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शुक्रवार, 14 अगस्त 2009

शान तेरी कभी कम न हो। ऐ वतन. . .


- बेटे, आज तिरंगा झण्डा बनाओ।

- ? (ये तो मुझसे बहुत कम बात करते हैं। ऐसा तो कभी नहीं किए !)

- अरे, देख क्या रहे हो? इंटरनेट पर छापेंगें।

खुश दिखते हैं। उनकी मम्मी प्रोत्साहित करती हैं।

- पेपर ही नहीं है। चार्ट पेपर पर बना दूँ ? (पहला प्रश्न)

- मेरे लैप टॉप से ले लो।

(पेपर ले आने के बाद)

- इसे इस तरह बनाऊँ कि इस तरह? (मतलब लैण्डस्केप या पोर्ट्रेट) (दूसरा प्रश्न)

- ऐसे (पोर्ट्रेट)

- बड़ा बनाऊँ या बीच का या छोटा? (तीसरा प्रश्न)

- ?

- अरे मीडियम बनाऊँ क्या ? (चौथा प्रश्न)

- हाँ |

- झण्डा सीधा बनाऊँ या लहरदार ? (पाँचवा प्रश्न)

- लहरदार।

- पापा कठिन है।

बनाने पर लग जाते हैं।

- ये बताइए बैकग्राउण्ड बनाऊँ की नहीं? (छठा प्रश्न)

(अब मैं चकित हो रहा हूँ।)

- बना दो।

- रात का या दिन का? (सातवाँ प्रश्न)

(चकित होने की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। अब रुचि पूर्वक अवलोकन की बारी है।)

- दिन का । बेटे झण्डा रात में नहीं फहराते।

- लेकिन दिन में सूरज रहता है। उसको कैसे रंग सकते हैं? (आठवाँ प्रश्न)

- चाहे जैसे रंग दो।

- अच्छा। ये बताइए बादलों के रंग नीले के अलावा क्या बनाऊँ ? (नवाँ प्रश्न)

(अबे, बादल नीले कहाँ होते हैं। तुम तो मान भी बैठे हो। – इंजीनियरिंग कॉलेज वाला शैतान मन जागता है, पर बोलता नहीं)

- लाल, काला, पीला ।

- पिंक और नारंगी रंग दूँ? (दसवाँ प्रश्न)

- चाहे जैसे कर दो।

(बना कर ले आते हैं।)

- अरे ! जय हिन्द को अंग्रेजी में लिख दिया !

(मेरा मतलब रोमन लिपि से है।)

- मुझे लिखना नहीं आता।

(नाक कटा दी नासपीटे ने। वर्तनी बताता हूँ।)

- इतना आसान ! मैं ऐसे ही लिख लेता !

- ?!@#$?

- पापा इसे डेस्कटॉप पर क्यों नहीं लगाते ? (ग्यारहवाँ प्रश्न)

- उस पर नहीं जमेगा।

- प्रिंटर से निकाले हैं इसलिए ? (बारहवाँ प्रश्न)

(अबे घोंचू, स्कैनर बोलो। डेस्कटॉप पर न लगने से इसका क्या सम्बन्ध? - इंजीनियरिंग कॉलेज वाला शैतान मन फिर जागता है, पर बोलता नहीं)

- नहीं बेटे, इसे इंटर्नेट पर छापेंगे।

- तब तक मैं स्नेक खेल लूँ ? (तेरहवाँ प्रश्न)

- हाँ

(ऑफिस का लैप टॉप निकाल कर यह लिखना प्रारम्भ करता हूँ। मान्यवर घरेलू लैप टॉप पर स्नेक खेलते गुनगुना रहे हैं)।

- हो जाय तो बता दीजिएगा।

(जो हुक्म मेरे आका)

संतोष है कि जूनियर (अरिन्दम राव) वैसा ही है जैसा सीनियर (गिरिजेश राव) बचपन में था। लगता है कि भविष्य ठीक है।

नई पीढ़ी हमारी आप की तुलना में अधिक समर्थ और अग्रगामी होगी।

जय हिन्द

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शान तेरी कभी कम हो वतन. . .