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रविवार, 3 अप्रैल 2011

नवरसा

ग्यारह वर्ष पहले। सिलवासा। वृद्धा कुमारी रिटायर्ड हेड नर्स रमाबेन।
प्रात:काल। बंगले के काजू, बादाम और बौराये आमों के वृक्ष सूर्य रश्मियों की प्रतीक्षा में हैं। 
'अरे आज गुड़ी पड़वा है। नवा साल का पहला दिन। तुम लोग नहीं मनाते?' 
'आंटी! बैठिये।' 
'अरे नहीं। अभी बासी मुँह हो न साहब? ये खाओ। तुम तीनों लोग लो। प्रसाद है। पूरा वर्ष शुभ होगा।' 
रात ही टेलीफोन पर पिताजी ने चैत्र नवरात्र के प्रारम्भ की बात बतायी थी। 
'आंटी! हम लोग भी मनाते हैं। नौ दिन। नवरात्र।' 
'अरे! वह नहीं, आज का दिन तो खास है। खाओ खाओ।' 
मुँह में नीम की कड़वाहट, गुड़ की मिठास, कसैले और जाने कितने स्वाद भर आये हैं। 
अरे, अरे कहने वाली आंटी खिलखिला उठी हैं।
'साहब! जीवन मीठे, तीते, कड़वे, कसैले सभी सवादों का संगम है। साल के पहले दिन इसे खाते हैं, जिससे याद रहे। कायदे से साल बितायें और सब शुभ हो।' 
सभी स्वाद, संगम, जीवन, कायदे का साल, सब शुभ।  
रमाबेन जाने कितने सूत्र सौंप कर चली गई हैं।
सामने के थॉमस ने बधाई दी है... मन में भुनभुनाहट... थॉमस! आज सुखायी मछलियाँ न बनाना..बहुत बदबू आती है।
... तुम आउटस्टेशन ड्राफ्ट देते हो। पर ड्राफ्ट 25 रूपये क्लियरिंग में कट जाते हैं। कैश दे देना। मनी माइंडेड रमा बेन...
...भोर के चार बजे हैं। सिलवासा से बनारस ट्रांसफर। पहले बाई रोड सूरत फिर वहाँ से पूर्वी उत्तरप्रदेश - अपने देस...
रमाबेन पुकार रही हैं। इस समय?...किसी ड्राफ्ट का कमीशन रह गया क्या? 
...थर्मस में चाय, बिस्कुट, नारियल, रु.101... शुभ सगुन... रमाबेन रो रही हैं। 
'खाली पेट घर नहीं छोड़ते। अब यह घर जाने फिर कब बसेगा?' 
'आंटी आप तो रहेंगी ही।' 
'अरे मेरा रहना, न रहना क्या?... बेबी होगा तो जरूर खबर करना।'
'आंटी, पहले ...' 
'सब शुभ होगा... बेटा होगा। मुझे खबर जरूर करना साहब!' 
बाबा विश्वनाथ का प्रसाद। पुत्ररत्न...रमाबेन का फोन नम्बर मिस हो गया कहीं। मिस रमाबेन कभी नहीं जानेंगी।...  
...हिन्दू नववर्ष का प्रारम्भ। चैत्र शुक्ल की प्रथम तिथि। प्रतिपदा यानि पड़वा। अपने यहाँ क्यों नहीं मनाया जाता? पूरा पश्चिम और दक्षिण भारत मनाता है... 
... चैट पर दीपक बाबा हैं - वर्ष प्रतिपदा पर कुछ लिखिये। 
अभी तो बहुत दिन हैं।
लिखियेगा अवश्य। 
... 'अमरेन्द्र जी! अवध क्षेत्र में ढूँढ़िये, प्रतिपदा उत्सव की परम्परा अवश्य रही होगी जो लुप्त हो गई है। मैं अपने इलाके में पता लगाने की कोशिश करता हूँ।' 
आचार्य अपनी ही रौ में हैं। 
'किसी संस्कृति को बरबाद करना हो तो उससे उसकी भाषा छीन लो। अवधी, भोजपुरी आदि 'देसभाषाओं' के स्थान पर 'हिन्दी' आरोपित कर दी गई... यह तो होना ही था... दक्षिण और पश्चिम में पुरानी भाषा प्रवाही रही और परम्परायें भी जीवित रहीं।' शायद मैं ठीक से कह नहीं पा रहा या समझ नहीं पा रहा।  सोच में पड़ गया हूँ - बाकी पर्व तो जीवित रहे! 
क्या यह विशुद्ध लोकपर्व रहा होगा - 'पहली मूठ' की तरह?... दुवारे पूजा। सिर पर बीज भरी ओसौनी लेकर खेत में पूजा के लिये जाते पिताजी - अब तो गाँव से प्रथा लुप्त हो गयी। क्या यह भी 'हिन्दी आरोपण' का प्रभाव है?... लेकिन अमरेन्द्र जी की बात में दम तो है!...             
...अम्मा 'नवरसा' कहती हैं। 
'जब नवरसेला बाबू तो देहीं में सब नया होला। एसे लोग बेमारो हो जालें'... नवरस रोग। अम्मा! कहीं इस 'रोग' की आशंका के कारण ही हमलोग नववर्ष नहीं मनाते हों?...  
..यहाँ गोमतीनगर में सड़क किनारे नील कुसुम, पीत कुसुम।... तीन बार तोड़ दिया गया कनैल लहलहा उठा है। मन परेशान है - फिर कोई तोड़ देगा... पार्क में बहुत पेंड़ हैं। लोहिया पार्क के वृक्ष झुरमुट। क्या क्या नहीं होता वहाँ?... सड़क पर भीड़ ही भीड़... इतने सारे लोग!...अनियंत्रित अनुशासनहीन तामस ...न्यूट्रॉन बम भारत में है? चुप रहो! आगे सोचना भी मत! ...प्रतिक्रियावाद किसे कहते हैं?... 
..भारत ने विश्वकप क्रिकेट जीत लिया... सभी खुश हैं...दो तीन महीनों के बाद 21 करोड़, 251 करोड़ की बेटिंग के अप्रैल फूल चुटकुले सच तो नहीं साबित होंगे? यू सिनिक! कभी तो ठीक सोच लिया करो... 

