गुरुवार, 18 जून 2009

श्रद्धांजलि : मुठभेड़ अभी जारी है (अद्यतन किया गया 20/06/09)

यह पोस्ट उन पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि देने के लिए जो चित्रकूट जिले में पिछले दिनों घनश्याम केवट डकैत गैंग के साथ मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए।

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श्रद्धांजलि:

एस ओ जी जवान शमीम
कंपनी कमाण्डर बेनी माधव सिंह
गनर इक़बाल अहमद
जवान बीर सिंह
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ये पुलिस वाले
- सड़ती हुई लावारिस लाश का पोस्टमार्टम करा उसका अंतिम संस्कार करते हैं।
- धूप, बारिश, कड़ाके की ठंड में गस्त लगाते हैं, ट्रैफिक संभालते हैं।
- दंगों में अपने ही लोगों से जीवन मृत्यु की लड़ाई लड़ते हैं।
- ये हैं इसलिए हम आप घरों में सुख से सो पाते हैं।

उनको कोसने के पहले जरा उनके कार्य के वातावरण और उसकी संवेदनशीलता को जानें और परखें। जरा सोचें कि अपने घर परिवार के साथ कितना 'क़्वालिटी टाइम' ये बिता पाते हैं !
ये वीर आप की सहानुभूति और संवेदना की दरकार रखते हैं। विश्वास नहीं होता ? एक बार कर के देखें !
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दस्यु मारा गया। कुल चार जाबांजों की बलि लेकर ।

" मुठभेड़ अभी जारी है" पंक्ति नहीं हटा रहा हूँ। यह तो निरंतर चलना है. . .

7 टिप्‍पणियां:

  1. कंपनी कमाण्डर बेनी माधव सिंह और गनर इक़बाल अहमद को हमारी हार्दिक श्रद्धांजलि.

    आपने बहुत ही मार्मिक अपील की है. और सत्य भी यही है कि चंद गलत लोगों के पीछे समस्त महकमे को ही गलत समझ लिया गया है.

    रामराम.

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  2. घरवालों को क्वालिटी टाइम की बात करें तो आज की भागती दौड़्ती जिंदगी में शायद ही कोई दे पाता होगा पर हां पुलिस वाले बहादुर भी होते है जो कि अपनी पुरानी बंदूको और लाठियों से डाकुओं और आतंकवादियों से लड़्ते हैं, ऐसे बहादुर शायद कम हैं और भ्रष्टाचारी ज्यादा हैं।

    बहादुर पुलिस वालों को नमन।

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  3. शहीद हुए पुलिस कर्मियों को मेरी तरफ से भी हार्दिक श्रद्धांजलि। कोई महकमा केवल अच्छे या केवल बुरे लोगों से नहीं भरा होता। सबकुछ मिला-जुला है।

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  4. बहादुर पुलिस को नमन।
    ताजा समाचार तो यह है कि डाकू घन्श्याम केवट ४०० पुलिस वालों को चकमा देकर भाग गया है।पुलिस पीछे लगी है;)

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  5. aapne to mere muh ki baat cheen li. Loo me mantriji ke bangale ke bahar dophar me bandook liye khade sipahi ko dekh sahanubhti hoti hai aur vyavasth per taras ata hai

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