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शनिवार, 23 जून 2012

नैहर जाने के पहले ...

पत्नी के नैहर जाने के पहले पति पत्नी संवाद (अगर कह सकें तो) : 

1. पेपर वाला एडवांस ले गया है। फिर से माँगने आये तो भगा दीजियेगा। हो सके तो छुट्टी ही कर दीजियेगा। 
- हूँ। (मन में - पढ़ता ही कहाँ हूँ, फालतू का खर्च। तुम्हें यही दिखता है न?) 
2. कामवाली एक टाइम आ कर कर जायेगी सब काम। आप रोटी तो नहीं बनायेंगे न
- (मुझे अकेले में कामवालियों के साथ  उलझन होती है) अरे मैं खुद कर लूँगा। उसे भी छुट्टी दे दो। 
- नहीं, आ कर कर जायेगी एक ही टाइम 
 
- (मन में) अब कौन समझाये इन्हें
3. रात में पौधों में पानी दे दिया है। शाम शाम को पानी देते रहियेगा। 
- हूँ (मन में - बारिश होगी ही, पानी देने की क्या आवश्यकता? इतना भी नहीं समझती)। 
4.धुले कपड़े बाँध कर रख दिये हैं। धोबी आयेगा तो प्रेस करने को दे दीजियेगा। 
- (मन में) अरे तुम जाओ तो सही! अब कौन टोकने वाला है,"पैंट मैचिंग नहीं। कल ही इस कलर की पहने थे, आज फिर वैसी ही शर्ट उठा लिये! दिमाग है भी या नहीं?"। है यार! लेकिन चलता नहीं है ऐसे मामलों में। 
5. (प्रकट में) बच्चों के लैपटॉप आलमारी में बन्द कर दी हूँ। (निहितार्थ) बेहूदे प्रयोगों के लिये बाहर मत निकालना। 
- हूँ। इसमें बताने वाली क्या बात है
6. आम हैं। दही जमा दी हूँ। चिउड़ा है। दूसरे फल भी हैं। सब्जियाँ, आलू, प्याज भी हैं। चावल उधर नीचे है। फ्रिज में एक दिन का खाना रखा है। सोमवार से पहले खाना बनाने की कोई जरूरत नहीं। 
- हूँ (मन में - सिवाय आम, दही और दूसरे फलों के सब व्यर्थ हैं सुभद्रे! इस भयानक उमस में गैस बारना अपने मान का नहीं)  
7. घर खुला न छोड़ दीजियेगा। छुट्टियों में लैपटॉप के अलावा कभी कभी बाहर निकल कर देख भी लीजियेगा, चाभियाँ वहीं हैं। 
- हूँ (मन में - कौन कारूँ का खजाना रखा है? बाहर क्या देखने निकलूँ?) 
8. दूसरा मोबाइल चार्ज रखियेगा। ये रहा चार्जर।आप के मोबाइल पर तो नेट का कब्जा है, हमेशा इंगेज।  
- हूँ (मन में - आज तक सिवाय इनके किसी को परेशानी नहीं हुई - ऑफिशियल या प्राइवेट कोई भी। विदेशी ब्लॉगर तक मिला कर पछताते हैं कि पकड़ लेता है तो छोड़ता ही नहीं! ...चलो इसी बहाने पुराना मोबाइल तो दिखा। कितने दिनों के बाद इसके दर्शन हुये!सिम बदल कर देखता हूँ कि अब भी इसमें नेट चलता है क्या?)  
9.
 आलमारी खुली मत छोड़ दीजियेगा। एक छोटी चुहिया घूमती दिखी मुझे। 
- हूँ (मन में - चुहिया दिखी होगी तो तुम्हारा क्या हाल हुआ होगा!) 
10. 
किसी भी बरतन का मुँह खुला मत छोड़ियेगा। छिपकलियाँ हैं, कीड़े फतिंगे हैं, बरसात आने वाली है। 
 - हूँ (मन में - तुम जाओ तो यहाँ भी बरसे। बारिश को तुमने ही रोक रखा है।)
11. धुली चादरें रखी हैं। तकिये के कवर भी। बदलते रहियेगा।
 - हूँ (मन में - तीन कमरों में दो दो दिन सोये तो सप्ताह बीत जायेगा। चादरें बदलने की क्या आवश्यकता?)
12. 
मोजे कोने में न फेंक कर धुलते रहियेगा। 
- हूँ (मन में - इसके लिये धन्यवाद। मुझे बदबू सहन नहीं होती) 
13. 
रोज शाम को टंकियों का पानी देख लिया करियेगा। मोटर चलाते रहियेगा। 
- हूँ (मन में - किसी दिन खाली रह गयीं तो ऑफिस गेस्ट हाउस जिन्दाबाद! वैसे भी पानी खर्चने वाले तो जा ही रहे हैं।) 
14. एलर्जी की दवायें रख दी हूँ। ये देखिये - यहाँ। 
- हूँ (मन में - तुम नहीं रहती हो तो एलर्जी भी फरार रहती है।) 
15. बुक शेल्व खुला मत छोड़ियेगा। कितनी धूल जम जाती है। साफ करते अब मुझे भी परेशानी होने लगी है, कामवाली के वश का नहीं। उस वैक्युम क्लीनर को तो हटा ही दीजिये। किसी काम का नहीं। 
- हूँ (मन में - अब तो मैं बहुत कम पढ़ता हूँ। खोलता ही कहाँ हूँ कि धूल जमे? तुम्हें तो बस कहने के लिये कुछ चाहिये।)
16. जाऊँ न
- हाँ, अपना मोबाइल हमेशा ऑन रखना और पास रखना। हा, हा, हा। 
- (मुस्कुरा कर) मुझे पता था कि अंत में यही होने वाला है... 

