एक विगत आलेख में रवि रतलामी जी ने त्वरित न्याय हेतु फास्ट ट्रैक न्यायपीठों की माँग के लिये आर्ट वर्क या बैनर का सुझाव दिया था।
उनके सुझाव पर इसके लिये मैंने ब्लॉगर काजल कुमार जी से अनुरोध किया था।
उन्हों ने चित्र भेज दिया है जिसे मैं बायीं ओर के वास्तविक चित्र की
प्रतीकात्मकता से जोड़ कर देख रहा हूँ।
राजपथ का इंडिया गेट जो कि विश्वयुद्ध के हुतात्माओं की स्मृति में बनाया गया, अब सत्ता की कठोर वास्तविकता का भी प्रतीक बन चुका है जिसे बस बोल वचन की ज्योति(?) जलाने के अलावा कुछ नहीं आता। WE NEED JUSTICE के बैनर की छाँव ने लड़की के अस्तित्त्व को अन्धेरे और प्रकाश दोनों से संयुक्त कर दिया है और ऊपर नील गगन में मुक्त पक्षी उड़ रहे हैं जो तमाम औपचारिकताओं, दुरभिसन्धियों और लालफीताशाही के चंगुल में फँसे न्याय की मुक्ति की अभिलाषा के प्रतीक हैं।
इस एक जनवरी को जब कि स्वयंसिद्ध बलात्कार के विरुद्ध त्वरित न्याय के लिये आप लिखेंगे तब इस चित्र का प्रयोग करें और आज ही देश भर में फास्ट ट्रैक न्यायपीठों की स्थापना हेतु अपनी माँग को दर्शाते हुये इस चित्र को अपने ब्लॉग पर ऊपर स्थान दीजिये।
यह चित्र संवेदनहीनता और काहिली की जंजीर के टूटने का प्रतीक है, न्याय की मुक्ति का प्रतीक है और इस बात का भी कि न्याय त्वरित हो और उन तक अवश्य पहुँचे जो पीड़ित हैं।
हमें चाहिये देश भर में बलात्कारों के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट
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