शुक्रवार, 26 जून 2009

एक 'ज़ेन कथा'

एक जादूगर था जो अपनी टोप से भाँति भाँति की चीजें निकालता था। एक दिन जादूगर ने टोप से खुद को निकाला। उसके बाद वह फिर नहीं दिखा

आगे की लाइन ऑप्सनल है:

अब टोप से निकला जादूगर टोप पहन कर कहानियाँ सुनाया करता है।

8 टिप्‍पणियां:

  1. Aaj kal to sab jaadugar ban gai hain kisse sunane vaale aur mauka milte hi doosare ko topi pahana deten hain

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  2. अब टोप से निकला जादूगर टोप पहन कर कहानियाँ सुनाया करता है। और रसीली पीकर बेनामी टिपणियां करने का कारोबार करता है.:)

    रामराम.

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  3. @ ताऊ रामपुरिया
    साष्टांग दण्डवत करता हूँ ताऊ जी! बेनामी में मुझे न गिना जाय। हम खम ठोक कर चेहरा उघाड़ कर टिपियाते हैं। ;)

    'रसीली' पर:
    वैसे आप बहुत गहन रूप से मुझे मॉनिटर कर रहे हैं। आभारी हूँ। बड़ों का आशीर्वाद बने रहना चाहिए।

    वैसे यह ज़ेन कथा है बहुत ही गहन अर्थ लिए हुए।

    अब यह 'ऋचा' का दोष है कि 'लंठ' ऋषि की दृष्टि में आई। टिप्पण घाल मेल तो होगा ही। :)

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  4. भाई जरा जांच लो . ये ताऊ रामपुरिया असली नहीं है , बदमाश है , ब्लूगेर का सायं नदारत है यानी तू के नाम पे फर्जी है. इस तरह के दोगले ब्लोग्गरों में झगडे लगवाते घूम रहे हैं .

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  5. बता ही दें, कहां मिली आपको उस जादूगर की टोपी। मिली जरूर है, यह आपकी लेखनी देखकर पता ही चल रहा है।

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  6. टोप वाले जादूगर की कथा अच्‍छी है। लेकिन भाई हम तो मुरेठा वाले लंठ की लंठ-चर्चा के मुरीद हो गए :)

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  7. जब एक बार जादूगर टोपी से बाहर आ गया तो आत्‍मदीपो भव: है। फिर न कहानी सुनने की जरूरत है न सुनाने की। बुद्ध के साथ चल रहे हजारों जादूगर अपनी टोपी से बाहर निकल आए थे। जगमगा रहे थे, पर कहानियां नहीं सुना रहे थे, यह काम तो सिर्फ बुद्ध के जिम्‍मे रहा... :)

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