(सूचनार्थ - तीन दिन बाद नैहर जाने की योजना थी। छोटे चाचा आ गये तो तीन दिन पहले ही जाने की योजना शाम को बनी और प्रात: फरारी भी हो गई! इन्हें योजना आयोग का मेम्बर बना दिया जाय तो देश कितनी तरक्की कर जाय!)  
_______________ 
(जाने के आधे घंटे के बाद) 
निगम चुनावों के वोट के लिये पड़ोसियों की मीटिंग में जाना है।  घर की चाभी मिल नहीं रही कि बन्द कर सकूँ।
श्रीमती जी का मोबाइल 'आउट ऑफ कवरेज एरिया' बता रहा है। धन्य भाई साहब यानि कि बी एस एन एल ...धन्य मैं!
___________
अपडेट - प्रस्थान के एक घंटे ही हुये होंगे और बारिश शुरू हो गई है :) ;) 
...उड़ी बाबा! छत पर कपड़े तो नहीं?
कौन देखने जाय? जाते हुये बताया नहीं तो नहीं ही होंगे।

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

... उधार की लंठई :)

आज उधारी की लंठई :)

इंटरनेट पर उपलब्ध हिन्दी के सर्वोत्कृष्ट स्थलों में  कविताकोश  एक है। लोकगीतों पर अपनी शृंखला के लिये सामग्री ढूँढ़ते मुझे यह संस्कृत लोकगीत [ ;) वहाँ यही बताया गया है।]  दिखा। शास्त्री नित्यगोपाल कटारे की लंठई के हम मुरीद हो गये। आप भी आनन्द लीजिये। मूल गीत यहाँ है।


वैभवं कामये न धनं कामये
केवलं कामिनी दर्शनं कामये
सृष्टि कार्येण तुष्टोस्म्यहं यद्यपि
चापि सौन्दर्य संवर्धनं कामये।

