उत्तर मध्य रेलवे ने पहली बार महिला पोर्टरों की भर्ती की है। 4800 अभ्यर्थियों के बीच हुई प्रतियोगिता में बिना किसी आरक्षण के अंचितपुर जिला फतेहपुर की निवासी ऊषा ने भी सफलता प्राप्त की। उन्हें बिल्ला नं 70 दिया जाएगा। उनके अतिरिक्त एक और महिला निर्मला ने भी सफलता प्राप्त की।
प्रतियोगिता में उन्हें पुरुषों की तरह ही 25 किलो वज़न को सिर पर रख 200 मीटर तक ले जाना था। उनके लिए समय सीमा थी 4 मिनट जब कि पुरुषों के लिए 3 मिनट। इसके अतिरिक्त इन दोनों ने मानसिक परीक्षण में भी सफलता प्राप्त की।
ग़रीब ऊषा ने यह कदम बच्चों की अच्छी शिक्षा दीक्षा के लिए उठाया है जब कि वह स्वयं आठवीं तक ही पढ़ी हैं।
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चलते चलते :
नैनी क्षेत्र में इन्द्र देव को प्रसन्न करने के लिए सूखी धरती पर महिलाओं ने खुद जुत कर हल चलाए।
(समाचार और चित्र आभार: इंडियन एक्सप्रेस)
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शुक्रवार, 25 जून 2010
गुरुवार, 1 अप्रैल 2010
प्रात: से चुराए क्षणों में कुछ असहज बातें..
(1)
वित्तीय वर्ष के अंत ने बहुत व्यस्त कर दिया है। कुछ लिखना नहीं हो पा रहा। कल एक पृष्ठ की फोटोकॉपी करने में तीन बार समझाने के बाद भी एक महिला प्रशिक्षु ने 10 पृष्ठ खराब किए। उन्हें फाड़ कर फेंकना पड़ा क्यों कि गोपनीय दस्तावेज था। मैं इस मामले में कुछ अधिक ही संवेदनशील हूँ, इतना कि मेरी टेबल पर 'प्रयुक्त लेकिन एक तरफ सादे कागज' पड़े रहते हैं जिनका उपयोग मैं ड्रॉफ्ट प्रिंट लेने के लिया करता हूँ । ... मैं बड़बड़ाया - एक और पेंड़ कटा !
मेरे एक वरिष्ठ ने सुन कर कहा," अरे इतना ही पेंड़ों को बचाना चाहते हो तो अखबार लेना बन्द कर दो..."
यह अप्रत्याशित था। ग्लॉसी और निहायत ही फालतू होने के कारण मैंने टाइम्स बन्द कराया था तो आशा के अनुरूप कायदे की सामग्री न होने के कारण जागरण (पत्रकार मित्रों से क्षमा)। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस और अमर उजाला लेता हूँ। प्रात:काल 15 मिनट इंडियन एक्सप्रेस पढ़ता हूँ। उसकी रिपोर्टिंग और अन्य सामग्री अच्छी लगती है। अमर उजाला श्रीमती जी के लिए है और इसलिए मैं भी पढ़ता हूँ कि अपने स्तर और अज्ञान के प्रति ईमानदार लगता है (पुन: पत्रकार मित्रों से क्षमा)। ... वरिष्ठ महोदय का यह प्रस्ताव क्रांतिकारी लगा लेकिन मैंने प्रतिवाद किया । उन्हों ने प्रत्युत्तर दिया, " नेट है, टी वी है, रेडियो है - देखो, सुनो। यह आलस ही है कि नेट पर पता नहीं क्या क्या ढूढ़ लेते हो लेकिन ऑनलाइन अखबारों को नहीं पढ़ते। टीवी को गरियाने का शौक चल पड़ा है। देखने का सऊर तो है नहीं । जरा सोचो अखबार छपने बन्द हो जाँय तो कागज की कितनी बचत हो। अखबार तो ऑनलाइन छप ही रहे हैं। " उस जनता की सोच जिसे नेट नहीं उपलब्ध, अखबारों की छपाई बन्द करने का विचार मैंने 13 नम्बर फाइल में डाल दिया लेकिन हम जैसे तो अखबार बन्द करा ही सकते हैं।
यह विचार मन को मथे जा रहा है।
(2)
महिला प्रशिक्षु ने यह ग़लती क्यों की? न तो हमारे ऑफिस का वातावरण महिला विरोधी है और न ही बाहर इतनी अराजकता है कि एकाध घंटे अतिरिक्त रुक कर काम तसल्ली से निपटा दिए जाँय लेकिन इन्हें जाने क्या जल्दी रहती है कि आधे घंटे पहले से ही पैक अप की तैयारियाँ चलने लगती है। जाने के समय से आप घड़ी मिला सकते हैं। वित्तीय वर्षांत की क्लोजिंग ई आर पी सिस्टम होने के कारण अतिरिक्त काम ले कर आती है। लेकिन इन महिलाओं ने एक भी दिन अतिरिक्त समय नहीं दिया। एक से दो बजे तक लंच है तो है। ऐसा नहीं कि ये बहुत सुगढ़ या प्रवीण हैं। होता यह है कि अनजाने ही पुरुष कर्मी बढ़े कार्यभार को भी सहेज लेते हैं।
हाँ, यह बता दूँ कि उनके बाल बच्चे नही हैं। बढ़े हुए कार्य दबाव में भागीदार होने की पहल ये कभी नहीं करतीं। स्वत: प्रेरणा नहीं होती, हाँ कहने पर अनिच्छा पूर्वक अवश्य लग जाती हैं। जिनके रात को देर तक माल में घूमने से घर वालों को आपत्ति नहीं उन्हें ऑफिस में विलम्ब होने से तो नहीं ही होगी। कहीं ऐसा तो नहीं कि महिलाएँ कार्य स्थल पर लैंगिक कारणों से अनुचित लाभ ले रही हैं ? जब मैं यह लिख रहा हूँ तो आशा करता हूँ कि आप मेरी बात को नारीवादी चश्मे से नहीं देखेंगे और निष्पक्ष विचार करेंगे। अपवादों की बात नहीं, मैं एक सामान्य प्रवृत्ति की बात कर रहा हूँ।
(3)
सानिया मिर्ज़ा का पाकिस्तान में विवाह तय हुआ है। उसने घोषणा की है विवाहोपरांत 2012 में वह ओलम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। कई प्रश्न उठ रहे हैं:
(क) किसी विदेशी से विवाह करने के बाद नारी की भारतीय नागरिकता स्वत: समाप्त हो जाती है । क्या एक पाकिस्तानी ओलम्पिक जैसे वैश्विक स्तर के खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता/ती है? हो सकता है मेरा ज्ञान पुराना, गलत या अधूरा हो। जानकार लोग सही बात बताएँ और साथ ही उत्तरांश का उत्तर दें।
(ख) सानिया को ऐसी क्या आवश्यकता पड़ी है कि अभी से इस तरह की घोषणा कर रही है? ओलम्पिक को अभी दो वर्ष हैं।
(ग) ऐसी परिस्थिति में भारत का क्या रुख होना चाहिए? मंगल कामना है कि उसका विवाह सफल हो लेकिन यदि खुदा न खास्ता उसकी शादी ओलम्पिक के पहले टूट जाती है तो क्या उसे ओलम्पिक में भारत की तरफ से खेलने के लिए दुबारा भारत की नागरिकता लेनी होगी?
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