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रविवार, 2 मई 2010

शिशु का परिच्छेदन (Circumcision)

इस लेख में दिए गए चित्र और सामग्री असामान्य हैं, 
जो कुछ सम्वेदनशील व्यक्तियों को विचलित कर सकते हैं। 
कृपया ऐसे लोग इसे न पढ़ें।
इस लेख का उद्देश्य केवल और केवल ज्ञानप्रसार है, 
भावनाएँ आहत करना नहीं। 
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एक शिशु के परिच्छेदन के चित्र नीचे दिए जा रहे हैं। मुक्तहस्त परिच्छेदन के ये चित्र आठवें दशक की एक ऑस्ट्रेलियाई नारी पत्रिका से लिए गए हैं। इनके मूल अनुशीर्षक किसी भी तरह से पूरी बात नहीं बता पाते थे। वस्तुत: ये चित्र शिशु की चीखों को सम्प्रेषित नहीं करते।
परिच्छेदन के पहले शिशु के पेट को पम्प से साफ कर दिया जाता है। यह सावधानी इसलिए ली जाती है कि कहीं वह हो रही शल्यक्रिया के उपर वमन न कर दे।

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परिच्छेदन के पहले कुछ शिशुओं को सामान्य एनेस्थेटिक दिया जाता है। वस्तुत: सामान्य एनेस्थेटिक और EMLA क्रीम दोनों नवजातों के लिए प्रतिदिष्ट हैं। शिशु शिश्न के कोरोना के उभार की स्थिति देखें जो शिश्न की आधी लम्बाई से कम पर है। इससे शिश्न की तुलना में शिश्नग्रच्छद (foreskin) की अधिक लम्बाई का संकेत मिल जाता है। 
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DPNB तीन इंजेक्सनों में दी जाती है। यद्यपि यह पृष्ठ भाग को सुन्न कर देता है लेकिन पेरेनियल नर्व की निम्न पृष्ठीय स्थिति के कारण एनेस्थेसिया के बावजूद फ्रेनुलम (frenulum) काटे जाते समय अक्सर शिशु चीखने लगते हैं। उस पीड़ा को 'असुविधा' कहना मधुभाषी होना ही कहा जाएगा क्यों कि पीड़ा शल्य के बाद में ही नहीं, शल्य क्रिया के दौरान भी रहती है। हालाँकि AAP स्थानीय एनेस्थेसिया की सलाह देता है लेकिन इसका प्रयोग कम ही होता है। इंजेक्सन का प्रभाव शल्य क्रिया के पश्चात जाता रहता है और दूसरे दर्दनिवारक देने पड़ते हैं।
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शिश्न के उपर इतना कुछ केन्द्रित होने से उसमें उठान (erection) आ जाती है। एक वीडियो में डाक्टर को शिश्न को सहलाते दिखाया गया है ताकि उठान हो (क्यों कि ऐसा होता है)। शिशु का शिश्नग्रच्छद पीछे को नहीं जाता क्यों कि सामान्यत: यह मुख्यांग से जुड़ा रहता है। ऐसा लगता है कि आनन्द की इस अनुभूति के तुरंत बाद असहनीय पीड़ा की घटना शिशु के कामोत्तेजना के भावों में विभ्रम की स्थिति उत्पन्न करती है। इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि परिणामत: बाद में सैडोमैसकिज़म (पीड़ा देकर प्रसन्न होना, एक मनोरोग) की प्रवृत्ति आ जाय।
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त्वचा को पीछे खींचना कहना हल्कापन होगा। कुछ शिशुओं में केवल त्वचा को पीछे खींचना ही पर्याप्त होता है लेकिन बहुधा शिश्नग्रच्छद और मुख्यांग के बीच एक प्रोब घुसाना पड़ता है ताकि सिनेकिया (synechia) को फाड़ कर अलग किया जा सके। इस चित्र में और इसके बाद वाले चित्र में मुख्यांग का लुहलुहान दिखना इसी कारण है। यदि यह ग़लत तरीक से किया जाय तो इससे कई नुकसान हो सकते हैं जैसे मूत्र नली फिस्टुला (fistula), मूत्र नली में दूसरा छेद हो जाना। इस प्रक्रिया में फ्रेनुलम फट सकता है जिससे कामोद्दीपक उतकों की न्यूनाधिक हानि हो सकती है।