रेलयाने स्थिता उच्च शयनासने
मुक्त केशांगना अस्त व्यस्तासने
शोभिता तत्र सर्वांग आन्दोलिता
अनवरत यान परिचालनं कामये।

सैव मिलिता सड़क परिवहन वाहने
पंक्ति बद्धाः वयं यात्रि संमर्दने
मम समक्षे स्थिता श्रोणि वक्षोन्नता
अप्रयासांग स्पर्शनं कामये।

सैव दृष्टा मया अद्य नद्यास्तटे
सा जलान्निर्गता भाति क्लेदित पटे
दृशयते यादृशा शाटिकालिंगिता
तादृशम् एव आलिंगनं कामये।

एकदा मध्य नगरे स्थिते उपवने
अर्धकेशामपश्यम् लता मण्डपे
आंग्ल शवानेन सह खेलयन्ती तदा
अहमपि श्वानवत् क्रीडनं कामये।

नित्य पश्याम्यहं हाटके परिभ्रमन्
तां लिपिष्टकाधरोष्ठी कटाक्ष चालयन्
अतिमनोहारिणीं मारुति गामिनीम्
अंग प्रत्यंग आघातनं कामये।

स्कूटी यानेन गच्छति स्वकार्यालयं
अस्ति मार्गे वृहद् गत्यवरोधकम्
दृश्यते कूर्दयन् वक्ष पक्षी द्वयं
पथिषु सर्वत्र अवरोधकम् कामये।
_______________________

अर्थ पूछ कर खुद को 'बोका' न सिद्ध करें। 
श्रम करें। श्रमजनित काव्यानन्द की अनुभूति होगी। स्वस्ति! ;)



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डिस्क्लेमर:
 इहलोक, परलोक, द्युलोक, ऊ लोक, ई लोक, लोकालोक आदि; वर्तमान, भूत, भविष्यादि और भी आदि आदि जोड़ते हुये समझ लें - किसी को भी ठेस पहुँचाने के उद्देश्य से यह 'लोकगीत' प्रस्तुत नहीं किया गया है। किसी भी तरह के स्पष्टीकरण के लिये शास्त्री नित्यगोपाल कटारे से सम्पर्क करें। 

चेतावनी: 
अगर विवाद की स्थिति आई तो इस पोस्ट को हटा दिया जायेगा। इसलिये शीघ्रातिशीघ्र पारायण कर आनन्द प्राप्ति कर लेवें ;) ब्लॉग लेखक टिप्पणियों का भूखा नहीं है इसलिये वाह, अद्भुत आदि आदि टाइप की टिप्पणियाँ न करें। मौन रसास्वादन करें। 
सौहार्द्र, सज्जनता और वस्तुनिष्ठता बनायें रखें। धन्यवाद। 