ढाक या पलाश के पुष्प, चित्राभार - विकिपीडिया
... आम बौरा गये हैं। पलाश फूले हैं। सेमलों ने धरती आसमान सब लाल कर दिया है। ... खुशी का रंग लाल। भारत जीत गया। सी एम ओ डा. सिंह हार गये। पड़ोस में छ: सात गोलियों द्वारा लहूलुहान, मृत देह। सड़क पर लाली बिखरी है - मॉर्निंग वाक के दौरान हत्या। मॉर्निंग वाक स्वास्थ्य के लिये लाभकारी होती है। परिवार कल्याण विभाग के हेड थे डा. सिंह। पूरे प्रदेश में विभागीय तीन हजार करोड़ रुपयों का खेल। उनके पहले वाले भी इसी तरह मॉर्निंग वाक में मार दिये गये थे। फाइनेंसियल इयर एंड। समझो बाबू! समझो।...अनियंत्रित अनुशासनहीन तामस ...न्यूट्रॉन बम भारत में है?..चुप न कराओ..मुझे आगे सोचने दो...नवरसा है। सभी बीमार हैं। ...इस साल की ट्रांसफर लिस्ट आने वाली है... ट्रांसफर होगा क्या? कहाँ भागोगे साहब? किससे भागोगे? नवरसा सर्वत्र है। भारत विकास की राह पर है...
दीपक बाबा! आप प्रसन्न हैं न? 
अमरेन्द्र जी! लुप्त परम्परा की लीक मिली क्या? 
...अब जौ, गेहूँ समय से नहीं होते। नवमी पूजन के दिन खेत की बालियों से लाये गये नये अन्न के दाने आटे में मिला कर 'शुभ' कर लिया जाता है। निशापूजा की पूड़ी 'नवान्न' से ही बनती है...घन घमंड गरजत घन घोरा... श्रीमती जी बड़बड़ा रही हैं - जिनके गेहूँ अभी खेत में है, पागल हो रहे होंगे...पूरा देश ही पागल हो रहा है मैडम!...विकास हो रहा है...नवरस बरसेगा, नवरस!...    
... सब शुभ होगा। 
हाँ, मिस रमाबेन!...आंटी! जाने आप जीवित भी हैं या नहीं? हमलोग तो नववर्ष नहीं 'हैप्पी न्यू इयर' मनाते हैं। इंडिया इज ग्रेट आंटी!... 
आंटी! नववर्ष है। शुभ न सही, 'निराला' शुभकामना गीत ही गा लूँ...
...जय हो! 

भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलधरे!

लंका पदतल शतदल
गर्जितोर्मि सागर-जल,
धोता-शुचि चरण युगल
स्तव कर बहु-अर्थ-भरे।

तरु-तृण-वन-लता वसन,
अंचल में खचित सुमन,
गंगा ज्योतिर्जल-कण
धवल धार हार गले।

मुकुट शुभ्र हिम-तुषार
प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!

...गोमतीनगर में मेघ नवरस बरसा रहे हैं। सड़क के कोलतार पर से डाक्टर सिंह के लहू की काली पड़ चुकी लाली धुल रही होगी ... मिसेज सिंह और उनके बेटे को हॉस्पिटल में इंट्रावेनस नवरस चढ़ाया जा रहा है ...साहब! जीवन मीठे, तीते, कड़वे, कसैले सभी स्वादों का संगम है...
जय हे! जय हे! जय जय जय जय हे!!...
नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
    नव पर, नव स्वर दे!  
   भारति, जय, विजयकरे!