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शिश्न को एक मिनट तक क्लैम्प में रख छोड़ना होता है ताकि उतक भोथरे और रक्तरहित हो जांय। यह वह बिन्दु है जब डाक्टर द्वारा मुख्यांग या उसके कुछ हिस्से के काट दिए जाने की आशंका रहती है। आजकल क्लैम्प के बजाय बोन फोर्सेप का प्रयोग किया जाता है। मुक्तहस्त परिच्छेदन में इसका खतरा अधिक रहता है। जब मुख्यांग को ढकने के लिए बेल (bell) का प्रयोग किया जाता है तो यह खतरा कम रह जाता है। कृपया ध्यान दें कि काटना नहीं दिखाया गया है।  
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घाव के किनारे एक दूसरे से लगे रहते हैं। यदि उन्हें रोका नहीं गया तो बाद में वे मुख्यांग से लग कर स्किन ब्रिजों (skin bridges) में परिणत हो सकते हैं। सामान्य अवधारणा के विपरीत एक परिच्छेदित शिश्न 'रखरखाव मुक्त' नहीं होता।
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म्युकोसा (mucosa) से विलग अंग का लघु कटा किनारा घाव भरने के बाद भद्दा दिखेगा।
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अत्यधिक और अनियंत्रित रक्तस्राव परिच्छेदन की महती समस्या है। इस प्रक्रिया में शिशु बहुत तेजी से प्राणनाशक सीमा तक खून बहा सकता है।  अपने प्रात:आहार के दशमांश के बराबर भी रक्तस्राव होने पर शिशु को खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
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शल्यचिकित्सक की अंगुलियों पर लगे रक्त को देखें। काटे जाने वाले 'अतिरिक्त' म्यूकोसा की मात्रा डाक्टर के अनुमान पर निर्भर है। इससे यह तय होता है कि वृहद-परिच्छेदन होगा या लघु। यदि वह बाहरी त्वचा को काटने का निर्णय लेता/ती है तो इससे ढीलेपन या तंगी का होना तय होगा, हालाँकि उसे इस बात का अनुमान भी नहीं होगा कि बड़े होने पर इसके क्या परिणाम होंगे। इसी स्टेज पर डाक्टर अधिक फ्रेनुलम काटने का निर्णय ले सकता है जिसका पुरुष की काम क्षमता पर कैसा भी अपूर्वानुमेय प्रभाव पड़ सकता है।
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सर्जिकल वस्त्रों पर रक्त के अतिशय दाग देखें।
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...और इसके बाद अंगी के जीवन के बारे में विचारें। मुख्यांग का नग्न स्वरूप स्पष्ट है। टाँकों के नीचे सूजन आने लगी है।
यह अनुक्रम शल्य क्रिया के बाद की सावधानी, संरक्षण के बारे में नहीं बताता। फिर कभी... ।
ब्लॉग लेखक चिकित्सीय क्षेत्र से सम्बन्धित नहीं है। उसने केवल अनुवाद भर किया है जिसमें त्रुटियाँ हो सकती हैं। स्पष्टीकरण के लिए अपने डाक्टर या विशेषज्ञ से सम्पर्क करें।
यह ब्लॉग लेख Infant Circumcision का हिन्दी अनुवाद है, जिसे http://www.circumstitions.com से लिया गया है। 
यहाँ छापने से पहले ब्लॉग स्वामी से अनुमति ली गई है। अतिरिक्त जानकारी के लिए मूल आंग्ल ब्लॉग को देखें।