सोमवार, 30 जनवरी 2012

मंगल उवाच।



देखो! यह चूहा मर चुका है। इससे डरना मूर्खता है।
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कॉकरोच मटर की फली के कीड़े जैसा ही जीव है। यूँ हाय तौबा मचाने और भागने की आवश्यकता नहीं। फर्निचर से चोट लग सकती है।
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जल्दी में था। भीगा तौलिया बिस्तर पर रख दिया तो कौन सा पाप कर दिया? मैचिंग कलर के लिये बीस दुकानों पर तुम्हारे साथ घूमते मैं कभी झुँझलाया?
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जब मैं लिखता हूँ या मयूजिक सुनता हूँ तो सवाल पूछने पर ऊ हूँ टाइप ही जवाब दे सकता हूँ, समझ जाना चाहिये। मुँह फुला कर चल देने का क्या तुक? मैं मल्टी टास्कर नहीं हूँ बाबा कि एक साथ सब्जी, दाल, भात और कढ़ी पका सकूँ और बीच बीच में सीरियल में साड़ियों का चलन भी दिमाग में बिठा सकूँ। यकीन नहीं होता तो सीरियल राइटर से ही पूछ लो। वह भी बीवी से ऐसे ही त्रस्त होता होगा।
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देखो! फिल्म में कुछ अटपटा लगेगा तो मैं कमेंट करूँगा ही। जहाँ अच्छा होता है, वहाँ तो मैं भी चुप देखता हूँ।
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टी वी पर एक साथ तीन फिल्में मैं देख सकता हूँ। यह मेरा मल्टीटास्किंग है। तुम्हें न पसन्द हो तो वो दूसरा टी वी है ना!
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दोनों डार्क कलर तो थे – एक उसमें का तो दूसरा इसमें का। अब डार्क ब्लू और लाइट ब्लैक का अंतर नहीं दिखा तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा? किसी ने तो पैंट की मोहरी उठा कर नहीं देखा! रंग के ऐसे बारीक फर्क तुम्हें ही दिखते हैं। उफ्फ!
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सिर के पके बाल उखाड़ो नहीं, कैंची से कुतर दिया करो दो तीन दिन पर। मुझे कलर सलर नहीं करना।
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तुम भी खर्राटे लेती हो। कहो तो रिकॉर्ड कर सुना दूँ।
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ऐसे नहीं। एक महीने तुम सब्जी लाओ और एक महीने मैं। खर्च बराबर न हुआ तो कहना। मोल तोल करना तुम्हारी हॉबी है, सीधे क्यों नहीं कह देती? कम से कम टाइम खोटा करने का दुख तो नहीं होगा।
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मोबाइल में डाटा फ्री है। फोन नहीं लगता तो यह नेटवर्क का दोष है। मैं हमेशा इंटरनेट पर नहीं जमा रहता यार! ऑफिस में ढेरों काम हैं जिनके लिये मुझे सेलरी मिलती है।
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देखो वह बस एक कुलीग भर है। उसका हसबेंड मुझसे बहुत स्मार्ट है। वे दोनों हैप्पी हैं। फोन पर हँस कर बात करने का मतलब यह नहीं कि कोई खिचड़ी पक रही है।
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वहाँ से निकलना था तो साफ साफ कह देती! कामवाली काम करके जा चुकी थी, मुझे पता था सो कह दिया।
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अरे यार! सबके बच्चे तुम्हारे बच्चों के एज ग्रुप में ही हैं। कोई उनसे इतना बड़ा नहीं कि यूँ कहने वाली बात हो। वैसे भी उमर अधिक होना कोई नवाँ अचम्भा तो नहीं! आठवीं तो तुम हो ही।
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 घड़ी एकदम सही चल रही है। तुम तैयार हो रही थी।
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जो काम मुझे करना हो, बता दिया करो। मैं अनुमान लगाने में भोदूँ हूँ। नहीं होता तो तुमसे ....
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अरे मजाक किया मैंने! इतना भी नहीं समझती!
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प्रेरणा: The most eligible bachelor श्री श्री अभिषेकानन्द NY के गुगल शेयर 

शुक्रवार, 6 मई 2011

सावधान! ...एक डिस्क्लेमर









ऐसी शिकायतें मिली हैं कि मेरे नाम से लोगों को पुस्तकें भेजी जा रही हैं। अगर आपको मेरे नाम से पुस्तक, पत्रिकादि के पार्सल डाक या कुरियर से मिलें तो जान लीजिये कि उन्हें मैं नहीं कोई और भेज रहा है। 
सावधान! वह व्यक्ति फर्ज़ी और जाली है।

... पुस्तकें भले ही असली हों।



सोमवार, 2 मई 2011

बजरलंठ ब्लॉगर समारोग

प्रस्तावना:
पिछ्ली पोस्ट में मैंने एक फोटो लगा कर उसके किसी ब्लॉगर का फोटो होने की सम्भावना के बाबत पूछा था। अभी पर्याप्त उत्तर आ गये हैं (इससे अधिक मेरे ब्लॉग पर आते भी नहीं :)अब खुलासा करते हैं।
 अपनी गम्भीर छवि (;) हा,हा,हा!) के विपरीत मैं चेहराकिताब (facebook अनुवाद साभार - योगेन्द्र सिंह शेखावत) पर मित्रों को यूँ ही कोंचा करता हूँ। मित्र लोग भी खूब आनन्द लेते हैं। एक नमूना देखिये:

