भी नहीं नहीं चाहिए -आपके नाम से भी ..
    सेल्फ में रती भर जगहं नहीं है ..
    वैसे कोई उदाहरण देना था न !

    उत्तर देंहटाएं
  11. मिलेगा तो देखेंगे.
    वह व्यक्ति फर्जी और जाली है? क्या वह वीपीपी से किताबें भेजता है?

    उत्तर देंहटाएं
  12. पुस्‍तकें प्राप्‍त करते ही लगने लगता है कि पढ़ने का आग्रह और टिप्‍पणी का दबाव दूर नहीं.

    उत्तर देंहटाएं
  13. अरे राम, हमारे पास भी कल एक पार्सल पहुंचा था। यह तो अच्छा हुआ कि हमने यह आलेख पढ लिया था सो वापस भिजा दिया है। अब सोच रहा हूँ कि वापस कहाँ जायेगा? भेजने वाला भले ही फर्ज़ी हो मगर भेजने वाले का नाम पता तो असली ही लिखा था (शायद)!

    उत्तर देंहटाएं
  14. आचार्य जी!
    पुरातन काल में अगर यह डिस्क्लेमर छपा होता तो यूं होता कि मेरे नामसे लोगों को पुस्तकें भेजी जा रही हैं. पुस्तकें भले असली हों, आदमी नकली है. पुस्तकें लेकर उसे तोता बना देना!!
    बेचारा सन्देश वाहक!!!

    उत्तर देंहटाएं

कृपया विषय से सम्बन्धित टिप्पणी करें और सभ्याचरण बनाये रखें।
साइट प्रचार के उद्देश्य से की गयी या व्यापार सम्बन्धित सामग्री वाली टिप्पणियाँ स्वत: स्पैम में चली जाती हैं, जिनका उद्धार सम्भव नहीं क्यों कि उनसे दूसरी समस्यायें भी जन्म लेती हैं। अग्रिम धन्यवाद।