      • Saturday at 12:40pm


  • फेसबुक पर किसी को poke क्यों किया जाता है? Poke Back के क्या मायने होते हैं?
    मासूम प्रश्नों के मासूम उत्तर अपेक्षित हैं। :)
    Saturday at 5:55pm ·  · 

      • Yogendra Singh Shekhawat पोक करने का अर्थ तो कुछ घुसाने या लकड़ी करने से है होता है न |जैसे याहू मैसेंजर में "बज़" करने का रिवाज़ है वैसे ही यहाँ कुछ लकड़ी करने का रिवाज़ है |
        Saturday at 6:44pm ·  ·  2 people

      • Girijesh Rao कुछ अधिक ही 'मासूम' उत्तर है। धन्यवाद :)
        Saturday at 6:46pm via  ·  ·  2 people

      • Rajkumar Singh गिरिजेश जी , चिकोटी ,गुदगुदी ,चुटकी ..........कैसे रहेगी पोक के लिए ? या ज्यादा गंभीर होना है तो ठेल देना !
        Saturday at 7:09pm ·  ·  2 people

      • Girijesh Rao सही हैं सब। समझ में आ गया। धन्यवाद :)
        Saturday at 7:12pm via  ·  ·  1 person

      • Arvind Mishra Bade jaldi samajh gaye;-)
        Magar aisa log bag karte karwate kyon hain?
        Abhi ek FB YAUVANA ne mujhe poke kiya,fb ne sanket kiya ji main ab unhe pok kar dun so kar diya,ab mujhe pataa nahi ki ve poked hui bhi ya nahi!

        Saturday at 7:41pm ·  ·  4 people

      • Yogendra Singh Shekhawat मेरा एक दोस्त बहुत Poke करता है, जब भी वह Poke करता है, फेसबुक कहता है उसको Poke "Back" करो |
        Saturday at 7:42pm ·  ·  2 people

      • Shiv Mishra चलते-फिरते 'खोद' देने का भाव उत्पन्न होता है.
        Saturday at 7:45pm ·  ·  1 person

      • Girijesh Rao ‎@ Arvind Mishra 'लकड़ी' और 'ठेल देना' जब आये गये तो समझ में आ गया बॉस! :)
        Saturday at 7:46pm ·  ·  1 person

      • Yogendra Singh Shekhawat ‎@Shiv Mishra, गुर्र र्रर्र (बांकेलाल कॉमिक्स की शेरनी ) (यहाँ खाम्ख्वाह क्यों गलत अर्थ निकाल कर हम मासूमों को गुमराह किया जा रहा है, Poke से "खोद देने" का भाव है तो फिर Poke Back का क्या अर्थ कीजियेगा ?)
        Saturday at 7:53pm ·  ·  2 people

      • Shiv Mishra ‎@Yogendra Singh Shekhawat ji, उत्तर के मासूम होने की शर्त पर ध्यान दिया जाय. लोगों की मासूमियत पर नहीं:-)
        Saturday at 7:54pm ·  ·  2 people

      • Girijesh Rao ‎@ Yogendra Singh Shekhawat मुझे यह समझ में आया है कि जैसे चलते फिरते किसी को अंगुली से कोंच दिया जाय और बदले में वह शख्स भी ऐसा करे। मित्रों के बीच ऐसा होता ही है (इस क्रिया का 'अंगुल करने' के व्यंजनात्मक अर्थ से लेना देना नहीं है।)
        Saturday at 7:57pm ·  ·  1 person

      • Shiv Mishra और Poke Back से जबाबी खोद का भाव निकाल लेने में क्या हर्ज़ है?
        Saturday at 7:57pm ·  ·  2 people

      • Shiv Mishra गिरिजेश जी, आपने ठीक कहा. 'कोंचना' जो है वह 'पोकने' के एकदम नज़दीक है.
        Saturday at 7:59pm ·  ·  2 people

      • Yogendra Singh Shekhawat ‎(टाईगर स्टाईल पोक बेक कमेन्ट) गुर्र ररर रर्र.. (चलो ठीक है मान लिया, बहुत बढ़िया अर्थ है )
        Saturday at 8:00pm ·  ·  2 people

      • Yogendra Singh Shekhawat लेकिन शेर को पोक बेक मत करना नहीं तो खोद देगा |
        Saturday at 8:01pm ·  ·  1 person

      • Girijesh Rao ‎@ Shiv Mishra गनीमत है 'पोंकना' नहीं हुआ। अनुस्वार का अंतर महत्त्वपूर्ण है।
        Saturday at 8:02pm ·  ·  1 person

      • Girijesh Rao ‎@ Yogendra Singh Shekhawat फेसबुक पर अपनी दोस्ती मनुष्यों तक ही सीमित है इसलिये खतरा नहीं है। वैसे फेसबुक पर अनजान लोगों को तो 'पोका' नहीं जा सकता न?
        Saturday at 8:06pm ·  ·  1 person

      • Rajani Kant P= Pappu
        O= On
        K= Keyboard
        E= Entertained

        Saturday at 8:32pm ·  ·  2 people

      • Prashant Priyadarshi हा हा हा...
        Saturday at 10:39pm · 

      • Rajkumar Singh ‎@अरविन्द जी ,आप खुशनसीब हैं .यहाँ तो इंतजार है ' पोके ' जाने का :) .
        Yesterday at 2:48am · 

        • Yesterday at 2:48am · 

        • Abhishek K. Arjav 
          इस पोकिंग पर कुछ लिखने को मन आया था लेकिन फिर ऐंवें ही छोड़ दिया .
          जब हम छोटॆ कस्बों , गावों मे रहते थे तो खेत की पगडण्डियों से गुजरते हुये ललता चच्चा मिल जाया करते थे , सिर पर ऊख का बोझ रक्खे, जाते हुये, वो रुकते तो नहीं थे , लेकिन पूछ लिया करते थे , का बचवा , का हाल चाल ह !सब नीक त हव न ! यह वही फेसबुक की पोकिंग है.
          शाम को टहलने निकलने पर नहर से होते हुये शिवमूरत हलवायी की दुकान पर चाय पीने के लिये जाते हुये अकेला बाबा वाले चौराहे पर अवनीश , सतीश , फतेह , मिल जाया करते थे , अपने छोटे से इण्टर कालेज की कमेस्ट्री की लैब को "मेंटेन" रखने वाले रामखॆलावन भईया सांझ की तरकारी कीन कर जाते हुये टकरा जाते थे .
          सब अपने अपने रास्ते पर अपनी दिशा में बढ़्ते हुये , बिना रुके , बस एक दूसरे का हाल चाल पूछ लिया करते थे ! साथ के संगी साथी एक दूसरे को कुछ टान्ट मार दिया करते थे, कोंच लिया करते थे, यह वहीं फेसबुकीय पोकिंग है.
          आंचलिकता बदल गयी है , स्थानीयता बदल गयी है ,जो यथार्थ हमें वास्तविक तौर पर जोड़ता है , उसकी प्रकृति बदल गयी है लेकिन कुछ सामूहिक आदतॊं के भेस में बहती रहने वाली , वह एक बहुत ही महत्वहीन , नगण्य परंपरा यहां अन्तर्जाल पर चेहरे की इस किताब पर मौजूद है !
          यह पोकिंग बहुत अच्छी लगती है मुझे.जब भी यहां आता हूं, दो चार लोगों को पोकिया देता हूं

          Yesterday at 11:19am ·  ·  1 person

        • Girijesh Rao ‎@ आर्जव - जीय रजा! जीय।
          Yesterday at 12:02pm ·  ·  1 person

उसी दिन नीरज बसलियाल (उत्तम श्रेणी के बिलागर हैं, काँव काँव करते हैं लेकिन कम। अधिकतर कबाड़ते रहते हैं) का स्टेटस दिखा और मुझे उसमें कबीर टाइप उलटबाँसी दिखी सो 'कोंच दिया' अपनी इस्टाइल में। उनका उत्तर देखने के लिये नीचे ताकिये:


Time wounds all heels

Yesterday at 6:09pm via Mobile Web ·  · 
उनके दिये लिंक पर गया तो दंग रह गया। वहाँ जो फोटो था वह हिन्दी ब्लॉग जगत के एक जाज्वल्यमान(कृपया अर्थ के लिये शब्दकोष देखें। न मिले तो शब्द सम्मिलित करने की सलाह इस ब्लॉग का सन्दर्भ देते हुये प्रकाशक को भेज दें)  नक्षत्र के जैसा दिखता था। मैं अपनी इस नज़र पर बहुत प्रसन्न हुआ। मैंने तुरंत नीरज जी से बात बताई तो उन्हों ने दाँत दिखाने वाला चिह्न चैट पर लगा दिया। मैंने कहा कि इसे ब्लॉग पर लगा कर तपास करता हूँ। इस पर उन्हों ने वादा किया कि वह हस्तक्षेप नहीं मतलब कि टिप्पणी नहीं करेंगे।
 असल में मैं उन टाइप के लोगों के साथ हीनभावना का शिकार हो जाता हूँ जो टटका पैदा हुये बच्चे के भी नाक, नयन नक्श देख पापा, पापी, नाना, नानी, बाबा, बाबी वगैरह के अंगों से साम्यता दिखाने लगते हैं जब कि मुझे कुछ बुझाता ही नहीं :( 
 वयस्क व्यक्ति का ही सही दूसरी बार (पहली बार वाला फिर कभी बताऊँगा ;)) मैंने चेहरे की साम्यता को साफ पहचाना था इसलिये हीनभावना से मुक्त होकर पोस्ट करने को खासा उत्साहित था।
(प्रस्तावना समाप्त) 

मैंने पोस्ट लगा कर आप सबसे पूछ ही लिया। 10 मिनट के अन्दर ही सतीश सक्सेना जी का सटीक गेसनुमा उत्तर आ गया:
सतीश सक्सेना ने कहा…

सिगार के साथ अनुराग शर्मा ??? .....
रविवार, १ मई २०११ ७:५९:०० अपराह्न IST

कुल मिला कर चार सही उत्तर आये: 
 निशांत मिश्र - Nishant Mishra ने कहा…

अनुराग शर्मा
रविवार, १ मई २०११ ९:४६:०० अपराह्न IST 

अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने कहा…


फोटू स्मार्ट क्‌ है:)


रंजना ने कहा…

अनुराग शर्मा (स्मार्ट इंडियन)...???

5.  शब्द कंजूसी सम्मान - प्रवीण पाण्डेय (इनकी टिप्पणियों में शब्दों की किफायत उल्लेखनीय होती है। पिछ्ली पोस्ट पर भी है। अब तक इनके द्वारा यहाँ की गई 106 टिप्पणियों में कुल शब्दों की संख्या प्राचीन काल में मेरे द्वारा की गई किसी एक टिप्पणी की शब्द संख्या से कम होगी।) 


 इस पोस्ट से स्मार्ट इंडियन या नीरज बसलियाल का कुछ लेना देना नहीं है। किसी भी गलतफहमी के लिये दोनों स्वयं जिम्मेदार होंगे।